भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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पृष्ठ 815

पुरू यत्त इन्द्र सन्त्युक्था गवे चकर्थोर्वरासु युध्यन्. ततक्षे सूर्याय चिदोकसि स्वे वृषा समत्सु दासस्य नाम चित्.. (४) हे इंद्र! तुम्हारे निजी स्तोत्र बहुत से हैं. तुम उपजाऊ धरती पर वर्षा के जल के निमित्त जल प्रतिबंधकों का नाश करते हो. कामवर्षी इंद्र! तुम सूर्य के स्थान अंतरिक्ष में वर्षा रोकने वाले राक्षसों के साथ युद्ध करके उनका नाम तक मिटा देते हो. (४) वयं ते त इन्द्र ये च नरः शर्धो जज्ञाना याताश्च रथाः. आस्माज्जगम्यादहिशुष्म सत्वा भगो न हव्यः प्रभृथेषु चारुः.. (५) हे इंद्र! हम तुम्हारे सेवक ऋत्विज् और यजमान-यज्ञ करके तुम्हारा बल बढ़ाते हैं एवं हवन करने के लिए तुम्हारे समीप जाते हैं. हे व्यापक बलशाली इंद्र! तुम्हारी कृपा से युद्ध में हमारे पास प्रशंसनीय योद्धा उसी प्रकार आवें, जिस प्रकार भग के समीप गए थे. (५) पपृक्षेण्यमिन्द्र त्वे ह्योजो नृम्णानि च नृतमानो अमर्त्तः. स न एनीं वसव्हानो रयिं दाः प्रार्यः स्तुषे तुविमघस्य दानम्.. (६) हे पूजनीय शक्ति वाले, सर्वव्यापक एवं मरणरहित इंद्र! तुम अपने तेज से जगत् को ढककर हमें उज्ज्वल वर्ण का धन पर्याप्त मात्रा में दो. हम अधिक धन वाले इंद्र के दान की प्रशंसा करते हैं. (६) एवा न इन्द्रोतिभिरव पाहि गृणतः शूर कारून्. उत त्वचं ददतो वाजसातौ पिप्रीहि मध्वः सुषुतस्य चारोः.. (७) हे शूर इंद्र! स्तुतिकर्त्ता एवं ऋत्विज् हम लोगों की तुम रक्षा करो. तुम युद्ध में आच्छादक रूप धारण करके हमारे द्वारा निचोड़ा हुआ सोम पीकर प्रसन्न बनो. (७) उत त्ये मा पौरुकुत्स्यस्य सूरेस्त्रसदस्योर्हिरणिनो रराणाः. वहन्तु मा दश श्येतासो अस्य गैरीक्षितस्य ऋतुभिर्नु सश्चे.. (८) गिरिक्षित गोत्र में उत्पन्न पुरुकुत्स के पुत्र, स्वर्ण के स्वामी एवं प्रेरक त्रसदस्यु द्वारा दिए गए सफेद रंग के दस घोड़े हमारा रथ खींचें. रथ में घोड़े जोड़ने का काम हम शीघ्र कर लेंगे. (८) उत त्ये मा मारुताश्वस्य शोणाः क्रत्वामघासो विदथस्य रातौ. सहस्रा मे च्यवतानो ददान आनूकमर्यो वपुषे नार्चत्.. (९) मरुताश्व के पुत्र विद्ध के द्वारा दिए गए लाल रंग के घोड़े शीघ्र गति से हमें ढोवें. मुझ पूज्य को उन्होंने हजारों संख्या में धन एवं शरीर के गहने दिए हैं. (९) ebook converter DEMO Watermarks*