ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 947, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंमनुष्यो! इसी प्रकार की गाएं इंद्र बन जाती हैं. हम श्रद्धापूर्ण मन से इंद्र को चाहते हैं. (५) यूयं गावो मेदयथा कृशं चिदश्रीरं चित्कृणुथा सुप्रतीकम्. भद्रं गृहं कृणुथ भद्रवाचो बृहद्वो वय उच्यते सभासु.. (६) हे गायो! तुम हमें बलिष्ठ बनाओ. तुम दुबले एवं असुंदर को भी सुंदर शरीर वाला बनाओ. हे भद्रवचन वाली गायो! हमारे घर को कल्याणमय बनाओ. यज्ञ सभाओं में तुम्हारे महान् अन्न का वर्णन होता है. (६) प्रजावती: सूयवसं रिशन्ती: शुद्धा अप: सुप्रापाणे पिबन्ती: मा व: स्तेन ईशत माघशंस: परि वो हेती रुद्रस्य वृज्या:.. (७) हे गायो! तुम संतान वाली बनो, खाने के निमित्त सुंदर तिनके तोड़ो एवं सुख से पीने योग्य तालाब आदि से साफ पानी पिओ. चोर तुम्हारा मालिक न बने. हिंसक पशु तुम पर आक्रमण न करें. कालरूप परमेश्वर का आयुध तुमसे दूर रहे. (७) उपेदमुपपर्चनमासु गोषूप पृच्यताम्. उप ऋषभस्य रेतस्युपेन्द्र तव वीर्ये.. (८) हे इंद्र! तुम्हें शक्तिशाली बनाने के लिए इन गायों के पुष्ट होने की प्रार्थना की जा रही है. तुम्हारी शक्ति के लिए गायों को गर्भवती बनाने वाले सांडों की शक्ति की प्रार्थना की जा रही है. (८) सूक्त—२९ देवता—इंद्र इन्द्रं वो नर: सख्याय सेपुर्महो यन्तः सुमतये चकाना:. महो हि दाता वज्रहस्तो अस्ति महामु रणवमवसे यजध्वम्.. (१) हे यजमानो! तुम्हारे मित्ररूपी ऋत्विज् मित्रता पाने के लिए इंद्र की सेवा करते हैं. वे महान् स्तोत्र बोलते हुए इंद्र की कृपादृष्टि चाहते हैं. हाथ में वज्र धारण करने वाले इंद्र महान् धनदाता हैं. तुम रक्षा के हेतु महान् एवं सुंदर इंद्र की पूजा करो. (१) आ यस्मिन्हस्ते नर्या मिमिक्षुरा रथे हिरण्यये रथेष्ठा:. आ रश्मयो गभस्त्यो: स्थूरयोराध्वन्नश्वासो वृषणो युजाना:.. (२) जिन इंद्र के हाथों में मानव-हितकारी धन रहता है, जो सोने के बने रथ पर बैठते हैं, जिनकी मोटी भुजाओं में किरणें समाई हुई हैं एवं जिनके कामवर्षक घोड़े रथ में जुड़े हुए हैं, उनकी हम स्तुति करते हैं. (२) श्रिये ते पादा दुव आ मिमिक्षुर्धृष्णुर्वज्री शवसा दक्षिणावान्. वसानो अत्कं सुरभिं दृशे कं स्वर्ष्ण नृतविषिरो बभूथ.. (३) ebook converter DEMO Watermarks*