ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 886, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंएषा शुभ्रा न तन्वो विदानोधर्वेव स्नाती दृशये नो अस्थात्. अप द्वेषो बाधमाना तमांस्युषा दिवो दुहिता ज्योतिषागात्.. (५) उषा स्नान करके उठी हुई एवं अलंकृत नारी के समान हमारे सामने उपस्थित होती है. स्वर्गपुत्री उषा अपने अंधकार रूपी शत्रु को समाप्त करती हुई प्रकाश फैलाती है. (५) एषा प्रतीची दुहिता दिवो नॄन्योषेव भद्रा नि रिणीते अप्सः. व्यूण्वती दाशुषे वार्याणि पुनर्ज्योतिर्युवतिः पूर्वथाकः.. (६) स्वर्ग की पुत्री उषा कल्याण करने वाली नारी के समान हमारे सामने अपना रूप प्रकट करती है. उषा हव्यदाता यजमान को धन देती हुई सदा युवती रहकर प्रकाश बिखेरती है. (६) सूक्त—८१ देवता—सविता युञ्जते मन उत युञ्जते धियो विप्रा विप्रस्य बृहतो विपश्चितः. वि होत्रा दधे वयुनाविदेक इन्मही देवस्य सवितुः परिष्टुतिः.. (१) मेधावी लोग बुद्धिशाली, महान् एवं प्रशंसनीय सविता देव की आज्ञा से यज्ञकार्यों में अपना मन लगाते हैं. सविता होताओं के कार्य को जानते हुए उन्हें अपने-अपने कार्यों में लगाते हैं. सविता देव की स्तुति महती है. (१) विश्वा रूपाणि प्रति मुञ्चते कविः प्रासावीद्भद्रं द्विपदे चतुष्पदे. वि नाकमख्यत्सविता वरेण्योऽनु प्रयाणमुषसो वि राजति.. (२) मेधावी सविता विविधरूप धारण करते हैं एवं पशुओं व मानवों के लिए कल्याण की आज्ञा देते हैं. श्रेष्ठ सविता देव स्वर्ग को प्रकाशित करते हैं एवं उषा के उदित होने के पश्चात् प्रकाश फैलाते हैं. (२) यस्य प्रयाणमन्वन्य इद्ययुर्देवा देवस्य महिमानमोजसा. यः पार्थिवानि विममे स एतशो रजांसि देवः सविता महित्वना.. (३) अन्य देव जिन सविता देव के पीछे चलकर महत्त्व एवं शक्ति प्राप्त करते हैं एवं जो पृथ्वी आदि लोकों को अपनी महिमा से सीमित करके सुशोभित होते हैं, वे सविता देव शोभित होकर विराजमान हों. (३) उत यासि सवितस्त्रीणि रोचनोत सूर्यस्य रश्मिभिः समुच्यसि. उत रात्रीमुभयतः परीयस उत मित्रो भवसि देव धर्मभिः.. (४) हे सविता! तुम तीनों प्रकाशयुक्त लोकों में जाकर सूर्य की किरणों से मिलते हो एवं रात के दोनों ओर चलते हो. तुम जगत् को धारण करने वाले कर्मों द्वारा मित्र बन जाते हो. (४) ebook converter DEMO Watermarks*