ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
धनसमूह, यश व रत्न हेतु स्तुति १-३ नियुक्त, सुखकर स्तुतियां, रक्षार्थ प्रार्थना ४-६ २६. इंद्र का वर्णन १-५ मंत्रसमूह, आह्वान, नगरियों का नाश, रक्षासाधन, रक्षार्थ स्तुति १-५ २७. इंद्र की स्तुति १-५ आह्वान, आहूत, स्वामी, धन व रक्षा याचना १-५ २८. इंद्र की स्तुति १-५ आह्वान, असहनीय, यज्ञहीनों की हिंसा, दुष्टों का धन मांगना, रक्षा के लिए स्तुति १-५ २९. इंद्र की स्तुति १-५ धन मांगना आह्वान, स्तुति, आह्वान, रक्षा हेतु स्तुति १-५ ३०. इंद्र की स्तुति १-५ शक्तिशाली, आह्वान, यज्ञ में स्थित होना, शूर, रक्षा हेतु स्तुति १-५ ३१. इंद्र की स्तुति १-१२ हरि नामक अश्व, शतक्रतु, सत्यधन १-३ स्तुति, निंदकों के वश में न होने व शत्रुनाश हेतु प्रार्थना, महान्, स्तुति मिलने हेतु प्रार्थना, प्रणाम, हव्य निर्माण, शत्रुओं की हार के लिए स्तुतियां ४-१२ ३२. इंद्र की स्तुति १-२७ आह्वान, समर्पण, अनुगमन, आह्वान, धन मांगना, १-६ घर हेतु प्रार्थना, हव्य पूरा करना, बुरे आदमी का साथ न देना, गोशाला में जाना, रक्षक बनने की प्रार्थना, संरक्षित यजमान ७-१२ आकर्षित करना, स्वर्ग व भविष्य में अन्न मिलना, पाप से पार होने के लिए प्रार्थना, उत्तम धन के राजा, रक्षा निमित्त धन देने व धनस्वामी बनाने का अनुरोध, धनी १३-१९ ebook converter DEMO Watermarks*
नेमि, धन का हिंसक के पास न जाना, सोम भरना, आह्वान, धन याचना, सफलता हेतु प्रार्थना २०-२७ ३३. वसिष्ठ एवं उनके पुत्रों का वर्णन १-१४ चोटी, वसिष्ठपुत्रों को स्वीकारना, सुदास, पितर, तृत्सु को राज्य देना १-५ वसिष्ठ, वरण, महिमा, घूमना, त्याग, धारण करना ६-११ वसिष्ठ, अगस्त्य, सोम धारण १२-१४ ३४. विभिन्न देवों की स्तुति १-२५ अभिलाषापूरक, स्तुति, उत्पत्ति जानना, स्तुति, सोने के हाथ, यज्ञमार्ग पर चलने का आग्रह १-५ यज्ञ धारण करने का आग्रह, उदय, यज्ञकर्म करना, उज्ज्वल कर्म करने का अनुरोध, वरुण, राष्ट्रों के राजा, रक्षार्थ स्तुति, पाप दूर करने व रक्षा हेतु याचना, मित्र बनाने का आग्रह ६-१५ स्तुति, हिंसक को न सौंपने की प्रार्थना, शत्रु के मरने की कामना, धरती, त्वष्टा से धन याचना, रक्षा हेतु प्रार्थना १६-२५ ३५. गो, अश्व, ओषधि, पर्वत, नदी, वृक्ष आदि का वर्णन १-१५ शांति हेतु प्रार्थना, नराशंस, स्तुति सुनने का अनुरोध, रक्षा एवं पुत्र हेतु देवों से प्रार्थना १-१५ ३६. विभिन्न देवों की स्तुति व नदियों का वर्णन १-९ वर्षा का जल, निर्णायक, मेघ, आह्वान, मित्रता चाहना, सिंधु, यज्ञ व पुत्र की रक्षा हेतु स्तुति, कर्मों के रक्षक, रक्षार्थ स्तुति १-९ ३७. विभिन्न देवों का वर्णन १-८ मिश्रित सोम, धन व रत्न हेतु प्रार्थना, धन से पूर्ण हाथ, यज्ञ साधक, धनदाता १-५ आश्रयार्थ स्तुति, बलदाता, धन व रक्षा की याचना ६-८ ३८. सविता का वर्णन १-८ रमणीय, धनदाता, रक्षा याचना १-३ ebook converter DEMO Watermarks*
स्तुति, स्वर्ग व धरती के मित्र, धन रत्न मांगना, रोग निवारणार्थ स्तुति, वाजी देवताओं से रक्षा हेतु स्तुति ४-८ ३९. विभिन्न देवों का वर्णन १-७ उषा, घोड़ियों के स्वामी, रमण, यज्ञ का अनुरोध, आह्वान, धन, अन्न व रक्षा हेतु याचना १-७ ४०. विभिन्न देवों की स्तुति १-७ सुख व धन हेतु स्तुति, बलवान बनाने हेतु प्रार्थना, पापनाशार्थ स्तुति, महत्त्वदाता, जल व अन्न देने का आग्रह, रक्षा हेतु प्रार्थना १-७ ४१. अग्नि, इंद्र, व अश्विनीकुमारों आदि का वर्णन १-७ आह्वान, धन याचना, गाय, घोड़े, धन व पुत्र मांगना, स्तुति, धनी होने की कामना, आह्वान, भग को लाने की याचना, रक्षा हेतु स्तुति १-७ ४२. विभिन्न देवों की स्तुति १-६ नदियां, काले व लाल घोड़े, पूजा, धन देना, यज्ञ स्वीकार करने के लिए की स्तुति, धन याचना व रक्षार्थ स्तुति १-६ ४३. विभिन्न देवों की स्तुति १-५ अर्चना, शत्रु की सहायता न करने की प्रार्थना, धन लाने और प्रसन्न होकर आने की प्रार्थना, धन मांगना १-५ ४४. दधिक्रा देव का वर्णन १-५ रक्षार्थ आह्वान, प्रेरित करना, पीले घोड़े, प्रमुख दधिक्रा, अनुगमनकर्त्ता १-५ ४५. सविता का वर्णन १-४ आह्वान, भुजाएं, धन याचना १-४ ४६. रुद्र की स्तुति १-४ आयुध स्वामी, रोगहीन करने व रक्षा के लिए आह्वान, पुत्र-पौत्रों की हत्या न करने व रक्षार्थ निवेदन १-४ ४७. जल की स्तुति १-४ ebook converter DEMO Watermarks*
स्तुति, सोमरस की रक्षा हेतु प्रार्थना, हवन, धन मांगना व रक्षा हेतु प्रार्थना १-४ ४८. ऋभुओं की स्तुति १-४ हितकारी रथ, वाज से रक्षार्थ प्रार्थना, शत्रुनाशक, धन व रक्षा हेतु प्रार्थना १-४ ४९. जल का वर्णन १-४ जल देवता से रक्षा याचना १-४ ५०. मित्र, अग्नि व वरुण की स्तुति तथा वृक्षों का वर्णन १-४ सांप, दीप्तिशाली, शिपद रोग निवारण के लिए स्तुति १-४ ५१. आदित्य का वर्णन १-३ घर देने व रक्षार्थ प्रार्थना १-३ ५२. आदित्य का वर्णन १-३ स्तुति, पुत्र-पौत्रों की रक्षा हेतु प्रार्थना, धन हेतु स्तुति १-३ ५३. द्यावा-पृथ्वी का वर्णन १-३ जननी, धन हेतु आह्वान, रक्षा व धन हेतु याचना १-३ ५४. वास्तोष्पति (गृहदेवता) का वर्णन १-३ धन, रोगरहित घर देने व रक्षार्थ प्रार्थना १-३ ५५. वास्तोष्पति व इंद्र की स्तुति १-८ रोगनाशक, श्वेत, पीले कुत्ते, चोर, लुटेरे, सूअर विदीर्ण करना, लोगों का सोना, शांत व निश्चल घर १-६ सूर्य का उदय होना, सुलाने की कामना ७-८ ५६. मरुद्गण की स्तुति १-२५ महादेव के पुत्र, जन्म, स्पर्धा करना १-३ सर्वांग श्वेत, प्रजा का पुत्रवान होना, अलंकृत ४-६ मरुतों की स्तुति ७-९ ebook converter DEMO Watermarks*
तृप्त, सजाना, शुद्ध करना १०-१२ गहने, यज्ञभाग सेवन हेतु स्तुति, धन याचना, उत्सव दर्शक, आह्वान, प्रशंसा १३-१८ रक्षक, पुत्र-पौत्र मांगना, धन का भागी बनाने हेतु निवेदन, शत्रु रक्षार्थ प्रार्थना, अन्न पाना, पुत्र के शक्तिशाली होने व रक्षा के लिए प्रार्थना १९-२५ ५७. मरुतों की स्तुति १-७ उग्र, कामनापूरक, आभूषण धारण, कृपा, अन्न द्वारा पुष्ट होने एवं रक्षा हेतु स्तुति १-७ ५८. मरुतों की स्तुति १-६ सर्वाधिक बुद्धिमान्, जन्म, अन्न व धनवृद्धि व रक्षा हेतु स्तुति १-६ ५९. मरुतों की स्तुति १-१२ भय से बचाने का अनुरोध, रोकना, सोमपान व दूसरी जगह न जाने के लिए प्रार्थना १-५ पुकारना, आह्वान, दुःखदाता का वध करने व हवि सेवन के लिए प्रार्थना, आह्वान, मृत्युबंधन से छुड़ाने हेतु प्रार्थना ६-१२ ६०. सूर्य, मित्र, वरुण, आदित्य आदि की स्तुति १-१२ सूर्य की स्तुति, पाप और पुण्य देखना, सूर्यरथ, पुरोडाश, पापनाशक, वरुण और अर्यमा, आदित्य, मित्र व वरुण १-६ धरातल होना, रुष्ट करने वाले कर्म न करने व स्थान देने के लिए आग्रह, सुखी बनाने हेतु स्तुति, निवासस्थान बनाना, दुःखनाश हेतु स्तुति ७-१२ ६१. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-७ उदय होना, स्तुति, परिक्रमा, बुद्धि बढ़ाने की याचना, सच्ची स्तुतियां, आह्वान, स्तुति १-७ ६२. मित्र व वरुण की स्तुति १-६ सूर्य से प्रार्थना, निरपराध बताने के लिए स्तुति, धन देने व अभिलाषा पूरी करने हेतु प्रार्थना, रक्षार्थ प्रार्थना, भूमि को सींचने, रक्षा व धन हेतु स्तुति १-६
६३. सूर्य व वरुण का वर्णन १-६ अंधकार का नाश, सूर्य को खींचना, उदित होना, कर्म करना, मार्ग, रक्षा व धन हेतु अनुरोध १-६ ६४. मित्र व वरुण की स्तुति १-५ जलस्वामी, अन्न, वृष्टि, संतान व निवास हेतु स्तुति, रक्षार्थ याचना १-५ ६५. मित्र व वरुण की स्तुति १-५ आह्वान, शक्तिशाली, दुःखों से पार पाने हेतु याचना, जल व अन्न मांगना, स्तुति १-५ ६६. आदित्य, वरुण, मित्र, अर्यमा आदि का वर्णन १-१९ स्तोत्र, धारण करना, रक्षक, धन याचना, पापनाशार्थ प्रार्थना, स्वामी, स्तुति, शक्ति, स्तुति, अन्न व जल याचना, शत्रुजेता, निवासदाता १-१० ऋचाओं की रचना, धन याचना, धन के अधिकारी, मंडल, हरा घोड़ा, गतिशील, कामना, आह्वान ११-१९ ६७. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१० रथ सामने लाने हेतु स्तुति, उदय, रथ से आने, व धन देने हेतु स्तुति, कर्म से धन देने की प्रार्थना १-५ मनचाहा धन हेतु प्रार्थना, आह्वान, नदियां, गो व अश्वदाता, रत्न, उन्नति व रक्षा हेतु स्तुति ६-१० ६८. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-९ हव्यभक्षण हेतु आह्वान १-४ धन याचना, च्यवन ऋषि, भुज्यु, वृक ऋषि, बूढ़ी गाय, स्तुति ५-८ स्तोता को बढ़ाना ९ ६९. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-८ रथ, स्तुति, पात्र, पीड़ा देना, रक्षक, आह्वान, बुलाना भुज्यु, रत्न एवं रक्षा हेतु आह्वान १-८ ७०. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-७ ebook converter DEMO Watermarks*
आह्वान, वर्षा, पर्वत की चोटी, रत्न याचना, स्तुति, रक्षा हेतु प्रार्थना १-७ ७१. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६ धन व रक्षा हेतु स्तुति, आह्वान, रथ, च्यवन, स्तुति १-६ ७२. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-५ आह्वान, मित्रता, जगाना, तेज धारण, आह्वान १-५ ७३. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-५ आह्वान, स्तुति स्वीकारने की याचना, रक्षा हेतु आह्वान १-५ ७४. उषा का वर्णन १-६ रक्षा, सोमपान व जलदोहन हेतु आह्वान १-४ यश एवं घर मांगना ५-६ ७५. उषा की स्तुति १-८ प्रकाश फैलाना, सौभाग्य मांगना, दर्शनीय, पहचानना, धनयुक्त, रत्न देने वाली, गायों द्वारा कामना, अश्वों से युक्त धन की याचना १-८ ७६. उषा की स्तुति १-७ देवों का नेत्र, आगमन, तेज, प्रमुदित होना, तेजों से मिलना अन्नदात्री १-७ ७७. उषा का वर्णन १-६ प्रकाश फैलाना, सुडौल, तेजस्वी धन एवं रक्षा हेतु स्तुति १-६ ७८. उषा का वर्णन १-५ किरणें फैलाना, पाप नष्ट करना, जन्मदात्री, प्रभात करने वाली, स्नेहयुक्त करने हेतु प्रार्थना १-५ ७९. उषा का वर्णन १-५ जमाना, अंधकारनाशक, धन धारण, वृषभ स्तोत्र, धन याचना १-५ ८०. उषा का वर्णन १-३ ebook converter DEMO Watermarks*
जगाना, आगे चलना, रक्षार्थ स्तुति १-३ ८१. उषा की स्तुति १-६ शोभननेत्री, अन्न याचना, सुख वहन, प्रिय होने, धन, यश व निवास हेतु निवेदन १-६ ८२. इंद्र व वरुण की स्तुति १-१० गृह याचना, बल देना, आह्वान, प्राणियों का निर्माण, बाधक बल १-६ पाप व संताप मिलना, मैत्री, आह्वान, धन व घर के लिए स्तुति ७-१० ८३. इंद्र व वरुण की स्तुति १-१० यजमान, लड़ना, फसलों का नाश, भेद का वध रक्षा के लिए स्तुति, तृत्सुओं की रक्षा, युद्ध में न टिक पाना, सुदास १-८ सुख, धन और घर हेतु स्तुति ९-१० ८४. इंद्र व वरुण की स्तुति १-५ घी का चमचा (जुहू), निवास स्थान व धन याचना, पुत्र-पौत्र की रक्षा हेतु स्तुति १-५ ८५. इंद्र व वरुण की स्तुति १-५ युद्ध में रक्षा व शत्रुनाश हेतु प्रार्थना, आह्वान, प्रजा पालन व आह्वान, रक्षार्थ स्तुति १-५ ८६. वरुण की स्तुति १-८ धरती विशाल बनाना, देखने की इच्छा, पाप पूछना, अजेय पाप मुक्ति हेतु प्रार्थना स्वप्न, ज्ञान संपन्न करने व रक्षार्थ प्रार्थना १-८ ८७. वरुण का वर्णन १-७ जल देना, जगत् की आत्मा, सहायक, इक्कीस नाम १-४ सूर्य को झूला जैसा बनाना, जलनिर्माता व सागर स्थिर करने वाले, अपराधी पर भी अनुग्रह ५-७ ८८. वरुण का वर्णन १-७ धनस्वामी, निचोड़ा गया सोमरस, नाव चलाना १-३ ebook converter DEMO Watermarks*
नाव पर चढ़ाना, विशाल घर, घर व रक्षा की याचना ४-७ ८९. वरुण की स्तुति १-५ मिट्टी का घर, सुख व दया हेतु, प्रार्थना १-४ देवों के प्रति द्रोह ५ ९०. वायु एवं इंद्र की स्तुति १-७ आह्वान, धनपात्र, वायु धन के लिए उत्पन्न, गोधन मिलना १-४ धन, सुख आदि के लिए प्रार्थना ५-७ ९१. वायु एवं इंद्र की स्तुति १-७ संगत करना, धन याचना, सेवा, करना १-३ सोमपान करने, पापमुक्ति व रक्षा हेतु आह्वान ४-७ ९२. वायु एवं इंद्र की स्तुति १-५ सोमपान हेतु आह्वान १-२ ऐश्वर्य हेतु प्रार्थना, शत्रुनाशक, कल्याण हेतु प्रार्थना ३-५ ९३. इंद्र व अग्नि की स्तुति १-८ अन्न हेतु स्तुति १-२ पुकारना, धन हेतु स्तुति, शत्रुनाशार्थ प्रार्थना, अन्न याचना, रक्षार्थ स्तुति ३-८ ९४. इंद्र व अग्नि की स्तुति १-१२ स्तुति, यज्ञ पूरा करने शत्रुनाश के लिए स्तुति, रक्षार्थ आह्वान १-६ सुख, अन्न, धन के लिए स्तुति, जनसेवा के लिए आह्वान, सेवा, अपहर्त्ता की संपत्ति के नाश हेतु प्रार्थना ७-१२ ९५. सरस्वती नदी का वर्णन १-६ बढ़ना, सागर तक जाने वाली, यज्ञयोग्य स्त्री, धनसंपन्न १-४ अन्न, धन व पालन हेतु स्तुति ५-६ ebook converter DEMO Watermarks*
९६. सरस्वती नदी व सरस्वान् देव का वर्णन १-६ स्तुति, अन्न हेतु स्तुति, कल्याण याचना, पत्नी व पुत्र की कामना से स्तुति, रक्षार्थ हेतु, सरस्वान् की स्तुति १-६ ९७. इंद्र, मित्र, बृहस्पति आदि की स्तुति १-१० आह्वान, धन याचना, हव्य, वरेण्य, अन्न मांगना १-५ प्रकाशयुक्त घोड़े, अन्न देना, जलों की रचना, यज्ञरक्षा, शत्रुसेना के संहार व पालन हेतु प्रार्थना ६-१० ९८. इंद्र व बृहस्पति का वर्णन १-७ गौरमृग, सोमपान के लिए आह्वान, जन्मते ही सोमपान, युद्ध जीतने व विजय पाने की प्रार्थना, सोमरस केवल इंद्र के लिए, हितकारक, धनदाता व पालक बृहस्पति की स्तुति १-७ ९९. इंद्र एवं विष्णु की स्तुति १-७ वामन अवतार, महिमाशाली, द्यावा-पृथिवी को धारण करना, इंद्र द्वारा उत्पन्न, शंबर की नगरियों का नाश १-५ अन्नवृद्धि व पालन हेतु स्तुति ६-७ १००. विष्णु की स्तुति १-७ धन प्राप्ति, धन याचना, तीन चरण रखना, स्तुति, तेजस्वी रूप न छिपाने हेतु प्रार्थना, पालन हेतु प्रार्थना १-७ १०१. बादलों का वर्णन १-६ अग्नि की उत्पत्ति, घर व सुख याचना, शरीर बदलना, जल बरसाना, फलवती ओषधियों की कामना, शतायु हेतु प्रार्थना १-६ १०२. बादलों का वर्णन १-३ गर्भधारण करने व अन्न हेतु स्तुति १-३ १०३. मेंढकों का वर्णन १-१० वर्षभर सोना, ‘अख्खल’ शब्द करना १-३ ebook converter DEMO Watermarks*
भूरे व हरे मेंढक, अनुकरण, एक नाम और भिन्न रूप वाले, अतिरात्र यज्ञ, बिलों में छिपे मेंढक, गड्ढों से निकलना आयुवृद्धि हेतु प्रार्थना ४-१० १०४. इंद्र एवं सोम की स्तुति १-२५ राक्षसों के विनाश हेतु स्तुति, आह्वान, राक्षसों के नाशार्थ कामना, आयुध उत्पत्ति हेतु प्रार्थना, साधन १-५ स्तुति भेजना, राक्षसों का संहार करने व उन्हें देने व पुत्रहीन करने आदि हेतु प्रार्थना ६-११ सत्य व असत्य में विरोध, वज्र तेज करना, रक्षार्थ आना, राक्षसों के नाशार्थ व पाप से बचाने हेतु प्रार्थना १२-२५ अष्टम मंडल सूक्त विषय मंत्र सं. १. इंद्र की स्तुति १-३४ अभिलाषा, शत्रुनाशक, रक्षार्थ स्तुति, विपत्तियां पार करना, वज्रधारक, १-६ गान, शत्रुनगरियां तोड़ना, शीघ्रगामी घोड़े, गाय की स्तुति, आक्रमण हेतु जाना ७-११ सुधारना, वज्रधारी, वृत्रहंता, प्रसन्न करना, कामना, जल दुहना १२-१७ स्तुति सुनने हेतु प्रार्थना, सोमरस देने का आग्रह, भयानक, जेतापुत्र देने की प्रार्थना, धनदाता, विशाल उदर १८-२३ सोमपान हेतु प्रार्थना, टोप पहनना, पीछा करना, निवासदाता २४-२९ हारना, घोड़े जोड़ना, आसंग राजा, आगे निकलना, भोगसाधन ३०-३४ २. इंद्र का वर्णन १-४२ निर्भय, घट, स्वादिष्ट बनाना, अन्नयुक्त, स्तुति १-५ सोम बनाने का आग्रह, सोम खोजना, प्रसन्न करना ६-९ दीप्तिशाली, समझना, युद्ध, धनी होना, उक्थ जानना, शत्रु को न देने की ebook converter DEMO Watermarks*
प्रार्थना १०-१५ स्तुति, वज्रधारी, नशीला सोम, आह्वान, असह्य, जानना १६-२१ रक्षासाधन युक्त, वीर, पशु याचना व सोमरस याचना, आह्वान, सेवनीय मित्र, आह्वान, वृद्धि करना २२-२९ शक्ति धारण, वृत्रनाश, अनुकूल बनना, अन्न देना, हव्य वहन, रक्षक ३०-३६ प्रसन्न होना, पालक, देवों का, मेधातिथि ऋषि, गोदान, स्तुति ३७-४२ ३. इंद्र की स्तुति एवं राजा पाकस्थामा का वर्णन १-२४ प्रसन्न रहने व सुखी करने की प्रार्थना, स्वामी, महिमागान, आह्वान १-५ विस्तार करना, स्तुति, ओज बढ़ाना, भृगु, प्रस्कण्व, महिमा, धन याचना, पुरु, रूशम आदि, महिमा, धनस्वामी, पूजन, दर्शनीय ६-१७ स्तुति, अर्बुद व मृग का हनन, प्रकाशन, शोभा पाना, लाल घोड़ा, भुज्यु, स्तुति १८-२४ ४. इंद्र, अश्विनीकुमारों एवं पूषा की स्तुति १-२१ अनुपुत्र, कण्वगोत्रीय ऋषि, आह्वान, शक्ति धारण, धराशायी होना, वीरपुत्र की प्राप्ति, महान कार्य, ढकना १-८ सभा में जाना, धनस्वामी, इंद्र का आना, सोमरस रखना, सुशोभित होना, हरि नामक घोड़े, पापत्राता, धन देना, कामना, वज्र, सामज्ञाता पज्र, दीप्तिशाली, धन प्राप्ति १२-१९ मेधातिथि, प्रसन्न होना २०-२१ ५. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-३९ प्रकाश फैलाना, रथ में जुड़ना, प्रार्थना, स्तुति, घर जाना, हव्यदाता १-६ आह्वान, पशु, अन्न, धन मांगना, सोमपान की प्रार्थना, धनी, स्तुतियों की रक्षा व धनवहन हेतु प्रार्थना ७-१६ बुलाना, स्तुति समूह समीपवर्ती होने, सोमपान करने, अन्न व सरिताओं को लाने की प्रार्थना, भुज्यु, कण्व, धनसम्पन्न, आवत, अत्रि आदि, अंक्ष, अगस्त्य १७-२६ धन याचना, आह्वान, रथ, आह्वान, धन, बल, आदि लाने का आग्रह शीघ्रगामी घोड़े, ebook converter DEMO Watermarks*
पहिया, अन्न मांगना २७-३६ कशु, कशु सा दाता व विद्वान् अन्य नहीं ३७-३९ ६. इंद्र का वर्णन १-४८ बढ़ना, स्तुति, यज्ञभाई, प्रणाम, सिर काटना, मिलाना १-८ अन्न व कृपादृष्टि याचना, बलधारण, बढ़ना, अतुल, भेजना, वज्र चलाना, अतुल शक्ति, जल में वृत्र का हनन ९-१६ विलीन करना, भृगुगोत्रीय ऋषि, दूध-घृत देना, गायों द्वारा गर्भधारण, बढ़ाना, आयोजन, गाय व पुत्र देने की इच्छा करने की प्रार्थना, नहुष, गोशाला, अजेय, स्तुति १७-२७ संगम, सागर, दीप्ति प्राप्ति, शक्तिवर्धन, बुद्धि बढ़ाने की प्रार्थना, विस्तार, योग्य बनना, अजर, आह्वान, अनुगमन, शर्यणा देश २८-३९ शब्द करना, एकमात्र स्वामी, अश्व याचना, उक्थ, स्वीकारना, आह्वान, धन ग्रहण, स्वर्ग मिलना ४०-४८ ७. मरुद्गण की स्तुति १-३६ प्रकाशित होना, कांपना, दान, बिखेरना, मार्ग नियत, आह्वान, आगमन, स्थित रहना, स्तोत्र, सोमरस दुहना, आह्वान, शोभनज्ञान, नशा टपकाना १-१३ मतवाला होना, सुख मांगना, मेघ दुहना, ऊपर जाना, ध्यान, अन्नवृद्धि, कुश उखाड़ना, बल बढ़ाना, संयोग, उत्साह धारण, रक्षा, टोप पहनना १४-२५ कांपना, मरुतों का आना, गमन काल, जाना, स्तुतिप्रिय, आयुधयुक्त, दयालु बनाना, स्थिर रहना, अन्न देना, स्थित होना २६-३६ ८. अश्विनीकुमारों का वर्णन १-२३ दर्शनीय, ज्ञानी, आह्वान, वत्स ऋषि, आह्वान, सूर्या, मधुर बोलना, वहन, संपत्ति, सत्य स्वभाव, वर्धन, धन व सुखार्थ स्तुति १-१६ शत्रुभक्षक, बुलाना, रोगनाशक, कण्व, मेधातिथि, त्रसदस्यु, शत्रुनाशक, आह्वान १७-२३ ९. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-२१
जाना, धन याचना, अनुष्ठान, जानना, पाक धारण, पास आना, स्तोत्र जानना, आना, ले जाना, स्तुति, आह्वान विजयी, रक्षासाधन, हव्यनिर्माण १-१४ धन याचना, देवी, यज्ञ में जाना, सोमलता निचोड़ना, प्रार्थना १५-२१ १०. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६ बुलाना, यज्ञज्ञाता, निकट आने की प्रार्थना १-६ ११. अग्नि की स्तुति १-१० प्रशंसनीय, यज्ञनेता, अलगाने की प्रार्थना, इच्छा न करना, अमर १-५ बुलाना, कामना, मालिक ६-८ विचित्र धन वाले, सौभाग्य याचना ९-१० १२. इंद्र की स्तुति एवं वर्णन १-३३ याचना, रक्षा, भेजना, जानने की प्रार्थना, अभिलाषाएं पूर करना, कल्याण करना, धन मिलना, कल्याण देना १-७ बल बढ़ना, जलाना, स्तुति का समीप जाना, पुनीत करना, सीमा बांधना, प्रमुदित करना, स्तोत्र उत्पत्ति, स्तुति, प्रसन्न होना, कामना ८-१९ बढ़ाना, धनदान, स्वामी बनाना, स्तुति, दीप्त होना, नापना, बांधना, नियमित करना, स्तुति भेजना, धरती की नाभि यज्ञ, पशु याचना २०-३३ १३. इंद्र की स्तुति १-३३ पवित्र करना, बढ़ाना, बुलाना, आहुतियां, धनाभिलाषा, स्तुति, फल देना, प्रशंसा, पालक १-९ घर जाना, सुख मिलना, श्रेष्ठ शक्तिशाली, आह्वान, प्रसन्न होने व धन देने की प्रार्थना, श्रद्धा रखना, बढ़ाना, त्रिकद्रुक, स्तुति १०-१९ स्तुति, सोमपान, याचना, आह्वान, स्तुत, अन्न याचना, दया प्राप्ति आह्वान, हव्य ग्रहणार्थ प्रार्थना २०-२८ उत्तरवेदी, योग्य फल, शतक्रतु, इच्छापूरक, आह्वान २९-३३ १४. इंद्र की स्तुति १-१५ ebook converter DEMO Watermarks*
धनस्वामी, शक्तिशाली, पशुदान, इंद्र का न रुकना, मेघ दुहना, धनजेता, अंतरिक्ष बढ़ाना, मेघ का नाश १-७ बल असुर का नाश, दृढ़ करना, स्तुतियों का जाना, केशधारी घोड़े ८-१२ सिर काटना, औंधा करना, विरोधीनाशक १३-१५ १५. इंद्र की स्तुति १-१३ स्तुत इंद्र, जलधारक, वध, प्रशंसा, यज्ञकर्त्ता १-५ पूर्ववत् स्तुति, बल का बढ़ना, यश बढ़ाना ६-९ जन्म लेना, अवध्य, रक्षार्थ स्तुति, प्रशंसा का आग्रह १०-१३ १६. इंद्र की स्तुति १-१२ प्रशंसनीय, हव्यान्न, सेवा, आह्वान, स्वामी बनाना, शत्रुजेता, बढ़ाना, स्तुत्य, आहूत, धन व मार्ग याचना १-१२ १७. इंद्र की स्तुति १-१५ सोमरस निचोड़ना, बुलाना, शोभन शिरस्त्राण, पूर्ण करना, सोम, विशेषद्रष्टा, शत्रुनाशक, जगत्स्वामी, धनदाता १-११ आह्वान, कुंडपाट्य यज्ञ, सखा, भर्त्ता १२-१५ १८. अदिति का वर्णन एवं आदित्यों की स्तुति १-२२ सुख याचना, पालक, मार्ग, सुख मांगना, बहुतों के प्रिय, राक्षसों को अलगाने का ज्ञान, अदिति, स्तुत्य, सुख याचना, आरोग्य, सुख याचना, शत्रुओं को दूर रखने की प्रार्थना, पापियों के भी त्राता, पापी के नष्ट होने, व शत्रुओं को पाप व्याप्त करने की प्रार्थना १-१४ परिपक्व ज्ञाता, वरण, नाव, दीर्घायु व सुख याचना १५-१९ घर मांगना, आयु बढ़ाने की प्रार्थना २०-२२ १९. अग्नि का वर्णन एवं स्तुति १-३७ हव्य देना, नियंता, शोभनकर्त्ता, स्तुति, सेवा, दीप्त होना, स्वामी, फलदाता, सेवनीय १-९ ebook converter DEMO Watermarks*
ऊर्ध्वगति, देवों के पास जाना, निवासदाता, समृद्ध बनना, यश प्राप्ति, क्रोध दबाना, प्रकाशमान होना, ध्यान १०-१७ कामना, तृप्त, जेता, मनु द्वारा स्थापित, नित्य तरुण, आहूत, बलपुत्र १८-२५ अपवाद, भर्त्ता, सेवा की कामना, बुद्धिरक्षक, मित्रता बढ़ना, द्रवणशील, त्रसदस्यु, समाहित, फल पाना, शत्रुजेता २६-३५ पत्नियों का दान, धन, वस्त्र आदि देना ३६-३७ २०. मरुद्गण की स्तुति १-२६ कंपाना, अभिलषित, बलज्ञाता, द्वीपों का गिरना, शब्द करना १-५ ऊपर जाना, नेता, वीणा, उत्तमगति, सेचन समर्थ आयुध, विजय, एक नाम होना, दान, भक्त बनना, सुख फैलाना, जलकर्त्ता, सेवा, प्रशंसा करना, यशस्वी, समान जाति, ६-२१ मित्रता, सखा, शत्रुशून्य, रोग भगाने की प्रार्थना २२-२६ २१. इंद्र की स्तुति १-१८ रूप धरना, वरण, सेनापति, आह्वान, स्तुति, वज्रधारी, मित्रता जानना, धन, गाएं, घोड़े लाना, वृष्टिकर्त्ता १-११ आहूत, बांधवहीन, धन देना, बैठने का आग्रह, अक्षय धन, सौभरि, धन देना १२-१८ २२. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१८ रथ बुलाना, स्तुति का आग्रह, शत्रुजेता, पहिए चमकाना, खेती, तृप्त करना, सोमरस निचोड़ना १-८ धनवर्षक, इलाज की प्रार्थना, आह्वान, वरेण्य, स्तुति, बुलाना, रक्षक, दर्शनीय, बली ९-१८ २३. अग्नि का वर्णन १-३० बाधाहीन, रथदाता, पूज्य, आश्रय, ज्वालाएं, शोभन स्तुतियां, प्रशंसा, तृप्त, हव्ययुक्त १-९ होता, प्रदर्शन, धन याचना, प्रजापालक, हवि देना, व्यश्व ऋषि, स्थापना, यज्ञयोग्य, दूत, अजर १०-२० ebook converter DEMO Watermarks*
प्राप्ति, साथ जाना, सेवा, स्थूलयूप ऋषि, स्तुति, स्तुत्य, गान, अन्न-धन मांगना, यशस्वी २१-३० २४. इंद्र की स्तुति १-३० वज्रधारी, वृत्रहर, अश्वस्वामी, धन याचना, निर्बाध, धन हेतु प्रार्थना, आह्वान, आहूत, पूजनीय, नचाने वाले १-१२ अन्न, धन देना, व्यश्व ऋषि का पुत्र, स्तुत्य नहीं, अलंघनीय, बुलाना, स्तुत्य, दीप्तिशाली, वीरता के कर्म, पूजनीय १३-२२ दसवां प्राण, ज्ञान, कुत्स, धन याचना, पापत्राता, व्यश्व, परिजन, वरु, गोमती के किनारे वरु का वास २३-३० २५. मित्र, वरुण, अदिति, अश्विनीकुमार आदि का वर्णन १-२४ रक्षक, स्वामी, उत्पत्ति, यज्ञ प्रकाशन, धनदाता, अन्नदाता, सुशोभित, सत्ययुक्त, प्रेरक, वेगवान्, रक्षार्थ प्रार्थना, शोभनदाता १-११ धनदाता, आश्रय, दर्पनाशक, व्रताचरण, प्रकाश फैलाना, मित्र, पूर्ण करना १२-१९ धन स्वामी, स्तुति, राजा वरु, अश्व प्राप्ति २०-२४ २६. अश्विनीकुमार, इंद्र वायु आदि की स्तुति १-२५ आह्वान, सत्यरूप, अन्नयुक्त धनी, समर्थ, अभिलाषापूरक जलपालक १-६ अजेय, बुलाना, पणि, नेता, धन देने, कल्याण करने व सोमपानार्थ आह्वान ७-१५ दूत, श्वेतयावरी नदी, पोषक, निवासस्थान दाता, धन मांगना, शोभन गति वाले, आह्वान, अन्न, धन मांगना १६-२५ २७. विभिन्न देवों की स्तुति १-२२ स्थापना, निकट, तेज प्रसारक, शत्रुनाशक, बैठने की प्रार्थना, बुलाना, स्तुति, बाधा रहित घर मांगना १-९ शत्रुनाशक, स्तुति, काम में लगना, आह्वान, धनदाता, स्तुति, अन्न बढ़ना, रक्षक, गमन सरल बनाने की प्रार्थना १०-१८ घर याचना, धन धारण, धन मांगना १९-२२ २८. विभिन्न देवों की स्तुति १-५ ebook converter DEMO Watermarks*
धन याचना, बुलाना, रक्षार्थ प्रार्थना १-३ अक्षय अभिलाषाएं, सात दीप्तियां ४-५ २९. विभिन्न देवों का वर्णन १-१० गहने, स्थान पाना, कुल्हाड़ी, वज्र, एकाकी, मार्गरक्षक, तीन कदम १-७ सूर्या के साथ रहना, स्थान बनाना, दीप्तिशाली बनाना ८-१० ३०. विभिन्न देवों की स्तुति १-४ सभी देव महान्, स्तुति, राक्षसों से बचाने, सुख, गाय व घोड़ा देने की प्रार्थना १-४ ३१. यज्ञ का वर्णन १-१८ बार-बार बोलना, पाप से बचाना, रथ आना, अन्न पाना, सोमरस में गोदुग्ध, अन्न प्राप्ति, सेवा करना, सेवनीय आयु प्राप्ति, दान करना, सेवनीय १-११ पापरहित दान, रक्षक, धन हेतु स्तुति, देवकामी, जीतना, पुत्र प्राप्ति १२-१८ ३२. इंद्र की स्तुति १-३० वर्णन का आग्रह, सुविंद, अनर्शानि, पिप्रु आदि का वध, महान्, शत्रुनाशक, द्वार खोलना, अन्नदाता, प्रसन्नतादाता, धन की अधिकता, गाय, घोड़ा सोना व अन्न मांगना, रक्षार्थ आह्वान १-१० अन्नदाता, दानशील, शोभनव्रत, धनस्वामी, अनियंत्रित, देवऋण न रहना, स्तोत्र बनाने का आग्रह, स्तुत्य, सोमपान हेतु प्रार्थना, पास आने व धन देने की प्रार्थना, जल धाराएं गिराना, असुरवध ११-२६ शत्रुनाशक, यज्ञकर्म बताना, इंद्र को लाने की प्रार्थना, हरि नामक घोड़े २७-३० ३३. इंद्र की स्तुति १-१९ सेवा, स्तुति, अन्न याचना, रथ, शोभनकर्म, अभिलाषापूरक, शत्रुनगर-नाशक, भ्रमणकर्त्ता, पुकार सुनना, प्रसिद्ध, सोने का हंटर, हरि नामक अश्व, धनी, वृत्रहंता, स्तोम यज्ञ, प्रसन्न न होना, स्त्री पर शासन असंभव १-१७ रथ, स्त्री होना १८-१९ ३४. इंद्र की स्तुति १-१८ ebook converter DEMO Watermarks*
शासक, सोमलता को कंपाना, आह्वान, दीप्त हवि वाले, विश्वरक्षक १-६ धनयुक्त, स्तुत्य, पंख ढोना, स्वाहा बोलना, उक्थ मंत्र, आह्वान, स्वर्ग जाने, गाएं, घोड़े तथा मनचाही वस्तुएं देने की प्रार्थना ७-१५ घोड़े लेना, तेजस्वी घोड़े, पारावत १६-१८ ३५. इंद्र की स्तुति १-२४ सोमपान, अन्न, स्तोत्र स्वीकार करने का आग्रह, सोमपान की प्रार्थना, बल, धन व संतान की याचना, अंगिरा, विष्णु आदि के साथ स्तोत्र सुनने का आग्रह, गायों-अश्वों को जीतने व राक्षसों के नाशार्थ स्तुति १-१८ श्यावाश्व, सोमपान हेतु आग्रह, रक्षार्थ बुलाना, रत्न याचना १९-२४ ३६. इंद्र की स्तुति १-७ रक्षक, सज्जनपालक, जनक, शत्रुजेता, घोड़े व गायों के जनक, अत्रिगोत्रीय ऋषि, श्यावाश्व, त्रसदस्यु १-७ ३७. इंद्र की स्तुति १-७ वृत्रहंता, रक्षार्थ व स्तुति सुनने हेतु प्रार्थना, स्वामी होना, बल देने का कारण, त्रसदस्यु रक्षक १-७ ३८. इंद्र व अग्नि की स्तुति १-१० ऋत्विज्, अजेय, सोमरस तैयार होना, यज्ञनेता, हव्य वहन, स्तुति स्वीकारने व सोमपान की प्रार्थना, शत्रुधन जेता, बुलाना, रक्षा हेतु प्रार्थना १-१० ३९. अग्नि का वर्णन १-१० स्तुति, शत्रुनाशार्थ प्रार्थना, हवन, सुखकारी, प्रसिद्धि, रहस्य जानना, मांधता दूत, चारों ओर जल १-१० ४०. इंद्र व अग्नि की स्तुति १-१२ हराना, यज्ञ करना, युद्ध में रहना, धन धारण १-४ सागर ढकना, शत्रुनाशार्थ प्रार्थना, आह्वान, धनभोग कामना, आह्वान, नदियों को खोलना, प्रेरक, जल जीतना ५-१० शुष्ण की संतान का वध, स्तुतियां बोलना ११-१२ ebook converter DEMO Watermarks*
४१. वरुण का वर्णन १-१० पशुरक्षक, प्रशंसा, नाभाक ऋषि, आलिंगन, संसार, धरती निर्माता, काव्य पोषण, काव्य स्थित होना, शत्रुनाशार्थ प्रार्थना १-७ माया का नाश, वरुण का स्थान, द्यावा-पृथिवी के धारक ८-१० ४२. वरुण व अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६ सम्राट् बनना, अमृतरक्षक, नाव, सोमपान व शत्रुनाशार्थ प्रार्थना १-६ ४३. अग्नि की स्तुति १-३३ बुद्धिमान्, जातवेद, वनभक्षण, अलग जाना, झंडा, काली धूल, शांत न होना, झुकाना १-८ प्रवेश, स्रुच, सेवा, याचना, आह्वान, सखा, हव्यदाता, अश्वस्वामी ९-१६ स्तुतियों का जाना, प्रसन्न करना, स्तुति, आह्वान शत्रुनाशक स्तुति १७-२४ हितकारी, द्वेषियों के संहारक, मनु द्वारा प्रज्वलित, आह्वान अन्न देना, तत्त्वद्रष्टा २५-३० याचना, अंधकारनाशक, धन याचना ३१-३३ ४४. अग्नि की स्तुति १-३० प्रिय, कामना हेतु प्रार्थना, स्थापना, किरणों का उठना, धनयुक्त, स्रुच, स्तुति, सेवित, श्रेष्ठ अग्नि, आह्वान, वस्तुएं मांगना, शक्ति से उत्पन्न, मेधावियों के संग बढ़ना, आह्वान, बैठना, धन मिलना १-१५ कूबड़, प्रेरित करना, धनस्वामी, प्रसन्न करना, कामना, मेधावी, मित्रता जानने का आग्रह, आशीर्वाद सत्य होने हेतु प्रार्थना, अनुग्रह में रहने की प्रार्थना, स्तुतियों का पहुंचना १६-२५ नित्यतरुण, यज्ञनेता, पवित्रकर्त्ता, जागृत रहना, उमर बढ़ाने की प्रार्थना २६-३० ४५. इंद्र का वर्णन व स्तुति १-४२ कुश बिछाना, समिधाएं, झुकाना, बाण उठाना, दृढ़ करना, प्रधान रथी, अन्नदाता बनने, रथ लाने व पास जाने की प्रार्थना १-१० उपद्रवहीन, सुखसाधन देना, रक्षक, वस्तुएं मांगना, धन लाने हेतु प्रार्थना, पशु देखना, ebook converter DEMO Watermarks*