ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 854, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंयूयं रयिं मरुतः स्पार्हवीरं यूयमृषिमवथ सामविप्रम्. यूयमर्वन्तं भरताय वाजं यूयं धत्थ राजानं श्रुष्टिमन्तम्.. (१४) हे मरुतो! तुम अभिलषित पुत्र-पौत्रादि सहित धन हमें दो एवं सोमपान की प्रेरणा देने वाले ऋषि की रक्षा करो. तुम देवयज्ञ करने वाले राजा श्यावाश्व को संपत्ति दो एवं सुखी बनाओ. (१४) तद्वो यामि द्रविणं सद्यऊतयो येना स्वर्ण ततनाम नूँरभि. इदं सु मे मरुतो हर्यता वचो यस्य तरेम तरसा शतं हिमाः.. (१५) हे शीघ्र रक्षा करने वाले मरुतो! हम तुमसे धन की याचना करते हैं. उसके द्वारा हम सूर्यकिरणों के समान अपने परिवार का विस्तार कर सकें. हे मरुतो! तुम इस स्तुति को पसंद करो, जिससे हम सौ हेमन्तों को पार कर सकें. (१५) सूक्त—५५ देवता—मरुद्गण प्रयज्यवो मरुतो भ्राजदृष्टयो बृहद्वयो दधिरे रुक्मवक्षसः. ईयन्ते अश्वैः सुयमेभिराशुभिः शुभं यातामनु रथा अवृत्सत.. (१) अतिशय यज्ञपात्र, प्रकाशित आयुधों वाले एवं सीने पर सोने के हार पहनने वाले मरुद्गण अधिक अन्न धारण करते हैं. वे सरलता से वश में होने योग्य एवं तीव्रगति वाले अश्वों द्वारा वहन किए जाते हैं. मरुतों के रथ जल के पीछे चलते हैं. (१) स्वयं दधिध्वे तविषीं यथा विद बृहन्महान्त उर्विया वि राजथ. उतान्तरिक्षं ममिरे व्योजसा शुभं यातामनु रथा अवृत्सत.. (२) हे मरुतो! तुम्हारे ज्ञान की सामर्थ्य असीमित है. तुम स्वयं ही शक्ति धारण करते हो. हे महान् मरुतो! तुम विस्तृतरूप से सुशोभित बनो एवं अपने तेज से आकाश को भर दो. मरुतों के रथ जल के पीछे चलते हैं. (२) साकं जाताः सुभवः साकमुक्षितः श्रिये चिदा प्रतरं वावृधुर्नरः. विरोकिणः सूर्यस्येव रश्मयः शुभं यातामनु रथा अवृत्सत.. (३) एक साथ उत्पन्न होने वाले महान् मरुत् एक साथ ही वर्षा करते हैं. वे शोभा पाने के लिए अतिशय प्रवृद्ध हुए हैं. वे सूर्यकिरणों के समान यागादि कर्मों के उत्तम नेता हैं. पानी की ओर चलने वाले मरुतों के रथ सबसे पीछे रहते हैं. (३) आभूषेण्यं वो मरुतो महित्वनं दिदृक्षेण्यं सूर्यस्येव चक्षणम्. उतो अस्माँ अमृतत्वे दधातन शुभं यातामनु रथा अवृत्सत.. (४) ebook converter DEMO Watermarks*