ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 943, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहैं। हे यज्ञपात्र इंद्र! युद्ध में तुम्हें सभी देवों ने ऐसा बल दिया है, जिससे तुम शत्रुओं का नाश करने के साथ ही सबको धारण कर सको। (८) एवा न स्पृधः समज समत्स्विन्द्र रारन्धि मिथतीरदेवीः. विद्याम वस्तोरवसा गृणन्तो भरद्वाजा उत त इन्द्र नूनम्.. (९) हे इंद्र! तुम इस प्रकार स्तुतियां सुनकर युद्धों में शत्रु सेनाओं को मारने के लिए हमें प्रेरित करो एवं हिंसा करती हुई असुर सेनाओं को वश में करो. हे इंद्र! हम भरद्वाजवंशीय ऋषि तुम्हारी स्तुति करते हुए अन्न के साथ ही निवास स्थान प्राप्त करें. (९) सूक्त—२६ देवता—इंद्र श्रुधी न इन्द्र ह्वयामसि त्वा महो वाजस्य सातौ वावृषाणाः. सं यद्विशोऽयन्त शूरसाता उग्रं नोऽवः पार्ये अहन्दाः.. (१) हे इंद्र! हम स्तोता तुम्हें सोमरस से सींचते हुए महान् अन्न पाने के लिए बुलाते हैं. तुम हमारी पुकार सुनो. जब लोग युद्ध के लिए जावें, तब हम लोगों की उत्तम रक्षा करना. (१) त्वां वाजी हवते वाजिनेयो महो वाजस्य गध्यस्य सातौ. त्वां वृत्रेष्विन्द्र सत्पतिं तरुत्रं त्वां चष्टे मुष्टिहा गोषु युध्यन्.. (२) हे इंद्र! वाजिनी के पुत्र भरद्वाज सबके द्वारा चाहने योग्य महान् अन्न को पाने के लिए हव्ययुक्त होकर तुम्हें बुलाते हैं. उपद्रव सामने आने पर मैं सज्जनों के पालक एवं दुष्टों के विनाशक इंद्र को बुलाता हूं. मैं गायों के हेतु शत्रुओं से लड़ता हुआ उन्हें मुक्कों से मार डालता हूं. (२) त्वं कविं चोदयोऽर्कसातौ त्वं कुत्साय शुष्णं दाशुषे वर्क्. त्वं शिरो अमर्मणः पराहन्नतिथिग्वाय शंस्यं करिष्यन्.. (३) हे इंद्र! तुम भार्गव ऋषि को अन्न पाने के लिए प्रेरित करो. तुमने हव्यदाता कुत्स के कल्याण के लिए शुष्ण असुर को मारा था. तुमने अतिथिग्व को सुखी करने के लिए स्वयं को अजेय समझने वाले शंबर असुर का सिर काट दिया. (३) त्वं रथं प्र भरो योधमृष्वमावो युध्यन्तं वृषभं दशद्युम्. त्वं तुग्रं वेतसवे सचाहन्त्वं तुजिं गृणन्तामिन्द्र तूतोः.. (४) हे इंद्र! तुमने वृषभ राजा को युद्ध का साधन रथ दिया था. वृषभ जब दस दिन तक चलने वाला युद्ध लड़ रहा था, तब तुमने उसकी रक्षा की थी. तुमने राजा वेतस का सहायक बनकर तुग्र असुर को मारा था एवं स्तुति करने वाले तुजि नामक राजा की उन्नति की थी. (४) ebook converter DEMO Watermarks*