ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 876, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे अश्विनीकुमारो! जिस स्तोत्र द्वारा मैं तुम्हारी स्तुति करता हूं, वह भली प्रकार पूरा हो. हे अलग-अलग उत्पन्न एवं पापरहित देवो! मुझे अधिक मात्रा में अन्न दो. (४) आ यद्वां सूर्या रथं तिष्ठद्रघुष्यदं सदा. परि वामरुषा वयो घृणा वरन्त आतपः.. (५) हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारी पत्नी सूर्या जब तुम्हारे साथ शीघ्र चलने वाले रथ पर बैठती है, तब चमकीली, दीप्त एवं फैलने वाली किरणें तुम्हारे सब ओर बिखरती हैं. (५) युवोरन्त्रिऋकेतति नरा सुम्नेन चेतसा. घर्मं यद्वामरेपसं नासत्यास्ना भुरण्यति.. (६) हे नेता अश्विनीकुमारो! हमारे पिता अत्रि ने आग बुझ जाने के सुख से कृतज्ञमन होकर तुम दोनों की स्तुति की थी. तुम्हारे स्तोत्र द्वारा उन्होंने उस अग्नि को सुखकर समझा, जो असुरों ने उन्हें जलाने को लगाई थी. (६) उग्रो वां ककुहो ययिः शृण्वे यामेषु सन्वनिः. यद्वां दंसोभिरश्विनात्रिर्नर्राववर्तति.. (७) हे नेता अश्विनीकुमारो! तुम्हारा उग्र, ऊंचा, गतिशील एवं सदा घूमने वाला रथ यज्ञों में प्रसिद्ध है. तुम्हारे रक्षा प्रयत्न द्वारा ही हमारे पिता अत्रि जीवित रहे थे. (७) मध्व ऊ षु मधुयुवा रुद्रा सिषक्ति पिप्युषी. यत्समुद्राति पर्षथः पक्वाः पृक्षो भरन्त वाम्.. (८) हे सोमरस मिलाने वाले एवं दयालुचित्त अश्विनीकुमारो! हमारी मधुर रस से भिगोने वाली स्तुति तुम्हारी सेवा करती है. तुम जब अंतरिक्ष के पार चले जाते हो तो हमारे द्वारा प्रदत्त हव्य तुम्हारा भरण करता है. (८) सत्यमिद्वा उ अश्विना युवामाहुर्मयोभुवा. ता यामन्यामहूतमा यामन्ना मृळयत्तमा.. (९) हे अश्विनीकुमारो! प्राचीन लोगों ने जो तुम्हें सुख देने वाला कहा है, वह सत्य है. तुम यज्ञ में बुलाने योग्य एवं सुख देने योग्य बनो. (९) इमा ब्रह्माणि वर्धनाश्विभ्यां सन्तु शन्तमा. या तक्षाम रथाँइवावोचाम बृहन्नमः.. (१०) ये महान् स्तुतियां अश्विनीकुमारों को अतिशय सुख देने वाली हों. बढ़ई जिस प्रकार रथ बनाता है, उसी प्रकार हमने ये महान् स्तुतियां कही हैं. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*