भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 944, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 944

त्वं तदुक्थमिन्द्र बर्हणा कः प्र यच्छता सहसा शूर दर्षि. अव गिरेर्दासं शम्बरं हन्प्रावो दिवोदासं चित्राभिरूती.. (५) हे शत्रुनाशक इंद्र! तुमने प्रशंसनीय कार्य किया है. हे शूर इंद्र! तुमने शंबर असुर के सैकड़ों एवं हजारों योद्धाओं को विदीर्ण किया था. तुमने पर्वत से उत्पन्न एवं यज्ञादि कर्मों के विघातक शंबर असुर को मारा था एवं विचित्र रक्षासाधनों द्वारा दिवोदास का पालन किया था. (५) त्वं श्रद्धाभिर्मन्दसानः सोमैर्दभीतये चुमुरिमिन्द्र सिष्वप्. त्वं रजिं पिठीनसे दशस्यन्षष्टिं सहस्रा शच्या सचाहन्.. (६) हे इंद्र! तुमने श्रद्धापूर्वक किए गए यज्ञों एवं सोमरस से प्रसन्न होकर दभीति राजा के कल्याण के लिए चुमुरि नामक असुर को मारा. तुमने पिठीनस को राज्य देते समय अपनी बुद्धि द्वारा साठ हजार योद्धाओं को एक साथ ही मार डाला. (६) अहं चन तत्सूरिभिरानश्यां तव ज्याय इन्द्र सुम्नमोजः. त्वया यत्स्तवन्ते सधवीर वीरास्त्रिवरूथेन नहुषा शविष्ठ.. (७) हे वीरों से युक्त एवं अतिशय शक्तिशाली इंद्र! स्तोतागण शत्रुविजयी एवं त्रिभुवन-रक्षक के रूप में तुम्हें मानकर तुम्हारे दिए हुए सुख एवं बल की स्तुति करते हैं. हे इंद्र! हम भरद्वाजगोत्रीय ऋषि तुम्हारे द्वारा दिए गए उत्तम बल और सुख को अपने स्तोताओं के साथ प्राप्त करें. (७) वयं ते अस्यामिन्द्र द्युम्नहूतौ सखायः स्याम महिन प्रेष्ठाः. प्रातर्दानिः क्षत्रश्रीरस्तु श्रेष्ठो घने वृत्राणां सनये धनानाम्.. (८) हे पूजनीय इंद्र! हम तुम्हारे स्तोता इस धन निमित्तक स्तोत्र द्वारा तुम्हारे अतिशय प्रिय बनें. प्रतर्दन के पुत्र क्षत्रश्री हमारे राजा हैं. वे शत्रुओं के नाश एवं धनलाभ में सबसे श्रेष्ठ हों. (८) सूक्त—२७ देवता—इंद्र किमस्य मदे किम्वस्य पीताविन्द्रः किमस्य सख्ये चकार. रणा वा ये निषदि किं ते अस्य पुरा विविद्र किमु नूतनासः.. (१) इंद्र ने सोमरस से प्रसन्न होकर, सोमरस को पीकर एवं इससे मित्रता रखकर क्या काम किया? हे इंद्र! प्राचीन एवं नवीन स्तोताओं ने यज्ञशाला में तुमसे क्या पाया? (१) सदस्य मदे सद्वस्य पीताविन्द्रः सदस्य सख्ये चकार. ebook converter DEMO Watermarks*