ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
सायण के समान विस्तृत भाष्य लिखना पड़ता तो संभवतया चालीस वर्ष लगते. मेरे लिए इस अनुवाद की एकमात्र उपलब्धि यही है कि मैं इस बहाने संपूर्ण ऋग्वेद एवं इसका सायण भाष्य पढ़ सका. यदि किसी अन्य व्यक्ति का इस अनुवाद से कोई प्रयोजन सिद्ध हो सके तो मैं अपना प्रयत्न सफल समझूंगा. मेरे स्वयं के प्रमाद अथवा अज्ञान के कारण अथवा मुद्रण संबंधी कमियों के कारण यदि अब भी कुछ त्रुटियां रह गई हों तो उन्हें मैं आगामी संस्करण में सुधारने हेतु कृतसंकल्प हूं. जो महानुभाव इस ओर मार्गनिर्देशन करेंगे उनका मैं आभार मानूंगा. अपनी बात समाप्त करने से पहले मैं यह कहने का लोभ संवरण नहीं कर पा रहा हूं कि ऋग्वेद की एक बात ने मुझे बहुत चकित किया है. उन्नत समाज, विचारशील लोगों एवं सभ्य परिवारों की सभी सामग्री का उल्लेख होते हुए भी कहीं भी दीपक अथवा किसी कृत्रिम प्रकाशसाधन का नाम नहीं मिला. डा. गंगा सहाय शर्मा
सूक्त विषय मंत्र सं.
प्रथम मंडल सूक्त विषय मंत्र सं. १. अग्नि का वर्णन एवं स्तुति १-९ स्तुति, धन प्राप्ति १-३ देवताओं को तृप्त करना, यशोगान, कल्याणकारी, नमस्कार ४-७ कर्मफलदातृ, प्रार्थना ८-९ २. वायु, इंद्र, वरुण आदि की स्तुति १-९ आह्वान, स्तुति, प्रशंसा १-३ अन्न की प्राप्ति, आह्वान ४-८ बल व कर्म हेतु प्रार्थना ९ ३. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१२ पालक, बुद्धिमान्, शत्रुनाशक १-३ सोमपान हेतु आह्वान ४-५ अन्न स्वीकार हेतु प्रार्थना ६ विश्वेदेवगण का आह्वान ७-९ सरस्वती का आह्वान, धन्यवाद, स्तुति १०-१२ ४. इंद्र का वर्णन एवं स्तुति १-१० आह्वान, गाय की स्तुति, आह्वान, शरण १-४ देशनिकाला, कृपा ५-६ सोमरस समर्पित ७ इंद्र की स्तुति ८-१० ebook converter DEMO Watermarks*
५. इंद्र की स्तुति १-१० धन-बल, प्रशंसनीय, याचना १-१० ६. इंद्र एवं मरुद्गण की स्तुति १-१० स्तुति, घनिष्ठता, पूजा-अर्चना १-१० ७. इंद्र की स्तुति १-१० स्तुति, सूर्य, पशुलाभ, प्रार्थना १-१० ८. इंद्र की स्तुति १-१० जीतना, ज्ञान व पुत्र प्राप्ति १-६ सोमरस का न सूखना, वाणी, विभूतियां ७-९ मंत्रों के इच्छुक १० ९. इंद्र की स्तुति १-१० शत्रुनाश व कार्य सिद्ध १-२ धन, वर्षा की प्रार्थना, प्रेरणा ३-६ धन याचना, दान, आह्वान, यज्ञ में वास ७-१० १०. इंद्र की स्तुति १-१२ अर्चना, वर्षार्थ मरुद्गण व इंद्र का आना १-२ बुद्धि की कामना, स्तुतिगान ३-५ मैत्री, धन व शक्ति हेतु सामीप्य ६ द्वार खोलने का आग्रह, महिमामंडित, स्तुतियां, धन कामना, आशा ७-१२ ११. इंद्र की स्तुति १-८ बलशाली, नमस्कार, दान के नाना रूप, असुरों को घेरना १-५ दान की महिमा, शुष्ण का नाश, देने का ढंग ६-८ १२. अग्नि की स्तुति १-१२ ebook converter DEMO Watermarks*
देवदूत, आह्वान, स्तुति, रक्षार्थ प्रार्थना, आग्रह १-९ धन, संतान, अन्न की प्राप्ति, देवदूत १०-१२ १३. अग्नि की स्तुति एवं वर्णन १-१२ प्रज्वलित, रक्षक व प्रशंसनीय, स्तुति १-७ अग्नि, सूर्य, इला आदि का आह्वान ८-१२ १४. अग्नि की स्तुति १-१२ इंद्र, सोमपान हेतु आह्वान १-१० आग्रह, घोड़े जोड़ना ११-१२ १५. ऋतु इंद्र व मरुद्गण आदि का वर्णन १-१२ सोमपान, पत्थर १-७ द्रविणोदा, धनदाता, सोमपान ८-११ कल्याण की कामना १२ १६. इंद्र की स्तुति १-९ हरि नामक घोड़े १-४ सोमपानार्थ आग्रह, गाएं व अश्व की कामना ५-९ १७. इंद्र एवं वरुण की स्तुति १-९ रक्षा, धन व अन्न की कामना १-४ धन प्राप्ति, इंद्र व वरुण की उत्तम सेवा व स्तुति ५-९ १८. ब्रह्मणस्पति की स्तुति व इंद्रादि का वर्णन १-९ आग्रह, फलदाता, कृपा याचना १-२ रक्षार्थ, उन्नति, पाप से रक्षा, स्तुति ३-९ १९. अग्नि एवं मरुद्गण की स्तुति १-९ आह्वान १-२ ebook converter DEMO Watermarks*
यज्ञकर्त्ता सर्वश्रेष्ठ, मरुद्गण की स्तुति, प्रशंसा, मधु समर्पित ३-९ २०. ऋभुगण की स्तुति १-८ स्तोत्र, घोड़े, रथ व गाय बनाना १-३ सफलतादायक मंत्र, अर्पण, पात्र तोड़ना, स्वर्ण, मणि आदि की प्राप्ति, यज्ञ भाग ४-८ २१. इंद्र एवं अग्नि का वर्णन १-६ प्रशंसा, आह्वान, संतानहीन, प्रगति १-६ २२. अश्विनीकुमार, मित्र आदि की स्तुति १-२१ आह्वान, स्तुति, निमंत्रण, देवपत्नियां, याचना १-१५ आगमन, परिक्रमा, विष्णु की कृपा से यजमान के व्रत पूर्ण १६-२१ २३. वायु, इंद्र आदि की स्तुति १-२४ सोमरस, रक्षा मांगना, आह्वान, महान् व शत्रुनाशक १-९ संतान, रक्षा कामना, आग्रह, सोमरस की प्राप्ति १०-१४ ऋतुएं, हितकारी जल, कर्त्तव्य, अमृत व ओषधियां १५-२० रोग निवारण, स्तुति २१-२४ २४. अग्नि आदि देवों की स्तुति १-१५ पुकार, धन याचना, प्रशंसा, प्रार्थना १-९ तारों व चंद्रमा का प्रकाशित होना १० आयु याचना, शुनःशेप, पापमुक्त हेतु प्रार्थना ११-१५ २५. वरुण की महिमा का वर्णन १-२१ क्रोध न करने का आग्रह, प्रसन्न होना, जीवनदान, अंतर्यामी वरुण १-११ आयुदाता, कवचधारक यशोगान, हव्य, रथ, प्रकाशकर्त्ता १२-२१ २६. अग्नि की स्तुति १-१० ebook converter DEMO Watermarks*
वस्तु याचना, प्रसन्नता, पूजन, स्तुतियां १-१० २७. अग्नि की स्तुति १-१३ वंदना, याचना, फलकारी, स्तुति १-८ पूजा, प्रार्थना, अनुष्ठान व यज्ञ, प्रजापालक, स्तुति ९-१३ २८. इंद्र आदि की स्तुति १-९ आह्वान, ऊखल, मूशल की स्तुति, पात्र १-९ २९. इंद्र की स्तुति १-७ धन की अभिलाषा १-७ ३०. इंद्र की स्तुति १-२२ सोमरस अर्पित, उदर, प्रार्थना, सोमरस पीने की प्रार्थना, स्तुति, रक्षार्थ बुलाना १-७ स्वर्ग, कृपा, गाय, धन आदि की वृद्धि, रथ, गो प्राप्ति ८-१७ रथ, उषा की स्तुति १८-२२ ३१. अग्नि की स्तुति १-१८ अंगिरागोत्रीय ऋषि, प्रमुखता, किन से स्वर्ग १-७ सुख, अन्न, धन, पुत्र व दीर्घायु की कामना ८-१० पुत्ररक्षा का आग्रह ११-१२ प्रिय द्रव्य १३ ज्ञान व दिशाओं का बोध १४ सुखकारी यज्ञ १५ भूल हेतु क्षमा याचना १६ मनु, अंगिरा, ययाति १७ संपत्ति, अन्न एवं बुद्धि प्राप्ति १८ ३२. इंद्र की स्तुति १-१५ ebook converter DEMO Watermarks*
मार्ग बदला, मेघ, वृत्र, दनु का वध १-१० प्रवाह खोलना, माया को जीतना, निडर, पशु स्वामी ११-१५ ३३. इंद्र की स्तुति १-१५ गो-इच्छा, विनती, अनुचर को मारना १-८ रक्षा ९ जल बरसाना, वृत्रवध, दशद्यु व श्वैत्रेय ऋषि १०-१५ ३४. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१२ आह्वान, सोमाभिषेक, रथ १-९ हवि व सोमरस लेने का आग्रह, आह्वान १०-१२ ३५. सूर्य की स्तुति १-१२ रक्षार्थ आह्वान, सविता का रथ, सफेद घोड़े, कील, प्रकाशदाता १-५ स्वर्ग व भूलोक पर अधिकार, व्याप्त होना, धन मांगना, रक्षार्थ प्रार्थना ६-११ ३६. अग्नि का वर्णन १-२० अन्न प्राप्ति, देवदूत, शत्रु की हार, धन वर्षा, धुआं, धारण, उन्नत १-१३ पापों, राक्षसों व शत्रुओं से रक्षा, धन प्राप्ति, दमनकर्त्ता, कल्याणकारी, शत्रुनाश १४-२० ३७. मरुतों का वर्णन १-१५ स्तुति, वाहन, चाबुक, तेज, दूध, कंपाना, चाल, आकाश, विस्तार, बादल, प्रेरणा १-१२ पदध्वनि, प्रार्थना, दीर्घायु १३-१५ ३८. मरुतों की स्तुति १-१५ आह्वान, स्तुति, सेवा, वर्षा, सींचना १-९ गरजना, नदी, स्तुति एवं वंदना १०-१५ ebook converter DEMO Watermarks*
३९. मरुतों का वर्णन १-१० समीप जाना, शत्रु संहार, ध्वनि, रक्षार्थ तैयार, क्रोध १-१० ४०. ब्रह्मणस्पति की स्तुति १-८ स्तुतिगान व शत्रुनाशार्थ प्रार्थना १-४ देवनिवास, ब्रह्मणस्पति, शत्रुनाश ५-८ ४१. वरुण मित्र आदि देवों का वर्णन १-९ ज्ञानी से संरक्षण, उन्नति, पापनाश, सुगम मार्ग १-५ धन व संतान की प्राप्ति, स्तोत्र, तृप्ति, निंदा न करना ६-९ ४२. पूषा की स्तुति १-१० मार्ग के पार लगाने, आक्रांताओं को हटाने, सजा देने व शक्ति देने की प्रार्थना १-५ धन प्राप्ति, उत्तरदायित्व, अन्न, धन मांगना ६-१० ४३. रुद्र, वरुण आदि देवों की स्तुति १-९ ओषधि व सुख मांगना १-४ चमकीला, सुखकारी, अन्न व प्रजा कामना ५-९ ४४. अग्नि व मरुद्गण की स्तुति १-१४ धन याचना, सेवन, स्तुति, दीर्घजीवन, प्रार्थना, हितसाधक, लपटें, स्तुति १-१४ ४५. अग्नि की स्तुति १-१० आह्वान, प्रस्कण्व, रक्षा याचना, चमकीली लपटें, फलदाता १-१० ४६. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१५ अंधकारनाशक, निवासदाता, तापशोषक, स्तुति १-५ दरिद्रता मिटाना ६ रथ, प्रकाश, उदित सूर्य, मार्ग, रक्षा निवास, ७-१३ हवि ग्रहण करने व सुख देने की प्रार्थना १४-१५ ebook converter DEMO Watermarks*
४७. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१० धन याचना, स्तुति, यज्ञसिद्ध की इच्छा, रक्षार्थ प्रार्थना १-५ सुदास, कुशों पर बैठने व सोमपान का आग्रह ६-१० ४८. उषा का वर्णन १-१६ अन्न व पशु मांगना, पालिका १-५ भिक्षुक व पक्षी, समीप जाना ६-७ शोषकों को भगाना, स्तुति, अन्न याचना ८-१६ ४९. उषा का वर्णन १-४ लाल गाएं, आगमन, कामों में लगाना, अंधकार का नाश १-४ ५०. सूर्य की स्तुति १-१३ सूर्य का जाना, नक्षत्रों का भागना, किरणें, स्वर्गलोक, स्तुति १-७ घोड़े व सात घोड़ियां ८-९ ज्योतियुक्त, रोगनाशार्थ प्रार्थना १०-१३ ५१. इंद्र की स्तुति १-१५ बलवान, रक्षक, वर्षक, स्तुति, मायावियों को हराना, कुत्स, शंबर, वज्र व यज्ञ के विरोधियों का नाश १-८ बभ्रु, घोड़े, शुक्राचार्य, शार्यात, कन्या, अश्व, रथ, धन देना, विजयी बनाना ९-१५ ५२. इंद्र की स्तुति १-१५ रक्षार्थ प्रार्थना, शक्ति व निमंत्रण, पूर्णता, सहायक, घायल वृत्र १-६ त्वष्टा, वृत्रनाश, आकाश में सूर्य, वृत्रवध, बल ७-१२ पालक, अर्चना १३-१५ ५३. इंद्र की स्तुति १-११ धन पर अधिकार १ ebook converter DEMO Watermarks*
कामना पूर्ण हेतु प्रार्थना, गाय घोड़े, मांगना १-५ उपद्रव शांत करना ६ असुर नमुचि, करंज एवं पर्णय, राजा सुश्रवा ७-१० दीर्घजीवन की प्राप्ति ११ ५४. इंद्र की स्तुति १-११ शब्दायमान व वृष्टिकर्त्ता, स्तुति १-३ शंबर, नगरों का विनाश, अतुलनीय, बुद्धिबल, कामनाएं ४-९ पेट में मेघ १० रोग मिटाने, धन, संतान व अन्न देने की प्रार्थना ११ ५५. इंद्र का वर्णन १-८ वज्र रगड़ना, सोमरस के लिए दौड़ना, आगे रहना, स्तुति, श्रद्धा व कर्मों का होना १-८ ५६. इंद्र का वर्णन १-६ सोमपान, स्तोत्र का पहुंचना, शक्तिशाली मेघों से अलग करना १-६ ५७. इंद्र की स्तुति १-६ बल हरना असंभव, इच्छापूरक, शौर्य की स्तुति १-६ ५८. अग्नि का वर्णन १-९ अंतरिक्षलोक, ज्वालाएं, धनदाता, दाहक, डरना १-५ पूजनीय, सुखदायक, धन याचना व पापों से मुक्ति ६-९ ५९. अग्नि की स्तुति १-७ धारक, वनवास १-३ स्तुति ४-७ ६०. अग्नि का वर्णन १-५ ebook converter DEMO Watermarks*
भृगुवंशी, सेवा एवं स्तुति १-५ ६१. इंद्र का वर्णन १-१६ अन्न देना व हव्य विसर्जन १-४ अन्न लाभार्थ मंत्र बोलना ५ वज्र, वृत्रवध, शत्रुनाश, फल मिलना ६-११ पशु काटना, वृत्रवध, प्रशंसा १२-१४ ऋषि नोधा, एतश का रक्षण व ऋषियों की उन्नति १५-१६ ६२. इंद्र का वर्णन १-१३ स्तोत्र, सरमा कुतिया को अन्न मिलना १-३ मेघों का डरना, अंधकार-नाश, नदियां भरना ४-६ वश में करना ७ रात काली व उषा उजली ८ काली व लाल गायों का सफेद दूध ९ स्तुति १०-१३ ६३. इंद्र की स्तुति १-९ भय, रथ, शुष्ण असुर, कुत्स, शत्रु-असुरसंहारक, नाश १-७ धन व अन्न विस्तार हेतु प्रार्थना ८-९ ६४. मरुद्गण का वर्णन १-१५ स्तुतियां, मरुद्गण, कंपन, सज्जित, वश में करना, नाश १-६ लाल घोड़ी, वृक्ष-भक्षण, गर्जन, बैठना, आयुधधारक ७-११ धन व पुत्र-प्राप्ति १२-१५ ६५. अग्नि का वर्णन १-१० समीप आना, रोकना असंभव, प्रकाशमान १-१० ebook converter DEMO Watermarks*
६६. अग्नि का वर्णन १-१० अन्न मांगना, आहुतियां १-१० ६७. अग्नि का वर्णन १-१० कृपा, अग्निप्राप्ति, अन्नस्वामी, पशुप्रिय स्थानों के रक्षार्थ प्रार्थना १-६ स्तुति, पूजा एवं कर्म ७-१० ६८. अग्नि का वर्णन १-१० तेज द्वारा रक्षा १-४ धन व पुत्रकामना, आज्ञापालन ५-१० ६९. अग्नि का वर्णन १-१० तेजस्वी, सुखकारी, आनंदकारी, सुखदाता, हव्य वहन १-१० ७०. अग्नि का वर्णन १-११ अन्न याचना, रक्षण, पालन, सहायक १-११ ७१. अग्नि का वर्णन १-१० सेवा, शक्ति, दूत, कुशल १-५ नमस्कार से अन्न वृद्धि ६-७ प्रेरणा, मित्र व वरुण ८-९ बुढ़ापा भगाने का प्रयत्न १० ७२. अग्नि का वर्णन १-१० अमृत व धन मिलना, मरुद्गण भी दुःखी, नाम व शरीर मिलना १-४ पूजन, रक्षक, हविवहन, भक्षण, जल बहाना, ज्वालाएं फैलाना ५-१० ७३. अग्नि का वर्णन १-१० अन्नदान, दुःखत्राता, धनदाता, दूध पिलाना, निशा, संसार-रक्षक, शत्रुपुत्रों का वध व कामना १-१० ebook converter DEMO Watermarks*
७४. अग्नि का वर्णन १-९ उपस्थित देव, धनरक्षक शोभा बढ़ाना, हव्यदान से धन, अन्न, ऐश्वर्य व शक्ति लाभ १-९ ७५. अग्नि की स्तुति १-५ स्तुति, बंधु, प्रिय मित्र एवं फलदाता १-५ ७६. अग्नि की स्तुति १-५ प्रसन्नता के उपाय, पूजा, यज्ञरक्षा, संतान आदि की याचना १-५ ७७. अग्नि का वर्णन १-५ तेजस्वी, हव्य देना, तेजस्वी, सोम को पीना १-५ ७८. अग्नि की स्तुति १-५ गुणप्रकाशक स्तोत्र, गौतम ऋषि द्वारा स्तुति १-५ ७९. अग्नि का वर्णन १-१२ मेघों का कांपना व बरसना, भिगोना १-३ धन, अन्न व रक्षार्थ याचना ४-१२ ८०. इंद्र की स्तुति १-१६ अहि को पीटना १ श्येन बनने वाली गायत्री २ प्रभुत्व का प्रदर्शन, भयभीत, यज्ञकर्म समर्पित ३-१६ ८१. इंद्र का वर्णन १-९ रक्षार्थ प्रार्थना, सेना के समान, गर्वहंता, अतुलनीय, धन, बुद्धि व शौर्य की याचना १-९ ८२. इंद्र की स्तुति १-६ स्तुति सुनने समीप जाना १-४ ebook converter DEMO Watermarks*
प्रेयसी के पास जाने हेतु आग्रह ५-६ ८३. इंद्र का वर्णन १-६ धन की प्राप्ति १ एक कन्या अनेक वर २ शक्ति मिलना, पूजन, प्रसन्न होना ३-६ ८४. इंद्र का वर्णन १-२० आह्वान, प्रसन्न, घोड़े, धन मिलना, छतरियां कुचलना १-८ अधिकार प्रदर्शन ९-१२ दधीचि १३ अश्वों की प्रशंसा १४-१६ रक्षा व प्रशंसा १७-२० ८५. मरुद्गण का वर्णन १-१२ अलंकार प्रिय, शक्तिशाली होना १-३ बुंदकियों वाली हरिणियां ४-५ घोड़े व निवास स्थल, भय ६-८ वृत्रवध ९ वीणा वादन, गौतम, सुख याचना १०-१२ ८६. मरुद्गण की स्तुति १-१० सोमपान व हव्य वहन १-७ पसीने से नहाना ८ उपद्रव, राक्षसों का नाश ९-१० ८७. मरुद्गण की स्तुति १-६ चमकना, वृष्टि, पर्वत को कंपाना, यज्ञपात्र, धारण, स्थान १-६ ebook converter DEMO Watermarks*
८८. मरुद्गण का वर्णन १-६ अन्न लाना, कल्याण, आयुध, कुआं उठाना, स्तुति १-६ ८९. विश्वेदेव का वर्णन १-१० आयुवृद्धि, धन व ओषधि हेतु याचना, कल्याण १-६ सफेद बूंदों वाले घोड़े व नाना वर्ण की गाएं ७ मानवों की आयु सौ वर्ष तय ८-९ जन्म और उसका कारण १० ९०. विश्वेदेव का वर्णन १-९ गंतव्य, धन व सुख लाभ १-३ मार्ग व मधु वर्षा ४-६ आकाश व देवों द्वारा सुख ७-९ ९१. सोम का वर्णन १-२३ धन, फलदाता, सुधारक १-३ हव्य लेने हेतु प्रार्थना ४-५ जीवनदायिनी ओषधि व धन ६-७ दुःख से बचाने की प्रार्थना ८-९ यज्ञ, संपत्ति की वृद्धि व हृदय में वास १०-१३ अनुग्रही व हितकारी, अन्न कामना १४-१८ पुत्ररक्षक, शास्त्रज्ञ, पुत्रदाता १९-२० शत्रुजेता, अंधकारनाशक, स्वामी २१-२३ ९२. उषा एवं अश्विनीकुमारों का वर्णन १-१८ अंधकारनाशक, पहले तेज पूर्व में १-६ गोयुक्त अन्न-धन की याचना ७-८ ebook converter DEMO Watermarks*
पश्चिम में तेज ९ पक्षियों की हिंसा १० तेज का विस्तार, धन व सौभाग्य मांगना ११-१५ धन व ज्योति मिलना, आरोग्य व सुखदाता १६-१८ ९३. अग्नि एवं सोम की स्तुति १-१२ सुख, गाएं, अश्व, पुत्र-पौत्र की याचना १-३ उपकारी सूर्य ४ नक्षत्र धारण व धरती का विस्तार १-६ अन्न भक्षण, पाप से बचाने की प्रार्थना ७-८ अन्य देवों से अधिक प्रसिद्धि ९ धन मांगना १०-१२ ९४. अग्नि की स्तुति १-१६ कल्याण, ईंधन बटोरना, महान्, पुरोहित, अंधकारनाशक, हिंसा से बचाने की प्रार्थना, वन घेरना, पक्षियों का डरना, संपत्तियों में निवास, आहूत १-१४ समृद्ध बनाना, आयुवृद्धि की कामना १५-१६ ९५. अग्नि का वर्णन १-११ रात-दिन के पुत्र, यशस्वी, व्यापक, ऋतुविभाजक, जल उत्पत्ति का कारण, धरती व आकाश का डरना १-५ बलों का स्वामी, किरण के समान, अन्न व धन की प्राप्ति ६-११ ९६. अग्नि का वर्णन १-९ वायु व जल १ धारण करना २-७ धन व अन्न की कामना ८-९ ebook converter DEMO Watermarks*
९७. अग्नि की स्तुति १-८ पूजा से पाप नष्ट एवं रक्षा १-६ पालनार्थ याचना ७-८ ९८. अग्नि का वर्णन १-३ प्रातःकाल सूर्य से मिलना १ दिवस रात्रि में शत्रु से बचाव २ यज्ञ सफलता हेतु प्रार्थना ३ ९९. अग्नि का वर्णन १ दुःखों व पापों से पार लगाने की प्रार्थना १ १००. इंद्र का वर्णन १-१९ रक्षक बनने का आग्रह १ सूर्य की चाल पाना असंभव २ मरुद्गण की सहायता से रक्षक बनना ३-१५ मानव सेना को इंद्र के अश्वों द्वारा जानना १६ वृषागिरी के पुत्रों द्वारा इंद्र की स्तुति १७ शत्रुओं, राक्षसों का वध, भूमि, सूर्य व जल का बंटवारा १८ इंद्र पूजन का आग्रह १९ १०१. इंद्र का वर्णन १-११ कृष्ण असुर की पत्नियां, वृत्र, शंबर, पिप्रु, आह्वान, स्वामी १-६ मध्यमा वाणी, उदित होना, सत्यधन, हवि देना, उपजिह्वा खोलने का आग्रह, अन्नपूजन ७-११ १०२. इंद्र की स्तुति १-११ स्तुति, सूर्य व चंद्र का घूमना, रथ, शत्रु-शक्ति, अव्याकुल व जयशील, असीमित ज्ञान, ebook converter DEMO Watermarks*
स्तुति १-७ संसार वहन में समर्थ, शत्रुनाशक पुत्र मांगना, आह्वान, अकुटिल गति ८-११ १०३. इंद्र का वर्णन १-८ ज्योति मिलन, वृत्रवध, गमन, समूह निर्माता १-४ धन, प्रसन्न होना, शुष्ण, पिप्रु आदि का नाश ५-८ १०४. इंद्र का वर्णन १-९ वहन, समीप जाना, शिफा, अंजसी, कुलिशी, वीरपत्नी नामक नदियां, कुयव असुर गर्भस्थ संतान, श्रद्धा, भोग्य पदार्थ, सोमपान ६-९ १०५. विश्वेदेव का वर्णन १-१९ चंद्रमा, प्रसवपीड़ा, पूर्वपुरुष, देवदूत, तीनों लोकों मे वर्तमान, पापबुद्धि शत्रु, मानसिक कष्ट, सौतें, किरणों की स्तुति १-९ प्रशंसनीय स्तोत्र, भेड़िए को रोकना, नवीन बल, बंधुता, परमज्ञानी, मननीय स्तुति, अतिक्रमण असंभव, त्रित, लाल वृक, अनुग्रह १०-१९ १०६. विश्वेदेव का वर्णन १-७ मार्ग, शोभनदानयुक्त देव, यज्ञवर्धक द्यावा-पृथ्वी, रक्षार्थ प्रार्थना, अन्न याचना १-४ शक्ति, वृत्रहंता, जागरूक ५-७ १०७. विश्वेदेव का वर्णन १-३ अनुग्रह याचना, स्तुत देव, रक्षार्थ प्रार्थना १-३ १०८. इंद्र व अग्नि की स्तुति १-१३ रथ, परिमाण, संयोजन, कुश फैलाना, मित्रता, श्रद्धा, आग्रह, यदु, तुर्वश, अनु आदि के बीच स्थित होना, धरती-आकाश १-९ कामवर्षक, सोमपान, प्रसन्न होना, आदर १०-१३ १०९. इंद्र व अग्नि की स्तुति १-८ स्तुति, जामाता, कन्यालाभ, परंपरा, हथेलियां १-४ ebook converter DEMO Watermarks*
बलप्रदर्शन, महान्, ब्रह्मलोक, असुरनाशक ५-८ ११०. ऋभुगण की स्तुति १-९ स्तोत्र, घर जाना, साधन, अमरता, अधिकार १-९ १११. ऋभुगण का वर्णन १-५ हरि नामक दो घोड़े बनाना, निवास, अन्नपूजन, आह्वान, विजयी बाज १-५ ११२. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-२५ शंख बजाना, ज्ञानियों की रक्षा, शासन, व्यापक, रेभ व वंदन ऋषि, कण्व, भुज्यु, कर्कंधु, वय्य, पृश्निगु, पुरूकूत्स, ऋजाश्व, श्रोण, वसिष्ठ, कुत्स, श्रुतर्य, नर्य विपश्चला, वश ऋषि १-१० दीर्घश्रवा, कक्षीवान्, त्रिशोक, मांधाता, भरद्वाज, दिवोदास, पृथि, शंयु, अत्रि, ऋषि पठर्वा, स्तोत्र, विमद, अधिगु व ऋतुस्तुभ ११-२० कृशानु, पुरुकुत्स, मधु देना, घोड़े, कुत्स, तुर्वीति आदि, आह्वान, स्तुति २१-२५ ११३. उषा एवं रात्रि का वर्णन १-२० उत्पत्ति स्थान, विचरण, एक मार्ग, नेत्री, भुवनों का प्रकाशन, अभीष्ट, अधीश्वरी, चेतन बनाना, कल्याण, अनुकरण १-१० देखना, द्वेषियों को हटाने वाली, तेज से विचरना, लाल रथ से आना, तेज से बढ़ना, अन्न बढ़ाना, धनस्वामिनी उषा, अश्व देने वाली, स्तोत्र की प्रशंसा, कल्याणकारी ११-२० ११४. रुद्र की स्तुति १-११ स्तुतियां, मनु, सुख इच्छा, कृपादृष्टि, दृढ़ांग, स्तुति वचन बोलना १-६ शरीर का नाश, बुलाना, रक्षार्थ प्रार्थना, हनन का साधन दूर रखने व स्तुति के आदर हेतु आग्रह ७-११ ११५. सूर्य का वर्णन १-६ जंगम-स्थावर, स्तुति, परिभ्रमण, अंधकार फैलाना, अंधेरा धारण करना, पाप से बचाने की प्रार्थना १-६ ११६. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-२५ ebook converter DEMO Watermarks*
किशोर विमद, विजय, तुग्र, भुज्यु, रथ, सागर, पेदु, कक्षीवान्, कारोतर पात्र, अग्नि बुझाना, यंत्रपीडागृह, गौतम, च्यवन, वंदन, दध्यंग ऋषि, बुलाना, वध्रिमती, हिरण्यहस्त, १-१३ वर्तिका, विश्पला, ऋजाश्व, कांति पाना, स्तुति, यज्ञ के भागों का अर्पण लौहरथ १४-२० शत्रुवध, जल उठाना, स्तुति, रेभ, कर्मों का वर्णन २१-२५ ११७. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-२५ सेवा, घर जाना, पूजित, रेभ, वंदन, प्रतिज्ञा, घोषा, नृषदपुत्र, पेदु, वीरकार्य १-१० भरद्वाज, कामवर्षक, च्यवन, तुग्र, भुज्यु, विश्वाच, ऋजाश्व, मेष को काटना, आह्वान, दुधारू बनाना, माहात्म्य, घोड़े का सिर, अनुग्रह बुद्धि, जीवनदान, वीर कर्मों का बखान ११-२५ ११८. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-११ रथ, पुत्रादि, दरिद्रतानाशक, तेज गति वाले, सूर्यकन्या, वंदन ऋषि, गाय, च्यवन, अत्रि, वर्तिका, विश्पला १-८ पेदु, आह्वान ९-११ ११९. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१० रथ, ऊर्जानी, जयशील, भुज्यु, दिवोदास १-४ कुमारी का पति, अत्रि, शंयु, वंदन ऋषि, युवा बनाना, कामदेव, कामना, दधीचि, पेदु ५-१० १२०. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१२ मार्ग, स्तोत्र, वषट्कार, बुद्धि, कक्षीवान्, ऋजाश्व, वृक, अगम्य स्थान १-८ पोषण, अश्वरहित रथ, सोमपान, घृणा ९-१२ १२१. इंद्र का वर्णन १-१५ यज्ञ में आना, गाएं निकालना, आकाश धारण, दिवस का प्रकाशन, सोमपान १-८ ऋभु, शुष्ण, मेघ, वृत्र, उशना, एतश, पाप, वृद्धि ९-१५ ebook converter DEMO Watermarks*