भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 811, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 811

हे धन के स्वामी इंद्र! हम तुम्हारे पुराने और नए साहसपूर्ण कार्यों की स्तुति करते हैं. तुमने वे कर्म किए थे. हे वज्रवाले इंद्र! तुम धरती-आकाश को वश में करते हुए मनुष्यों के लिए विचित्र जलों को धारण करते हो. (६) तदिन्नु ते करणं दस्म विप्राहिं यद्घन्नोजो अत्रामिमीथाः. शुष्णस्य चित्परि माया अगृभ्णाः प्रपित्वंयन्नप दस्यूँरसेधः.. (७) हे सुंदर एवं बुद्धिमान् इंद्र! तुमने वृत्र को मारकर जो अपनी शक्ति को सब पर प्रकट किया है वह निश्चित रूप से तुम्हारा कर्म था. हे इंद्र! तुमने शुष्ण असुर की युवती पत्नी को अपने अधिकार में किया एवं युद्ध में शत्रुओं को बाधा पहुंचाई. (७) त्वमपो यदवे तुर्वशायारमयः सुदुघाः पार इन्द्र. उग्रमयातमवहो ह कुत्सं सं ह यद्वामुशना्रन्त देवाः.. (८) हे इंद्र! तुमने नदियों के किनारे खड़े होकर यदु और तुर्वश नामक राजाओं को ऐसा जल प्रदान किया जो वनस्पतियों को बढ़ाने वाला था. हे इंद्र! तुम और कुत्स आक्रमणकारी शुष्ण से लड़ने गए थे. भयानक शुष्ण को मारकर तुमने कुत्स को घर पहुंचाया. तब उशना कवि के साथ सभी देवों ने तुम्हारा स्वागत किया था. (८) इन्द्राकुत्सा वहमाना रथेना वामत्या अपि कर्णे वहन्तु. निः षीम॒द्द्रयो धमथो निः षधस्थान्मघोनो हृदो वरथस्तमांसि.. (९) हे इंद्र एवं कुत्स! एक रथ पर बैठे हुए तुम दोनों को घोड़े यजमान के पास ले जावें. तुमने शुष्ण को जल से बाहर निकाला था एवं धनी यजमानों के हृदयों को ढकने वाला अंधकार दूर किया था. (९) वातस्य युक्तान्त्सुयुजश्चिद्वश्वान्कविश्चिद्देषो अजगन्नवस्युः. विश्वे ते अत्र मरुतः सखाय इन्द्र ब्रह्माणि तविषीमवर्धन्.. (१०) अवस्यु नामक विद्वान् ऋषि ने वायु की गति से चलने वाले एवं रथ में ठीक से जुड़े हुए घोड़ों को प्राप्त किया था. हे इंद्र! अवस्यु के सभी मित्र स्तोताओं ने तुम्हारा बल अपनी स्तुतियों द्वारा बढ़ाया. (१०) सूरश्चिद्रथं परितक्म्यायां पूर्वं करदुपंर जूजुवांसम्. भरच्चक्रमेतशः सं रिणाति पुरो दधत्सनष्यिति क्रतुं नः.. (११) इंद्र ने संग्राम में एतश ऋषि के साथ लड़ने वाले सूर्य का तेज चलने वाला रथ गतिहीन कर दिया था. एतश के कल्याण के लिए इंद्र ने पहले सूर्य के रथ का एक पहिया छीन लिया था. उसीसे इंद्र असुरों का नाश करते हैं. (११) ebook converter DEMO Watermarks*