भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 884, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 884

हे स्वर्ग की पुत्री एवं धन लाने वाली उषादेवी! तुम हमारा अंधकार समाप्त करो. हे शक्तिशालिनी, शोभन जन्म वाली एवं अश्वप्रद स्तुतिवाली उषा! तुमने व्ययपुत्र सत्यश्रवा का अंधकार मिटाया था. (३) अभि ये त्वा विभावरि स्तोमैर्गृणन्ति वह्नयः. मघैर्मघोनि सुश्रियो दामन्वन्तः सुरातयः सुजाते अश्वसूनृते.. (४) हे प्रकाशवाली एवं धनस्वामिनी उषा! जो ऋत्विज् स्तुतियों द्वारा तुम्हारी प्रार्थना करते हैं, वे संपत्तिशाली एवं ऐश्वर्यसंपन्न होते हैं. हे शोभन-जन्म वाली एवं अश्वप्रद स्तुति वाली उषा! लोग दानशील बनने को तुम्हें याद करते हैं. (४) यच्चिद्धि ते गणा इमे छदयन्ति मघत्तये. परि चिद्द्वष्टयो दधुर्ददतो राधो अह्रयं सुजाते अश्वसूनृते.. (५) हे उषा! तुम्हारे जो भक्त धनप्राप्ति के लिए तुम्हारी प्रार्थना कर रहे हैं, वे सब क्षयरहित हव्य देने के लिए हमारे अनुकूल बने हैं. हे शोभन जन्म वाली उषा! लोग अश्व पाने के लिए तुम्हारी स्तुति करते हैं. (५) ऐषु धा वीरवद्यश उषो मघोनि सूरिषु. ये नो राधांस्यह्रया मघवानो अरासत सुजाते अश्वसूनृते.. (६) हे धनस्वामिनी उषा! इन यजमान स्तोताओं को वीर संतान के साथ अन्न दो. वे धनस्वामी बनकर अक्षय धन देंगे. हे शोभन जन्म वाली उषा! लोग अश्व पाने के लिए तुम्हारी स्तुति करते हैं. (६) तेभ्यो द्युम्नं बृहद्यश उषो मघोन्या वह. ये नो राधांस्यश्व्या गव्या भजन्त सूरयः सुजाते अश्वसूनृते.. (७) हे धनस्वामिनी उषा! उस यजमान के लिए उत्तम धन एवं पर्याप्त अन्न दो जो हमें घोड़ों और गायों के साथ धन देता है. हे शोभन जन्म वाली उषा! लोग घोड़ा पाने के लिए तुम्हारी स्तुति करते हैं. (७) उत नो गोमतीरिष आ वहा दुहितर्दिवः. साकं सूर्यस्य रश्मिभिः शुक्रैः शोचद्भिरर्चिभिः सुजाते अश्वसूनृते.. (८) हे स्वर्गपुत्री उषा! तुम हमारे लिए सूर्य किरणों एवं अग्नि की उज्ज्वल लपटों के साथ गाएं और धन दो. हे शोभन-जन्म वाली उषा! लोग अश्व पाने के लिए तुम्हारी स्तुति करते हैं. (८) व्युच्छा दुहितर्दिवो मा चिरं तनुथा अपः.