ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 959, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंएष द्रप्सो वृषभो विश्वरूप इन्द्राय वृष्णे समकारि सोमः. एतं पिब हरिवः स्थातरुग्र यस्येशिषे प्रदिवि यस्ते अन्नम्.. (३) यह तरल, अभिलाषापूरक एवं विविध रूपों वाला सोमरस मनोवांछित फल देने वाले इंद्र के लिए तैयार किया गया है. हे हरि नामक घोड़ों के स्वामी, सबके अधिपति एवं दृढ़ इंद्र! तुम उस सोम को पिओ, जिसके ऊपर तुम्हारा अधिकार है एवं जो तुम्हारा भोजन है. (३) सुतः सोमो असुतादिन्द्र वस्यान्वयं श्रेयाञ्चिकितुषे रणाय. एतं तितिर्व उप याहि यज्ञं तेन विश्वास्तविषीरा पृणस्व.. (४) हे इंद्र! निचोड़ा हुआ सोमरस बिना निचुड़ी हुई सोमलता से उत्तम है. हे विचारशील इंद्र! सोमरस तुम्हारे लिए प्रसन्न करने वाला है. हे शत्रुविजयी इंद्र! तुम यज्ञ के साधनरूप सोम के समीप आओ तथा इसे पीकर अपनी शक्तियों को पूर्ण करो. (४) ह्वयामसि त्वेन्द्र याह्यर्वाङ्डरं ते सोमस्तन्वे भवाति. शतक्रतो मादयस्वा सुतेषु प्रास्माँ अव पृतनासु प्र विक्षु.. (५) हे इंद्र! हम तुम्हें बुलाते हैं. तुम हमारे सामने आओ. हमारा यह सोमरस तुम्हारी शरीर वृद्धि के लिए पर्याप्त है. हे शतक्रतु इंद्र! तुम यह निचुड़ा हुआ सोमरस पीकर प्रसन्न बनो एवं युद्धों में सभी ओर से हमारी रक्षा करो. (५) सूक्त—४२ देवता—इंद्र प्रत्यस्मै पिपीषते विश्वानि विदुषे भर. अरङ्गमाय जग्मयेऽपश्चाद्दध्वने नरे.. (१) हे अध्वर्युगण! पीने के इच्छुक, सब कुछ जानने वाले, अधिक गतिशील, यज्ञों में उपस्थित रहने वाले, सबसे आगे चलने वाले एवं युद्ध के नेता इंद्र को सोमरस दो. (१) एमेनं प्रत्येतन सोमेभिः सोमपातमम्. अमत्रेभिर्ऋजीषिणमिन्द्रं सुतेभिरिन्दुभिः.. (२) हे अध्वर्युगण! तुम सोमरस लेकर अति अधिक सोम पीने वाले इंद्र के पास जाओ. तुम निचोड़े हुए सोम से भरे पात्र को लेकर शत्रुजयी इंद्र के पास जाओ. (२) यदि सुतेभिरिन्दुभिः सोमेभिः प्रतिभूषथ. वेदा विश्वस्य मेधिरो धृषत्तन्तमिदेषते.. (३) हे अध्वर्युगण! निचोड़े हुए एवं दीप्तिशाली सोमरस के साथ तुम इंद्र के सामने जाओ. मेधावी इंद्र तुम्हारी सभी इच्छाएं जानते हैं एवं शत्रुओं का नाश करते हुए अभिलाषाएं पूरी करते हैं. (३) ebook converter DEMO Watermarks*