भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 983, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 983

(४) मिम्यक्ष येषु रोदसी नु देवी सिषक्ति पूषा अभ्यर्धयज्वा. श्रुत्वा हवं मरुतो यद्ध याथ भूमा रेजन्ते अध्वनि प्रविक्ते.. (५) प्रकाशयुक्त स्वर्ग एवं धरती जिन मरुतों के साथ संयुक्त हैं, स्तोताओं को धनसंपन्न करने वाले पूषा जिनकी सेवा करते हैं, ऐसे मरुद्गण हमारी पुकार सुनकर जब आते हैं, उस समय विस्तृत मार्ग में पड़ने वाले प्राणी कांप उठते हैं. (५) अभि त्यं वीरं गिर्वणसमर्चेन्द्रं ब्रह्मणा जरितर्नवेन. श्रवदिद्धवमुप च स्तवानो रासद्वाजाँ उप महो गृणान:.. (६) हे स्तोता! नवीन स्तुतियों द्वारा स्तुतियोग्य एवं वीर इंद्र की स्तुति करो. इंद्र इस प्रकार बुलाए जाते हुए हमारी पुकार सुनें एवं हमें अधिक अन्न दें. (६) ओमानमापो मानुषीरमृतं धात तोकाय तनयाय शं यो:. यूयं हि ष्ठा भिषजो मातृतमा विश्वस्य स्थातुर्जगतो जनित्री:.. (७) हे मनुष्य हितकारी जल! हमारे पुत्रों एवं पौत्रों को कष्टनाशक एवं सुखसाधन अन्न दो. तुम चर एवं अचर प्राणियों को उत्पन्न करने वाले एवं माता से भी बढ़कर चिकित्साकर्त्ता हो. (७) आ नो देव: सविता त्रायमाणो हिरण्यपाणिर्यजतो जगम्यात्. यो दत्रवाँ उषसो न प्रतीकं व्यूर्णुते दाशुषे वार्याणि.. (८) रक्षा करने वाले, हाथ में सोना लिए हुए एवं यज्ञपात्र सविता हमारे यज्ञ में भली-भांति आवें. वे हव्यदाता यजमान को उषा के समान उज्ज्वल धन देते हैं. (८) उत त्वं सूनो सहसो नो अद्या देवाँ अस्मिन्नध्वरे ववृत्त्या:. स्यामहं ते सद्मिद्रातौ तव स्यामग्नेऽवसा सुवीर:.. (९) हे शक्तिपुत्र अग्नि! आज देवों को इस यज्ञ में बार-बार लाओ. मैं तुम्हारे धनदान में सदा वर्तमान रहूं. हे अग्नि! मैं तुम्हारी रक्षा के कारण शोभन पुत्र-पौत्रों वाला बनूं. (९) उत त्या मे हवमा जगम्यातं नासत्या धीभिर्युवमङ्ग विप्रा. अत्रिं न महस्तमसोऽमुमुक्तं तूर्वतं नरा दुरितादभीके.. (१०) हे विद्वान् अश्विनीकुमारो! तुम सेवा से युक्त मेरे स्तोत्रों के समीप आओ एवं अत्रि के समान हमें भी अंधकार से छुड़ाओ. हे नेताओ! हमें दुःख देने वाले युद्ध से बचाओ. (१०) ते नो रायो द्युमतो वाजवतो दातारो भूत नृवत: पुरुक्षो:. ebook converter DEMO Watermarks*

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