भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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की रक्षा करो. हे अतिशय शक्तिशाली एवं दीप्त इंद्र! हम तुम्हारी कृपा से प्राप्त धन तुम्हें अर्पण करते हैं एवं तुम्हारी स्तुति करते हैं. (८) सूक्त—३६ देवता—इंद्र स आ गमदिन्द्रो यो वसूनां चिकेतद्दातुं दामनो रयीणाम्. धन्वचरो न वंसगस्तृषाणश्चकमानः पिबतु दुग्धमंशुम्.. (१) इंद्र हमारे यज्ञ में आवें. जो इंद्र धनों को जानते हैं, वे कैसे हैं? वे धन देने वाले हैं. धनुर्धारी के समान उत्तम गति वाले एवं अत्यंत प्यासे इंद्र दुग्धमिश्रित सोम पिएं. (१) आ ते हनू हरिवः शूर शिप्रे रुहत्सोमो न पर्वतस्य पृष्ठे. अनु त्वा राजन्नर्वतो न हिन्वन् गीर्भिर्मदेम पुरुहूत विश्वे.. (२) हे हरि नामक अश्वों के स्वामी एवं शूर इंद्र! हमारे द्वारा दिया हुआ सोम पर्वत के समान ऊंची तुम्हारी ठोढ़ी तक चढ़े. हे दीप्तिशाली एवं बहुतों द्वारा बुलाए गए इंद्र! घोड़े जिस प्रकार घास से तृप्त होते हैं, उसी प्रकार हम अपनी स्तुतियों द्वारा तुम्हें संतुष्ट करेंगे. (२) चक्रं न वृत्तं पुरुहूत वेपते मनो भिया मे अमतेरिदद्रिवः. रथादधि त्वा जरिता सदावृध कुविन्नु स्तोषन्मघवन्पुरूवसुः.. (३) हे बहुतों द्वारा बुलाए गए एवं वज्रधारी इंद्र! दरिद्रता से मेरा मन धरती पर चलने वाले पहिए के समान कांपता है. हे सदा बढ़ने वाले एवं धनस्वामी इंद्र! पुरावसु नामक ऋषि तुम्हें रथ पर बैठा जानकर तुम्हारी स्तुति अधिकता से करते हैं. (३) एष ग्रावेव जरिता त इन्द्र्येर्ति वाचं बृहदाशुषाणः. प्र सव्येन मघवन्वंसि रायः प्र दक्षिणिद्धरिवो मा वि वेनः.. (४) हे इंद्र! अधिक फल को शीघ्र भोगने के इच्छुक स्तोता लोग तुम्हारी उसी प्रकार स्तुति करते हैं, जिस प्रकार सोम कूटने वाले पत्थर की करते हैं. हे धन के स्वामी एवं हरि नामक घोड़ों वाले इंद्र! तुम दाएं और बाएं दोनों हाथों से धन बांटते हो. तुम हमें विफल मनोरथ मत करना. (४) वृषा त्वा वृषणं वर्धतु द्यौर्वृषा वृषभ्यां वहसे हरिभ्याम्. स नो वृषा वृषरथः सुशिप्र वृषक्रतो वृषा वज्रिन्भरे धाः.. (५) हे कामवर्षक इंद्र! वर्षा करने वाला स्वर्ग तुम्हारी वृद्धि करे. हे वर्षा करने वाले इंद्र! तुम इच्छापूरक घोड़ों द्वारा ढोए जाते हो. हे शोभन ठोड़ी वाले, कल्याण वर्षी रथ वाले एवं वज्रधारी इंद्र! संग्राम में तुम हमारी रक्षा करो. (५) ebook converter DEMO Watermarks*