रोगी रोग मुक्त बिना दवाई: योगासन एवं प्राणायाम
Rogi Rog Mukt Bina Dawai: Yogasan evam Pranayama
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Chikitsa & Yogasan Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
- 11. छोटी उंगली के नीचे , हथेली के नीचे साईड की और पाइंट दबाने पर कन्धे के दर्द के रोग दूर होते हैं।
- 12. हथेली के बीचों बीच दबाने पर पेट स्वस्थ रहता है।
- 13. बड़ी उंगली के ऊपरी हिस्से को दबाने पर निम्न रक्तचाप संतुलित होता है।
- 14. अनामिका उंगली के ऊपरी भाग को दबाने पर हार्ड रक्तचाप संतुलित होता है।
- 15. घुटना के दर्द दूर करने के लिए, अनामिका उंगली को पीछे के तरफ से पूरी उंगली को दबाये।
- 16. छोटी उंगली के ऊपरी भाग को दबाने से , छोटे बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना छूट जाता है।
कुछ महत्वपूर्ण एक्यूप्रेशर बिन्दू
- 1. जॉइनिंग द वैली – यह प्वाइंट हमारे अंगूठे और इंडेक्स फिंगर (तर्जनी) के बीच में होता है। इस प्वाइंट पर दबाने से शरीर के कई प्रकार के दर्द जैसे कि सिर दर्द, दांत का दर्द, गर्दन का दर्द, कंधे का दर्द, अर्थराइटिस और कब्ज जैसी समस्याएं दूर हो जाती हैं।
- 2. पैरीकार्डियम – ये प्वाइंट हमारे हथेली से लगभग दो अंगुल नीचे की तरफ हमारी कलाई में मौजूद होता है। इस प्वाइंट पर दबाने से सिर दर्द, वॉर्मिंटिंग, सीने में दर्द, हाथों में दर्द और बैचेनी दूर हो जाती हैं।
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3. थर्ड आई – नाम के अनुसार ही ये प्वाइंट हमारे माथे पर दोनों आईब्रो के बीच मौजूद होता है। इस प्वाइंट पर दबाने से हमारी थकान और स्ट्रेस दूर होता है। इसके अलावा सिर दर्द, आंख का दर्द दूर होने के साथ-साथ मानसिक शांति भी मिलती है।
4. सी ऑफ ट्रेकालिटी – ये प्वाइंट चेस्ट की बीचो बीच मौजूद होता है। इस प्वाइंट पर दबाने से डिप्रेशन, नर्वसनेस और एंज्वाइटी दूर होती है।
5. लेग श्री माइल्स – ये प्वाइंट हमारे घुटनों से लगभग चार अंगुल नीचे की तरफ मौजूद होता है। यहाँ दबाने से पेट दर्द, उल्टी, पेट फूलना, कब्ज और इनडाइजेशन जैसी समस्या दूर हो जाती है।
6. कमांडिंग मिडिल – ये प्वाइंट हमारे घुटनों के ठीक पीछे मौजूद होता है जहाँ दबाने से अर्थराइटिस का दर्द, कमर और कुल्हे का दर्द दूर हो जाता है।
7. शेन मैन – ये प्वाइंट कान के ऊपरी हिस्से में पाया जाता है। यहाँ दबाने से स्ट्रेस, एंज्वाइटी और डिप्रेशन जैसी समस्या दूर हो जाती है।
8. हेवनली पिलर – ये प्वाइंट हमारी गर्दन और खोपड़ी के जोड़ पर पीछे की तरफ होता है जहाँ दबाने से सिर दर्द, गर्दन का दर्द, स्ट्रेस और थकान से राहत मिलती है।
9. सैकरल प्वाइंट्स- यह प्वाइंट रीढ़ की हड्डी के नीचे टेल बोन पर पाया जाता है। इस प्वाइंट पर दबाने से लोवर बैक पेन और पीरियड्स में होने वाले दर्द से राहत मिलती है।
10. बिगर रशिंग – यह प्वाइंट हमारे पैरों पर अंगूठे और बड़ी उंगली के बीच पाया जाता है। इस प्वाइंट को दबाने से सिर दर्द और आंखों की थकान से राहत मिलती है।
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आयुर्वेदिक दिनचर्या
- 1. सुबह उठते ही बासी मुँह से जितना ज्यादा पी सको गुनगुना पानी पीए।
- 2. जब भी पानी पीये नीचे बैठ कर एक-एक घूँट मुँह में गोल गोल घुमा के पीए।
- 3. भोजन बनाते समय सूर्य प्रकाश और पवन का स्पर्श भोजन को जरूर मिलना चाहिए।
- 4. भोजन पकने के बाद जितना जल्दी हो सके उसका उपभोग हो जाना चाहिए।
- 5. सुबह का भोजन सूर्योदय से ढ़ाई घंटे के अंदर करें, जो सबसे ज्यादा पंसद है वो खाये। दोपहर का भोजन सुबह से थोड़ा कम करें। शाम का भोजन सूर्यास्त होने से पहले बिल्कुल कम करें (ना ही करे तो अच्छा) ।
- 6. खाने के 45 मिनट पहले और खाने के डेढ़ घंटे बाद तक पानी ना पीए।
- 7. खाने के बाद सुबह किसी भी फल का रस, दोपहर को छाछ और रात को देशी गाय का दूध पीए।
- 8. हमेशा संध्या नमक का रसोई में उपयोग करे। इससे शरीर को बहुत से पोषक तत्व मिलते हैं।
- 9. भोजन में मैदे का उपयोग ना करें। गेहूँ का आटा 10 दिन और मकाई, बाजरा और जुआर का आटा सात दिन से पुराना ना खाये।
- 10. सुबह और दोपहर का भोजन करके 10 मिनट वज्रासन में बैठे और 20-25 मिनट वाम कुक्षी (बायीं ओर) अवस्था में सोये। इससे भोजन पचता है और काम करने की क्षमता बढ़ती हैं।
- 11. ठंडे पेय, शराब और चाय ना पीए, उसकी जगह पीने पिलाने की बहुत सी चीजे हैं। जैसे नींबू पानी, नारियल पानी, संतरे का जूस आदि।
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- 12. सोते समय पारिवारिक व्यक्ति को दक्षिण दिशा में सन्यासी, ब्रह्मचारी और विद्यार्थी को पूर्व दिशा में सर रखकर सोना चाहिए
- 13. भोजन खूब चबा चबा कर करे। आयुर्वेद में निवाले को 32 बार चबाने का विधान हैं।
- 14. घर में एल्युमीनियम के बर्तनों का उपयोग ना करें। उसकी जगह मिट्टी के बर्तन या तांबे, पित्तल, लोहे और स्टील का उपयोग कर सकते हैं।
- 15. भोजन के बाद बिना सुपारी, तंबाकू और कत्था का पान जरूर खाये। ये कफ, वात औरपित्त को बराबर रखता है।
- 16. 40 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को गेहूँ के दाने जितना चूना, पानी या छाछ या दही के साथ जरूर लेना चाहिए। चूना वात के रोगो का नाश करता हैं। इससे कमर, घुटने व जोड़ो के दर्द नहीं होते। (पथरी वाले चूना ना खाये।)
इस पुस्तक को लिखने का मेरा उद्देश्य हैं कि सभी लोग बिना डॉक्टर के पास जाये स्वस्थ रहें।
आज हमारे देश में लगभग 85% लोग किसी ना किसी रोग से ग्रस्त हैं। यदि हम अपना थोड़ा सा भी ख्याल रखे तो हम बड़ी से बड़ी बीमारी से बचा जा सकता हैं।
- स्वदेशी रोबिन सिराना (राजीव दीक्षित समर्थक)
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