ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 986, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहम वह काम न करें, जिसके लिए तुम मना करो. हे विश्वेदेव! तुम सबके स्वामी हो. हमारा शत्रु अपने शरीर का स्वयं नाश करे. (७) नम इदुग्रं नम आ विवासे नमो दाधार पृथिवीमुत द्याम्. नमो देवेभ्यो नम ईश एषां कृतं चिदेनो नमसा विवासे.. (८) नमस्कार सबसे बढ़कर है. इसी कारण मैं नमस्कार करता हूं. नमस्कार ने ही धरती और स्वर्ग को धारण किया है. देवों को नमस्कार है. नमस्कार इन देवों का स्वामी है. मैं नमस्कार द्वारा पापों को दूर करता हूं. (८) ऋतस्य वो रथ्यः पूतदक्षानृतस्य पस्त्यसदो अदब्धान्. ताँ आ नमोभिरुरुचक्षसो नॄन्विश्वान्व आ नमे महो यजत्राः.. (९) हे यज्ञपात्र देवो! तुम यज्ञ के नेता, शुद्ध शक्ति वाले यज्ञशाला में निवास करने वाले, अपराजेय, दूरदर्शी, नेता एवं महान् हो. मैं तुम्हारे सामने नमस्कार-वचन के साथ झुकता हूं. (९) ते हि श्रेष्ठवर्चसस्त उ नस्तिरो विश्वानि दुरिता नयन्ति. सुक्षत्रासो वरुणो मित्रो अग्निॠतधीतयो वक्मराजसत्याः.. (१०) वरुण, मित्र और अग्नि उत्तम-शक्तिसंपन्न, सत्य-कर्म वाले एवं स्तोताओं के प्रति सच्चे हैं. वे श्रेष्ठ तेज वाले हैं. वे हमारे सभी दुर्गुणों का नाश करें. (१०) ते न इन्द्रः पृथिवी क्षाम वर्धन् पूषा भगो अदितिः पञ्च जनाः. सुशर्माणः स्ववसः सुनीथा भवन्तु नः सुत्रात्रासः सुगोपाः.. (११) इंद्र, पृथ्वी, पूषा, भग, अदिति और पंचजन हमारे पृथ्वी के निवासस्थान को बढ़ावें. ये देवगण हमारे प्रति उत्तमसुख देने वाले, शोभन-अन्नदाता, सफलतापूर्वक मार्गदर्शक, शोभनरक्षक एवं त्राणदाता बनें. (११) नू सद्मानं दिव्यं नंशि देवा भारद्वाजः सुमतिं याति होता. आसानेभिर्यजमानो मियेधैर्देवानां जन्म वस्युर्ववन्द.. (१२) हे देवो! भरद्वाजगोत्रीय होता अर्थात् मुझको एक दिव्य-भवन प्रदान करो. मैं तुम्हारी कृपादृष्टि चाहता हूं. यजमान अन्य मेधावी-स्तोताओं के साथ बैठकर धन की अभिलाषा से देवों के समूह की वंदना करता है. (१२) अप त्यं वृजिनं रिपुं स्तेनमग्ने दुराध्यम्. दविष्ठमस्य सत्पते कृधी सुगम्.. (१३) हे सज्जनों के रक्षक अग्नि! तुम कुटिल, पापकारी, दुःखदायी एवं कष्ट से वश में आने ebook converter DEMO Watermarks*