भारतकोश
रोगी रोग मुक्त बिना दवाई: योगासन एवं प्राणायाम

रोगी रोग मुक्त बिना दवाई: योगासन एवं प्राणायाम

Rogi Rog Mukt Bina Dawai: Yogasan evam Pranayama

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Chikitsa & Yogasan Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished60 पृष्ठ

पृष्ठ 42, कुल 60 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 42
  • • बायें पैर को पीछे की ओर उठाएं।
    • • पैर का पंजा पीछे की ओर खींचा हुआ रहे।
    • • जितना ज्यादा से ज्यादा पैर को पीछे से उठाएं, उतना उठाने की कोशिश करनी चाहिए।
    • • सारे शरीर का वजन सीधे पैर पर रहेगा।
    • • थट्टि सामने की ओर रखें।
    • • एक बार श्वास को बाहर निकाल कर बाहर ही रोके।
    • • जब श्वास लेने की इच्छा हो तब श्वास ले लें।
    • • लेकिन आसन की अवस्था स्थिरता के साथ बनी रहे।
    • • कुछ समय तथा रोके, उसके बाद पहले वाली स्थिति में आ जाएं।
    • • एक आकृति से तीन आकृति तक करें।
    • • तीस सेकेंड से एक मिनट तक करने का प्रयास करें।
    • • वायुयान जैसी स्थिति होने से इस आसन का नाम यानासन है।

जानुशिरासन

  • • इस आसन को नियमित रूप से करने से घुटने, पीठ, कमर और टांगों की नसें व मांसपेशियाँ मजबूत हो जाती हैं। पीठ व मेरुदंड में लचीलापन लाया जा सकता है जिससे उनमें होने वाले अनियमित दर्द खत्म हो जाते हैं।
  • • इस आसन द्वारा श्वसन तंत्र निरोगी होता है।
  • • इस आसन द्वारा वीर्य सम्बन्धी रोग या दोष ठीक किये जा सकते हैं।
  • • मधुमेह के रोग भी दूर किये जा सकते हैं।
  • • प्लीहा, यकृत, आंतों आदि के दोषों को खत्म किया जा सकता है साथ ही मोटापे की समस्या से भी छुटकारा पाया जा सकता है।
  • • इस आसन द्वारा साइटिका का दर्द भी दूर किया जा सकता है।
  • • उदर और आमाशय के रोग ठीक किये जा सकते हैं तथा पाचन तंत्र को मजबूत किया जा सकता है।
  • • इस आसन द्वारा स्त्रियों में कामवासना को बढ़ाया जा सकता है तथा स्त्री पुरुष के गुसांगों को मजबूत बनाया जा सकता है।
  • • रीढ़ की हड्डी से गुजरने वाली मूल रक्त नलिका के विकार दूर किये जा सकते हैं।

42

रोगी रोग मुक्त बिना दवाई: योगासन एवं प्राणायाम · पृष्ठ 42, कुल 60 में से · BharatKosha