भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 855, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 855

हे मरुतो! तुम्हारी महत्ता प्रशंसनीय है एवं रूप सूर्य के समान सुंदर है. तुम हमें मरणरहित बनाओ. जल की ओर जाने वाले मरुतों का रथ सबसे पीछे चलता है. (४) उदीरयथा मरुतः समुद्रतो यूयं वृष्टिं वर्षयथा पुरीषिणः. न वो दस्रा उप दस्यन्ति धेनवः शुभं यातामनु रथा अवृत्सत.. (५) हे जलयुक्त मरुतो! तुम अंतरिक्ष से जल को प्रेरित करके वर्षा करो. हे शत्रुनाशक मरुतो! तुम्हारे प्रसन्न करने वाले बादल कभी जलरहित नहीं होते. जल की ओर जाने वाले मरुतों का रथ सबसे पीछे चलता है. (५) यदश्वान्धूर्षु पृषतीरयुग्ध्वं हिरण्ययान्प्रत्यत्काँ अमुग्ध्वम्. विश्वा इत्स्पृधो मरुतो व्यस्यथ शुभं यातामनु रथा अवृत्सत.. (६) हे मरुतो! जब तुम रथों के अग्रभाग में बुंदकियों वाली घोड़ियों को जोड़ते हो, तब सोने के बने कवचों को उतार देते हो. तुम सभी संग्रामों में विजय प्राप्त करते हो. जल की ओर जाने वाले मरुतों का रथ सबसे पीछे चलता है. (६) न पर्वता न नद्यो वरन्त वो यत्राचिध्वं मरुतो गच्छथेदु तत्. उत द्यावापृथिवी याथना परि शुभं यातामनु रथा अवृत्सत.. (७) हे मरुतो! नदियां अथवा पहाड़ तुम्हें रोकने में समर्थ नहीं हैं. तुम जहां जाना चाहते हो, वहां अवश्य पहुंच जाते हो. वर्षा करने के लिए तुम धरती-आकाश में फैल जाते हो. जल की ओर जाने वाले मरुतों का रथ सबसे पीछे चलता है. (७) यत्पूर्व्यं मरुतो यच्च नूतनं यदुद्यते वसवो यच्च शस्यते. विश्वस्य तस्य भवथा नवेदसः शुभं यातामनु रथा अवृत्सत.. (८) हे निवासस्थान देने वाले मरुतो! प्राचीन काल में जो यज्ञ किए गए अथवा वर्तमान काल में किए जा रहे हैं, जो कुछ प्रार्थना या स्तुति की जाती है, तुम उस सबको भली-भांति जानो. जल की ओर जाने वाले मरुतों का रथ सबसे पीछे चलता है. (८) मृळत नो मरुतो मा वधिष्टनास्मभ्यं शर्म बहुलं वि यन्तन. अधि स्तोत्रस्य सख्यस्य गातन शुभं यातामनु रथा अवृत्सत.. (९) हे मरुतो! हमें सुखी बनाओ. हमें कोप से नष्ट मत करो, अपितु हमारे सुख का विस्तार करो. हमारी स्तुति सुनकर तुम हमारे प्रति मित्रता का भाव बनाओ. पानी की ओर चलने वाले मरुतों का रथ सबसे पीछे रहता है. (९) यूयमस्मान्नयत वस्यो अच्छा निरंहतिभ्यो मरुतो गृणानाः. जुषध्वं नो हव्यदातिं यजत्रा वयं स्याम पतयो रयीणाम्.. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*

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