भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 996, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 996

जोषवाकं वदतः पज्रहोषिणा न देवा भसथश्चन.. (४) हे यज्ञ की वृद्धि करने वाले इंद्र एवं अग्नि! तुम्हारा स्तोत्र प्रसिद्ध है. जो यजमान सोमरस निचोड़ जाने पर प्रीतिरहित शब्दों से तुम्हारी बुरी स्तुति करता है उसका सोमरस तुम कभी नहीं स्वीकार करते. (४) इन्द्राग्नी को अस्य वां देवौ मर्त्यश्चिकेतति. विषूचो अश्वान्युयुजान ईयत एकः समान आ रथे.. (५) हे इंद्र! एवं अग्नि! जब तुम में से एक इंद्र भांति-भांति से चलने वाले घोड़ों को रथ में जोड़कर अग्नि के साथ एक रथ में बैठकर जाता है तो कौन मनुष्य इस कार्य को जान सकता है? अर्थात् कोई नहीं. (५) इन्द्राग्नी अपादियं पूर्वागात्पद्वतीभ्यः. हित्वी शिरो जिह्वया वावदच्चरत्त्रिंशत्पदा न्यक्रमीत्.. (६) हे इंद्र एवं अग्नि! यह बिना चरणों वाली उषा चरणों वाली प्रजाओं से पहले धरती पर आती है. यह बिना शीश की होकर भी प्राणियों की वाणी से बहुत से शब्द करती हुई घूमती है. इस प्रकार यह तीस कदम आगे बढ़ गई है. (६) इन्द्राग्नी आ हि तन्वते नरो धन्वानि बाह्वोः. मा नो अस्मिन्महाधने परा वर्क्तं गविष्टिषु.. (७) हे इंद्र एवं अग्नि! युद्ध करने वाले लोग हाथों में धनुष फैलाते हैं. गायों को ढूंढने से संबंधित महान् युद्ध में तुम दोनों हमें छोड़ना नहीं. (७) इन्द्राग्नी तपन्ति माघा अर्यो अरातयः. अप द्वेषांस्या कृतं युयुतं सूर्यादधि.. (८) हे इंद्र एवं अग्नि! वार करने को तैयार एवं आक्रमणकारी शत्रुसेना हमें दुःखी कर रही है. उन्हें तुम दूर भगाओ एवं सूर्य का दर्शन भी मत करने दो. (८) इन्द्राग्नी युवोरपि वसु दिव्यानि पार्थिवा. आ न इह प्र यच्छतं रयिं विश्वायुपोषसम्.. (९) हे इंद्र एवं अग्नि! दिव्य और पार्थिव दोनों प्रकार के धन तुम्हारे ही हैं. इस यज्ञ में हमें संपूर्ण आयु को पुष्ट करने वाला धन दो. (९) इन्द्राग्नी उक्थवाहसा स्तोमेभिर्हवनश्रुता. विश्वाभिर्गीर्भिण गतमस्य सोमस्य पीतये.. (१०) हे स्तुतियां सुनकर आने वाले एवं स्तुतिमंत्रों से युक्त सुनने वाले इंद्र एवं अग्नि! हमारी ebook converter DEMO Watermarks*

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