भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 976, कुल 1855 में से

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पहुंचाते हुए शब्द करो. हमारा दुःख जिनके सुख का कारण है, ऐसे लोगों को भगाओ. तुम इंद्र की मुष्टिका हो. तुम हमें दृढ़ता दो. (३०) आमूरज प्रत्यावर्तयेमाः केतुमद् दुन्दुभिर्वावदीति. समश्वपर्णाश्चरन्ति नो नरोऽस्माकमिन्द्र रथिनो जयन्तु.. (३१) हे इंद्र! शत्रुओं द्वारा रोकी गई हमारी गायों को ले आओ. सबको ज्ञान कराने के लिए यह दुंदुभि बार-बार बज रही है. हमारे सैनिक घोड़ों पर चढ़कर घूम रहे हैं. हे इंद्र! हमारे रथ पर बैठे सैनिक जय पावें. (३१) सूक्त—४८ देवता—अग्नि यज्ञाज्ञा वो अग्नये गिरागिरा च दक्षसे. प्रप्र वयममृतं जातवेदसं प्रियं मित्रं न शंसिषम्.. (१) हे स्तोताओ! तुम सभी यज्ञों में प्रवृद्ध अग्नि की स्तोत्रों द्वारा बार-बार प्रशंसा करो. हम मरणरहित, जातवेद व मित्र के समान प्रिय अग्नि की बार-बार प्रशंसा करते हैं. (१) ऊर्जो नपातं स हिनायमस्मयुर्दाशेम हव्यदातये. भुवद् वाजेष्वविता भुवद्वृध उत त्राता तनूनाम्.. (२) हम अपने ऊपर वास्तव में प्रसन्न एवं बलपुत्र अग्नि की प्रशंसा करते हैं. देवों के लिए हव्यवहन करने वाले अग्नि को हम हव्य देते हैं. अग्नि युद्ध में हमारे रक्षक, उन्नतिकारक एवं हमारे पुत्रों के त्राणकर्त्ता हों. (२) वृषा ह्यग्ने अजरो महान्विभास्यर्चिषा. अजस्रेण शोचिषा शोशुचच्छुचे सुदीतिभिः सु दीदिहि.. (३) हे अभिलाषापूरक, जरारहित एवं महान् अग्नि! तुम दीप्ति से प्रकाशित होते हो. हे तेजस्वी एवं नित्यदीप्ति से दीप्तियुक्त अग्नि! तुम अपनी शोभन दीप्तियों द्वारा हमें प्रकाशित करो. (३) महो देवान्यजसि यक्ष्यानुषक्तव क्रत्वोत दंसना. अर्वाचः सीं कृणुह्यग्नेऽवसे रास्व वाजोत वंस्व.. (४) हे अग्नि! तुम महान् देवों का यज्ञ करने वाले हो, इसलिए हमारे यज्ञ में भी देवों की सतत पूजा करो तथा हमारी रक्षा के लिए देवों को हमारे सामने लाओ. तुम हमें हव्य अन्न दो एवं हमारा दिया हुआ हव्य स्वीकार करो. (४) यमापो अद्रयो वना गर्भमृतस्य पिप्रति. ebook converter DEMO Watermarks*