ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 887, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंउतेशिषे प्रसवस्य त्वमेक इदुत पूषा भवसि देव यामभिः. उतेदं विश्वं भुवनं वि रजासि श्यावाश्वस्ते सवितः स्तोममानशे.. (५) हे सविता! तुम अकेले ही सब कर्मों की अनुज्ञा देते हो एवं अपनी किरणों द्वारा तुम ही पूषा बनते हो. तुम इस समस्त विश्व को धारण करके सुशोभित हो. श्यावाश्व ऋषि तुम्हारी स्तुति करता है. (५) सूक्त—८२ देवता—सविता तत्सवितुर्वृणीमहे वयं देवस्य भोजनम्. श्रेष्ठं सर्वधातमं तुरं भगस्य धीमहि.. (१) हम सविता देव के उस प्रसिद्ध एवं भोगयोग्य धन की प्रार्थना करते हैं. हम भग नामक देव से श्रेष्ठ, सबको धारण करने वाला एवं शत्रुनाशक धन प्राप्त करें. (१) अस्य हि स्वयशस्तरं सवितुः कच्चन प्रियम्. न मिनन्ति स्वराज्यम्.. (२) सविता देव के स्वयंसिद्ध, परम प्रसिद्ध एवं सर्वप्रिय ऐश्वर्य को कोई नष्ट नहीं कर सकता. (२) स हि रत्नानि दाशुषे सुवाति सविता भगः. तं भागं चित्रमीमहे.. (३) सविता एवं भग नामक देव हव्यदाता यजमान को धन प्रदान करते हैं. हम उनसे विचित्र धन की कामना करते हैं. (३) अद्या नो देव सवितः प्रजावत्सावीः सौभगम्. परा दुःष्वप्न्यं सुव.. (४) हे सविता देव! आज हमें पुत्र, पौत्र व धन प्रदान करो एवं दुःख बढ़ाने वाली दरिद्रता को नष्ट करो. (४) विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परा सुव. यद्भद्रं तन्न आ सुव.. (५) हे सविता देव! हमारे अमंगल को दूर भगाओ एवं सभी कल्याणों को हमारे समीप लाओ. (५) अनागसो अदितये देवस्य सवितुः सवे.