भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 109, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 109

४१. वरुण का वर्णन १-१० पशुरक्षक, प्रशंसा, नाभाक ऋषि, आलिंगन, संसार, धरती निर्माता, काव्य पोषण, काव्य स्थित होना, शत्रुनाशार्थ प्रार्थना १-७ माया का नाश, वरुण का स्थान, द्यावा-पृथिवी के धारक ८-१० ४२. वरुण व अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६ सम्राट् बनना, अमृतरक्षक, नाव, सोमपान व शत्रुनाशार्थ प्रार्थना १-६ ४३. अग्नि की स्तुति १-३३ बुद्धिमान्, जातवेद, वनभक्षण, अलग जाना, झंडा, काली धूल, शांत न होना, झुकाना १-८ प्रवेश, स्रुच, सेवा, याचना, आह्वान, सखा, हव्यदाता, अश्वस्वामी ९-१६ स्तुतियों का जाना, प्रसन्न करना, स्तुति, आह्वान शत्रुनाशक स्तुति १७-२४ हितकारी, द्वेषियों के संहारक, मनु द्वारा प्रज्वलित, आह्वान अन्न देना, तत्त्वद्रष्टा २५-३० याचना, अंधकारनाशक, धन याचना ३१-३३ ४४. अग्नि की स्तुति १-३० प्रिय, कामना हेतु प्रार्थना, स्थापना, किरणों का उठना, धनयुक्त, स्रुच, स्तुति, सेवित, श्रेष्ठ अग्नि, आह्वान, वस्तुएं मांगना, शक्ति से उत्पन्न, मेधावियों के संग बढ़ना, आह्वान, बैठना, धन मिलना १-१५ कूबड़, प्रेरित करना, धनस्वामी, प्रसन्न करना, कामना, मेधावी, मित्रता जानने का आग्रह, आशीर्वाद सत्य होने हेतु प्रार्थना, अनुग्रह में रहने की प्रार्थना, स्तुतियों का पहुंचना १६-२५ नित्यतरुण, यज्ञनेता, पवित्रकर्त्ता, जागृत रहना, उमर बढ़ाने की प्रार्थना २६-३० ४५. इंद्र का वर्णन व स्तुति १-४२ कुश बिछाना, समिधाएं, झुकाना, बाण उठाना, दृढ़ करना, प्रधान रथी, अन्नदाता बनने, रथ लाने व पास जाने की प्रार्थना १-१० उपद्रवहीन, सुखसाधन देना, रक्षक, वस्तुएं मांगना, धन लाने हेतु प्रार्थना, पशु देखना, ebook converter DEMO Watermarks*