भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 839, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 839

अश्विनीकुमार, त्वष्टा एवं विभु हमें धन देने के लिए प्रसन्न हों. (४) उत त्यन्नो मारुतं शर्ध आ गमद्दिविक्षयं यजतं बर्हिरासदे. बृहस्पतिः शर्म पूषोत नो यमद्वरूथ्यं१ वरुणो मित्रो अर्यमा.. (५) स्वर्गलोक में रहने वाले तथा पूजा के योग्य मरुद्गण बिछे हुए कुशों पर बैठने के लिए हमारे पास आवें. बृहस्पति, पूषा, वरुण, मित्र तथा अर्यमा हमें घर से संबंधित सभी सुख दें. (५) उत त्ये नः पर्वतासः सुशस्तयः सुदीतयो नद्य१ स्त्रामणे भुवन्. भगो विभक्ता शवसावसा गमदुरुव्यचा अदितिः श्रोतु मे हवम्.. (६) शोभन स्तुतियों वाले पर्वत एवं उत्तम दान वाली नदियां हमारी रक्षा का कारण बनें. धनों को बांटने वाले भग अन्न के साथ हमारे पास आवें. सर्वत्र व्याप्त अदिति मेरी स्तुति को सुनें. (६) देवानां पत्नीरुशतीरवन्तु नः प्रावन्तु नस्तुजये वाजसातये. याः पार्थिवासो या अपामपि व्रते ता नो देवीः सुहवाः शर्म यच्छत.. (७) देवपत्नियां हमारी स्तुतियों की अभिलाषा करती हुई हमारी रक्षा करें. वे बलवान् पुत्र एवं अन्न पाने के लिए हमारी रक्षा करें. हे देवियो! आप धरती पर रहो अथवा आकाश में, पर हमें सुख प्रदान करो. (७) उत ग्ना व्यन्तु देवपत्नीरिन्द्राण्य१ग्नाय्यश्विनी राट्. आ रोदसी वरुणाणी शृणोतु व्यन्तु देवीर्य ऋतुर्जनीनाम्.. (८) देवपत्नियां हमारे हव्य को खाएं. इंद्राणी, अग्नायी, दीप्तियुक्त अश्विनी, रोदसी एवं वरुणाणी देवी हमारा हव्य भक्षण करें. देवपत्नियों के मध्य ऋतुओं की देवी हमारा हव्य भक्षण करें. (८) सूक्त-४७ देवता-विश्वेदेव प्रयुञ्जती दिव एति ब्रुवाणा मही माता दुहितुर्बोधयन्ती. आविवासन्ती युवतिर्मनीषा पितृभ्य आ सदने जोहुवाना.. (१) सेवा करती हुई, नित्यतरुणी व स्तुति वाली उषा बुलाने पर स्वर्ग से देवों के साथ यज्ञशाला में आती हैं, मानवों को यज्ञकार्य में लगाती हैं और धरती को इस प्रकार चेतन बनाती हैं, जैसे कोई माता कन्या को बोध देती है. (१) अजिरासस्तदप ईयमाना आतस्थिवांसो अमृतस्य नाभिम्. ebook converter DEMO Watermarks*