ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 816, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत त्ये मा ध्वन्यस्य जुष्टा लक्ष्मण्यस्य सुरुचो यतानाः. मह्ना रायः संवरणस्य ऋषेर्व्रजं न गावः प्रयता अपि ग्मन्.. (१०) लक्ष्मण के पुत्र ध्वन्यक द्वारा दिए हुए दीप्तिशाली एवं वहन करने में समर्थ घोड़े हमें ढोवें? गाएं जिस प्रकार गोचर भूमि में जाती हैं, उसी प्रकार ध्वन्यक द्वारा दिया हुआ धन मुझ संवरण ऋषि के घर में आवे. (१०) सूक्त—३४ देवता—इंद्र अजातशत्रुमजरा स्वर्वत्यनु स्वधामिता दस्ममीयते. सुनोतन पचत ब्रह्मवाहसे पुरुष्टुताय प्रतरं दधातन.. (१) हे ऋत्विजो! अजातशत्रु, शत्रुहंता एवं अक्षीण, स्वर्गदाता तथा अधिक हव्य प्राप्त करने वाले इंद्र के निमित्त पुरोडाश पकाओ तथा सोमरस निचोड़ो. वे इंद्र स्तोत्र धारण करने वाले एवं बहुतों द्वारा स्तुत हैं. (१) आ यः सोमेन जठरमपिप्रातामन्दत मधवा मध्वो अन्धसः. यदीं मृगाय हन्तवे महावधः सहस्रभृष्टिमुशना वधं यमत्.. (२) इंद्र ने सोमरस से अपना पूरा पेट भर लिया था एवं वे मधुर सोमरस पीकर प्रसन्न हुए थे. इंद्र ने मृग असुर को मारने के लिए अपने असीमित तेज वाले महान् वज्र को उठाया था. (२) यो अस्मै घ्रंस उत वा य ऊधनि सोमं सुनोति भवति द्युमाँ अह. अपाप शक्रस्ततनुष्टिमूहति तनूशुभ्रं मघवा यः कवासखः.. (३) जो यजमान महान् इंद्र के लिए रात-दिन सोमरस निचोड़ते हैं, वे दीप्तिशाली बनते हैं. जो लोग धर्मकार्य करना चाहते हैं, शोभन अलंकार आदि धारण करते हैं, किंतु धनवान् होकर भी बुरे लोगों को अपना मित्र बनाते हैं, शक्तिशाली इंद्र ऐसे लोगों का त्याग कर देते हैं. (३) यस्यानधीत्पितरं यस्य मातरं यस्य शक्रो भ्रातरं नात ईषते. वेतीद्वस्य प्रयता यतङ्करो न किल्बिषादीषते वस्व आकरः.. (४) इंद्र ने जिस अयज्ञकर्त्ता के पिता, माता एवं भ्राता का वध किया था, उसके समीप से भी वे दूर नहीं जाते, अपितु उसके द्वारा दिए गए हव्य की कामना करते हैं. शासनकर्त्ता एवं धनस्वामी इंद्र पाप से दूर नहीं भागते. (४) न पञ्चभिर्दशभिर्वष्ट्यारभं नासुन्वता सचते पुष्यता चन. जिनाति वेदमयुा हन्ति वा धुनिरा देवयुं भजति गोमति व्रजे.. (५) इंद्र शत्रुओं का नाश करने के लिए पांच या दस सहायकों की इच्छा नहीं करते. सोम न ebook converter DEMO Watermarks*