भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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पृष्ठ 995

सारे संसार के ऊपर स्थापित पूषा देव सब प्राणियों को प्रकाशित करते हैं एवं लौहदंड उठाकर आकाश में घूमते हैं (२) यास्ते पूषन्नावो अन्तः समुद्रे हिरण्ययीरन्तरिक्षे चरन्ति. ताभिर्यासि दूत्यां सूर्यस्य कामेन कृत श्रव इच्छमानः.. (३) हे पूषा! तुम्हारी जो सोने से बनी हुई नावें समुद्र के बीच में चलती हैं, उनके द्वारा तुम सूर्य के दूत बनकर चलते हो. तुम अन्न की अभिलाषा करते हुए स्तोताओं द्वारा पशु भेंट करके वश में कर लिए जाते हो. (३) पूषा सुबन्धुर्दिव आ पृथिव्या इळस्पतिर्मघवा दस्मवर्चाः. यं देवासो अददः सूर्यायै कामेन कृतं तवसं स्वज्वम्.. (४) पूषा स्वर्ग एवं धरती के शोभनबंधु, अन्न के स्वामी, धनसंपन्न, दर्शनीय रूप वाले, शक्तिशाली, स्वेच्छा से भेंट किए गए पशु के कारण प्रसन्न होने वाले एवं शोभनगति हैं. देवों ने उन्हें सूर्यपत्नी को दे दिया था. (४) सूक्त—५९ देवता—इंद्र व अग्नि प्र नु वोचा सुतेषु वां वीर्या३ यानि चक्रथुः. हतासो वां पितरो देवशत्रव इन्द्राग्नी जीवथो युवम्.. (१) हे इंद्र एवं अग्नि! सोमरस निचुड़ जाने पर हम तुम्हारे उन वीरतापूर्ण कार्यों का वर्णन करते हैं, जो तुमने समय-समय पर किए हैं. देवों के शत्रु मारे गए और तुम दोनों जीवित हो. (१) बळित्था महिमा वामिन्द्राग्नी पनिष्ठ आ. समानो वां जनिता भ्रातरा युवं यमाविहेहमातरा.. (२) हे इंद्र एवं अग्नि! तुम्हारे जन्म की महिमा सच्ची एवं प्रशंसनीय है. तुम दोनों के एक पिता हैं. तुम दोनों जुड़वां भाई हो. विस्तीर्ण धरती तुम्हारी माता है. (२) ओकिवांसा सुते सचाँ अश्वा सप्ती इवादने. इन्द्रान्व१ग्नी अवसेह वज्रिणा वयं देवा हवामहे.. (३) हे इंद्र एवं अग्नि! जैसे घोड़ों का जोड़ा एक साथ घास की ओर जाता है, उसी प्रकार तुम दोनों निचुड़े हुए सोमरस की ओर गमन करते हो. हम अपनी रक्षा के निमित्त वज्रधारी एवं दानादि गुणों वाले तुम दोनों को बुलाते हैं. (३) य इन्द्राग्नी सुतेषु वां स्तवत्तेष्वृतावृधा. ebook converter DEMO Watermarks*