ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 90, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंधनसमूह, यश व रत्न हेतु स्तुति १-३ नियुक्त, सुखकर स्तुतियां, रक्षार्थ प्रार्थना ४-६ २६. इंद्र का वर्णन १-५ मंत्रसमूह, आह्वान, नगरियों का नाश, रक्षासाधन, रक्षार्थ स्तुति १-५ २७. इंद्र की स्तुति १-५ आह्वान, आहूत, स्वामी, धन व रक्षा याचना १-५ २८. इंद्र की स्तुति १-५ आह्वान, असहनीय, यज्ञहीनों की हिंसा, दुष्टों का धन मांगना, रक्षा के लिए स्तुति १-५ २९. इंद्र की स्तुति १-५ धन मांगना आह्वान, स्तुति, आह्वान, रक्षा हेतु स्तुति १-५ ३०. इंद्र की स्तुति १-५ शक्तिशाली, आह्वान, यज्ञ में स्थित होना, शूर, रक्षा हेतु स्तुति १-५ ३१. इंद्र की स्तुति १-१२ हरि नामक अश्व, शतक्रतु, सत्यधन १-३ स्तुति, निंदकों के वश में न होने व शत्रुनाश हेतु प्रार्थना, महान्, स्तुति मिलने हेतु प्रार्थना, प्रणाम, हव्य निर्माण, शत्रुओं की हार के लिए स्तुतियां ४-१२ ३२. इंद्र की स्तुति १-२७ आह्वान, समर्पण, अनुगमन, आह्वान, धन मांगना, १-६ घर हेतु प्रार्थना, हव्य पूरा करना, बुरे आदमी का साथ न देना, गोशाला में जाना, रक्षक बनने की प्रार्थना, संरक्षित यजमान ७-१२ आकर्षित करना, स्वर्ग व भविष्य में अन्न मिलना, पाप से पार होने के लिए प्रार्थना, उत्तम धन के राजा, रक्षा निमित्त धन देने व धनस्वामी बनाने का अनुरोध, धनी १३-१९ ebook converter DEMO Watermarks*