भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 877, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 877

सूक्त—७४ देवता—अश्विनीकुमार कूष्ठो देवावश्विनाद्या दिवो मनावसू. तच्छ्रवथो वृषण्वसू अत्रिर्वामा विवासति.. (१) हे स्तुतिरूपी धन के स्वामी एवं कामवर्षी अश्विनीकुमारो! आज तुम धरती पर स्थित होकर उस स्तुति समूह को सुनो, जिसके द्वारा अत्रि तुम्हारी सेवा करते हैं. (१) कुह त्या कुह नु श्रुता दिवि देवा नासत्या. कस्मिन्ना यतथो जने को वां नदीनां सचा.. (२) वे देव अश्विनीकुमार आज कहां हैं? आज वे स्वर्ग में कहां निवास कर रहे हैं? तुम किस यजमान के पास आते हो? कौन तुम्हारी स्तुतियों का सहायक होगा? (२) कं याथः कं ह गच्छथः कमच्छा युञ्जाथे रथम्. कस्य ब्रह्माणि रण्यथो वयं वामुश्मसीष्टये.. (३) हे अश्विनीकुमारो! तुम किस यजमान के प्रति गमन करते हो, किसके पास पहुंचते हो एवं किसके सामने जाने के लिए रथ में घोड़े जोड़ते हो? तुम किसकी स्तुतियों से प्रसन्न होते हो? हम तुम्हें पाने की इच्छा करते हैं. (३) पौरं चिद्ध्युदप्रुतं पौर पौराय जिन्वथः. यदीं गृभीततातये सिंहमिव द्रुहस्पदे.. (४) हे पौर द्वारा स्तुत अश्विनीकुमारो! तुम जल बरसाने वाले बादल को पौर ऋषि के पास भेजो. शूर जिस प्रकार गरजते हुए सिंह को मार गिराता है, उसी प्रकार यज्ञकार्य में व्यस्त पौर के निकट तुम बादल को बरसाओ. (४) प्र च्यवानाज्जुजुरुषो वव्रिमत्कं न मुञ्चथः. युवा यदी कृथः पुनरा काममृण्वे वध्वः.. (५) तुमने जराजीर्ण च्यवन ऋषि के शरीर से त्याज्य बुढ़ापे को इस प्रकार अलग कर दिया था, जिस प्रकार योद्धा अपना कवच उतार देता है. जब तुमने उन्हें दोबारा युवा बनाया तो उन्होंने वधू द्वारा चाहने योग्य रूप पाया. (५) अस्ति हि वामिह स्तोता स्मसि वां सन्दृशि श्रिये. नू श्रुतं म आ गतमवोभिर्वाजिनीवसू.. (६) हे देव अश्विनीकुमारो! हम तुम्हारे स्तोता तुम्हारे सामने रहें. हे अन्नयुक्त देवो! तुम हमारी पुकार सुनकर रक्षासाधनों सहित आओ. (६) ebook converter DEMO Watermarks*