ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 946, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंद्वयाँ अग्ने रथिनो विंशतिं गा वधूमतो मघवा मह्यं सम्राट्. अभ्यावर्ती चायमानो ददाति दूणाशेयं दक्षिणा पार्थवानाम्.. (८) हे अग्नि! अधिक धन देने वाले एवं राजयज्ञ करने वाले राजा चायमान के पुत्र अभ्यवर्ती ने हम भरद्वाजगोत्रीय ऋषियों के लिए स्त्रियों सहित रथ एवं बीस गाएं दी हैं. पृथुवंश में उत्पन्न राजा अभ्यवर्ती की दक्षिणा किसी के द्वारा नष्ट नहीं की जा सकती. (८) सूक्त—२८ देवता—गो व इंद्र आ गावो अग्मन्नुत भद्रमक्रन्त्सीदन्तु गोष्ठे रणयन्त्वस्मे. प्रजावतीः पुरुरूपा इह स्युरिन्द्राय पूर्वीरुषसो दुहाना.. (१) गाएं हमारे घर आवें और हमारा कल्याण करें. वे हमारी गोशाला में बैठें एवं हमारे ऊपर प्रसन्न हों. इस गोशाला की तरह-तरह के रंगों वाली गाएं बछड़ों वाली होकर इंद्र के निमित्त प्रातःकाल दूध दें. (१) इन्द्रो यज्वने पृणते च शिक्षत्युपेद्ददाति न स्वं मुषायति. भूयोभूयो रयिमिदस्य वर्धयन्नभिन्ने खिल्ये नि दधति देवयुम्.. (२) इंद्र यज्ञ करने वाले एवं स्तुतियों द्वारा प्रसन्न करने वाले को मनचाहा धन देते हैं. वे उन्हें सदा धन देते हैं, कभी छीनते नहीं. वे बराबर ऐसे लोगों का धन बढ़ाते हैं एवं देवों को चाहने वाले को शत्रुओं द्वारा भिन्न न होने वाले स्थान में रखते हैं. (२) न ता नशन्ति न दभाति तस्करो नासामामित्रो व्यथिरा दधर्षति. देवाँश्च याभिर्यजते ददाति च ज्योगित्ताभिः सचते गोपतिः सह.. (३) वे गाएं नष्ट न हों. चोर उन्हें चुरावें नहीं. शत्रुओं का शस्त्र उन पर न गिरे. गायों का स्वामी जिन गायों द्वारा इंद्र के निमित्त यज्ञ करता है एवं जिन्हें इंद्र को दिया जाता है, उन गायों के साथ उनका स्वामी अधिक समय तक रहे. (३) न ता अर्वा रेणुककाटो अश्नुते न संस्कृतत्रमुप यन्ति ता अभि. उरुगायमभयं तस्य ता अनु गावो मर्तस्य वि चरन्ति यज्वनः.. (४) धूल उड़ाने वाले एवं युद्ध के लिए आए हुए घोड़े उन गायों को न पावें. वे गाएं विशसन संस्कार को न प्राप्त करें. यज्ञकर्त्ता मनुष्य की गाएं विस्तृत एवं भयरहित स्थान में घूमें. (४) गावो भगो गाव इन्द्रो मे अच्छान् गावः सोमस्य प्रथमस्य भक्षः. इमा या गावः स जनास इन्द्र इच्छामीद्धृदा मनसा चिदिन्द्रम्.. (५) गाएं हमारा धन हों. इंद्र हमें गाएं दें. गाएं हमें उत्तम सोमरस के रूप में भक्ष्य दें. हे ebook converter DEMO Watermarks*