भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 960, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 960

अस्माअस्मा इदन्धसोऽध्वर्यो प्र भरा सुतम्. कुवित्समस्य जेन्यस्य शर्धतोऽभिशस्तेरवस्परत्.. (४) हे अध्वर्युगण! एकमात्र इंद्र को ही निचोड़े हुए सोमरस को हव्य के रूप में दो. इंद्र सभी जीतने योग्य एवं उत्साह भरे शत्रुओं के द्वेष से हमारी रक्षा करें. (४) सूक्त—४३ देवता—इंद्र यस्य त्यच्छम्बरं मदे दिवोदासाय रन्धयः. अयं स सोम इन्द्र ते सुतः पिब.. (१) हे इंद्र! जिस सोमरस को पीने से उत्पन्न मद के कारण तुमने राजा दिवोदास के कल्याण के लिए शंबर असुर को मारा था, वही सोमरस तुम्हारे लिए निचोड़ा गया है. तुम इसे पिओ. (१) यस्य तीव्रसुतं मदं मध्यमन्तं च रक्षसे. अयं स सोम इन्द्र ते सुतः पिब.. (२) हे इंद्र! सोमलता का नशीला रस प्रातः, मध्याह्न एवं संध्या के यज्ञों में निचोड़ा जाता है. तुम उसे पीते हो. वही सोमरस तुम्हारे लिए निचोड़ा गया है. तुम इसे पिओ. (२) यस्य गा अन्तरश्मनो मदे दृळ्हा अवासृजः. अयं स सोम इन्द्र ते सुतः पिब.. (३) हे इंद्र! जिस सोमरस के नशे में तुमने पर्वत के घेरे में दृढ़तापूर्वक बंद गायों को छुड़ाया था, वही सोमरस तुम्हारे लिए निचोड़ा गया है. इसे तुम पिओ. (३) यस्य मन्दानो अन्धसो माघोनं दधिषे शवः. अयं स सोम इन्द्र ते सुतः पिब.. (४) हे इंद्र! जिस सोमरसरूप अन्न के कारण प्रसन्न होकर तुम अतिशय बल धारण करते हो, वही सोमरस तुम्हारे लिए निचोड़ा गया है. इसे तुम पिओ. (४) सूक्त—४४ देवता—इंद्र यो रयिवो रयिन्तमो यो द्युम्नैर्द्युम्नवत्तमः. सोमः सुतः स इन्द्र तेऽस्ति स्वधापते मदः.. (१) हे धन के स्वामी एवं स्वधारूप सोम के रक्षक इंद्र! जो सोमरस धन से अत्यंत युक्त एवं दीप्त यशों के कारण परम तेजस्वी है, वह सोमरस निचुड़ने पर तुम्हें प्रसन्नता दे. (१) यः शग्मस्तुविशग्म ते रायो दामा मतीनाम्. सोमः सुतः स इन्द्र तेऽस्ति स्वधापते मदः.. (२)

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