भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 977, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 977

सहसा यो मथितो जायते नृभिः पृथिव्या अधि सानवि.. (५) हे यज्ञ के गर्भ अग्नि! जल, पत्थर एवं अरणि रूप काष्ठ तुम्हें शक्तिशाली बनाते हैं. तुम मनुष्यों द्वारा बलपूर्वक मथे जाते हो एवं धरती के उच्च स्थान में प्रकट होते हो. (५) आ यः पप्रौ भानुना रोदसी उभे धूमेन धावते दिवि. तिरस्तमो ददृश ऊर्म्यास्वा श्यावास्वरुषो वृषा श्यावा अरुषो वृषा.. (६) जो अग्नि अपनी दीप्ति से धरती-आकाश को पूर्ण करते हैं, धुएं के साथ आकाश में दौड़ते हैं, वे ही दीप्तिसंपन्न एवं अभिलाषापूरक अग्नि काली रातों में अंधकार मिटाते हुए देखे जाते हैं. वे ही अग्नि रात्रियों के ऊपर स्थित हैं. (६) बृहद्भिरग्ने अर्चिभिः शुक्रेण देव शोचिषा. भरद्वाजे समिधानो यविष्ठ्य रेवन्नः शुक्र दीदिहि द्युमत्पावक दीदिहि.. (७) हे अतिशय युवा एवं दीप्तियुक्त अग्नि देव! तुम भरद्वाज द्वारा प्रज्वलित होकर अपनी विशाल किरणों द्वारा हमारे लिए धन दो एवं जलो. हे शुद्ध करने वाले अग्नि! तुम जलो. (७) विश्वासां गृहपतिर्विशामसि त्वमग्ने मानुषीणाम्. शतं पूर्भिर्यविष्ठ पाह्यंहसः समेद्धारं शतं हिमाः स्तोतृभ्यो ये च ददति.. (८) हे अग्नि! तुम समस्त मानव प्रजाओं के गृहपति हो. हे अतिशय युवा अग्नि! मैं तुम्हें सौ वर्ष तक प्रज्वलित रखूंगा. तुम अपने सैकड़ों रक्षा साधनों द्वारा मुझे तथा हव्य देने वाले स्तोताओं को पाप से बचाओ. (८) त्वं नश्चित्र ऊत्या वसो राधांसि चोदय. अस्य रायस्त्वमग्ने रथीरसि विदा गाधं तुचे तु नः.. (९) हे विचित्र तथा निवासस्थान देने वाले अग्नि! तुम रक्षासाधनों के साथ धनों को हमारी ओर प्रेरित करो. तुम्हीं इस धन के नेता हो. हमारी संतान को शीघ्र ही प्रतिष्ठा दिलाओ. (९) पर्षि तोकं तनयं पर्तृभिष्ट्वमदब्धैरप्रयुत्वभिः. अग्ने हेळांसि दैव्या युयोधि नोऽदेवानि ह्वरांसि च.. (१०) हे अग्नि! तुम अपने एकत्रित एवं हिंसारहित रक्षासाधनों द्वारा हमारे पुत्र-पौत्रों का पालन करो. देवों का क्रोध हमारे पास से हटाओ एवं हमारी मानवबाधा दूर करो. (१०) आ सखायः सबर्दुघां धेनुमजध्वमुप नव्यसा वचः. सृजध्वमनपस्फुराम्.. (११) हे मित्रो! तुम नई स्तुतियां बोलते हुए दुधारू गाय के पास पहुंचो. उसके दूधपीते बछड़ों को उससे इस प्रकार अलग करो कि उसे हानि न हो. (११) ebook converter DEMO Watermarks*

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