भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 882, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 882

हम अश्विनीकुमारों की रक्षा एवं शोभन आगमन को प्राप्त करें. हे मरणरहितो! तुम हमें सब संपत्ति, संतान तथा सभी प्रकार का सौभाग्य दो. (५) सूक्त—७८ देवता—अश्विनीकुमार अश्विनावेह गच्छतं नासत्य मा वि वेनतम्. हंसाविव पततमा सुताँ उप.. (१) हे अश्विनीकुमारो! इस यज्ञ में आओ. हे नासत्यो! तुम हमारे प्रति उदासीन मत बनो. हंस जिस प्रकार निर्मल पानी के पास आता है, उसी प्रकार तुम हमारे सोमरस के पास आओ. (१) अश्विना हरिणाविव गौराविवानु यवसम्. हंसाविव पततमा सुताँ उप.. (२) हे अश्विनीकुमारो! जिस प्रकार हिरण एवं गौरमृग घास तथा हंस साफ पानी के पास आते हैं, उसी प्रकार तुम हमारे सोमरस के पास आओ. (२) अश्विना वाजिनीवसू जुषेथां यज्ञमिष्टये. हंसाविव पततमा सुताँ उप.. (३) हे अन्नप्राप्ति के लिए घर देने वाले अश्विनीकुमारो! हमारी इच्छा पूरी करने के लिए इस यज्ञ में आओ. हंस जैसे साफ पानी के पास जाते हैं, वैसे ही तुम हमारे सोमरस के पास आओ. (३) अत्रिर्यद्वामवरोहन्नृबीसमजोहवीन्नाधमानेव योषा. श्येनस्य चिज्जवसा नूतनेनागच्छतमश्विना शन्तमेन.. (४) हे अश्विनीकुमारो! हमारे पिता अत्रि ने तुम्हारी स्तुति की. यदि स्त्री की मनुहार की जाए तो वह पति की इच्छा पूर्ण करती है, उसी प्रकार अत्रि ऋषि ने अग्निदाह से छुटकारा पाया. हे अश्विनीकुमारो! तुम अपने सुखदायक रथ द्वारा बाज पक्षी की अद्वितीय चाल द्वारा हमारी रक्षा करने आओ. (४) वि जिहीष्व वनस्पते योनिः सूष्यन्त्वा इव. श्रुतं मे अश्विना हवं सप्तवध्रिं च मुञ्चतम्.. (५) हे लकड़ी के बने संदूक! तुम बच्चा जन्मती नारी की योनि के समान खुल जाओ. हे अश्विनीकुमारो! तुम मुझ सप्तवध्रि ऋषि की पुकार सुनकर इस संदूक से मुझे छुड़ाओ. (५) भीताय नाधमानाय ऋषये सप्तवध्रये. मायाभिरश्विना युवं वृक्षं सं च वि चाचथः.. (६) ebook converter DEMO Watermarks*