ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 984, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंदशस्यन्तो दिव्याः पार्थिवासो गोजाता अप्या मृळता च देवाः.. (११) हे देवो! हमें दीप्तिसंपन्न, बलयुक्त एवं संतानसहित तथा बहुतों के द्वारा प्रशंसा के योग्य धन दो. स्वर्ग में रहने वाले, धरती पर रहने वाले, गाय से उत्पन्न एवं जल से उत्पन्न देवगण हमारी इच्छा पूरी करें. (११) ते नो रुद्रः सरस्वती सजोषा मीळ्हुष्मन्तो विष्णुर्मूळन्तु वायुः. ऋभुक्षा वाजो दैव्यो विधाता पर्जन्यावाता पिप्यतामिषं नः.. (१२) वर्षा करने वाले रुद्र, सरस्वती, विष्णु, वायु, ऋभुक्षा, वाज और विधाता देव परस्पर प्रेम रखते हुए हमें सुखी करें. पर्जन्य एवं वायु हमारे अन्न को बढ़ावें. (१२) उत स्य देवः सविता भगो नोऽपां नपादवतु दानु पप्रिः. त्वष्टा देवेभिर्जन्निभिः सजोषा द्यौर्देवेभिः पृथिवी समुद्रैः.. (१३) प्रसिद्ध सविता देव, भग, जल के पौत्र एवं दान देने वाले अग्नि हमारी रक्षा करें. देवों एवं देवपत्नियों के साथ प्रसन्न त्वष्टा, देवों के साथ प्रसन्न स्वर्ग एवं सागरों के साथ प्रसन्न धरती हमारी रक्षा करें. (१३) उत नोऽहिर्बुध्न्यः शृणोत्वज एकपात्पृथिवी समुद्रः. विश्वे देवा ऋतावृधो हुवानाः स्तुता मन्त्राः कविशस्ता अवन्तु.. (१४) अहिर्बुध्न्य, अजएकपाद, पृथ्वी एवं समुद्र हमारी स्तुतियां सुनें. यज्ञ को बढ़ाने वाले, बुलाए हुए एवं स्तुति किए हुए मंत्रों के विषय तथा मेधावी ऋषियों के द्वारा प्रशंसित विश्वेदेव हमारी रक्षा करें. (१४) एवा नपातो मम तस्य धीभिर्भरद्वाजा अभ्यर्चन्त्यर्कैः. ग्ना हुतासो वसवोऽधृष्टा विश्वे स्तुतासो भूता यजत्राः.. (१५) मेरे पुत्र अर्थात् भरद्वाजगोत्रीय ऋषि पूजायोग्य मंत्रों के द्वारा देवों की स्तुति करते हैं. हे यज्ञपात्र देवो! तुम हव्य द्वारा आहूत, निवासस्थान देने वाले, अपराजेय एवं देवपत्नियों के साथ पूजे जाते हो. (१५) सूक्त—५१ देवता—विश्वेदेव उदु त्यच्चक्षुर्महि मित्रयोराँ एति प्रियं वरुणयोरदब्धम्. ऋतस्य शुचि दर्शतमनीकं रुक्मो न दिव उदिता व्यद्यौत्.. (१) सूर्य, मित्र एवं वरुण का प्रसिद्ध, प्रकाश करने वाला, विस्तृत, प्रिय, अहिंसित, शुद्ध एवं दर्शनीय तेज सबके सामने ऊपर उठता है एवं आकाश के आभूषण के समान प्रकाशित होता ebook converter DEMO Watermarks*