ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 874, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंपुरूरूणा चिद्ध्यस्त्यवो नूनं वां वरुण. मित्र वंसि वां सुमतिम्.. (१) हे मित्र व वरुण! तुम दोनों का रक्षा कार्य निश्चय ही सबसे अधिक विशाल है. हम तुम्हारी सुमति प्राप्त करें. (१) ता वां सम्यग्द्रुह्वाणेषमश्याम धायसे. वयं ते रुद्रा स्याम.. (२) हे द्रोहरहित एवं दुःख से बचाने वाले मित्र व वरुण! हम तुम्हारे स्तोता भोजन हेतु अन्न प्राप्त करें एवं संपन्न बनें. (२) पातं नो रुद्रा पायुभिरुत त्रायेथां सुत्रात्रा. तुर्याम दस्युन्तनूभिः.. (३) हे दुःख से बचाने वाले मित्र व वरुण! तुम अपने रक्षा साधनों द्वारा हमारी रक्षा करो तथा अपनी पालनशक्ति द्वारा हमारा पालन करो. हम अपने पुत्रों की सहायता से शत्रुओं को समाप्त करें. (३) मा कस्याद्भुतक्रतू यक्षं भुजेमा तनूभिः. मा शेषसा मा तनसा.. (४) हे अद्भुत कर्म करने वाले मित्र व वरुण! हम किसी के पवित्र धन का भी उपभोग न करें. तुम्हारी कृपा से हम स्वयं एवं हमारे पुत्र-पौत्र अन्य के धन पर न पलें. (४) सूक्त—७१ देवता—मित्र व वरुण आ नो गन्तं रिशादसा वरुण मित्र बर्हणा. उपेम चारुमध्वरम्.. (१) हे शत्रुनाशक एवं शत्रुप्रेरक मित्र व वरुण! तुम हमारे इस अहिंसक यज्ञ में आओ. (१) विश्वस्य हि प्रचेतसा वरुण मित्र राजथः. ईशाना पिप्यतं धियः.. (२) हे उत्तम ज्ञान संपन्न मित्र व वरुण! तुम सारे जगत् के अधिकारी हो. हे स्वामियो! तुम अपनी कृपा द्वारा हमारे कर्म सफल बनाओ. (२) उप नः सुतमा गतं वरुण मित्र दाशुषः. अस्य सोमस्य पीतये.. (३) हे मित्र व वरुण! हम हव्यदाताओं द्वारा निचोड़े गए सोम को पीने के लिए आओ. (३) सूक्त—७२ देवता—मित्र व वरुण आ मित्रे वरुणे वयं गीर्भिर्जुहुमो अत्रिवत्. नि बर्हिषि सदतं सोमपीतये.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*