भारतकोश
रोगों की पहचान

रोगों की पहचान

Rogon Ki Pehchaan

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

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शरीर में दोषयुक्त पदार्थ का आगमन

शरीर में दोषयुक्त पदार्थ मुख्य, नाक और त्वचा के रोम-छिद्रों से अंदर आ जाता है। साधारणतया स्वाँस प्रक्रिया से या खाने की प्रक्रिया से अगर गंदा पदार्थ अंदर आ जाता है, तो वो बाहर भी स्वयं ही हो जाता है। फेफड़े, आँतें, मूत्राशय आदि अंग बेकार पदार्थ को बाहर निकालने में लगे रहते हैं। पर जब दूषित पदार्थ अधिक मात्रा में अंदर आ जाता है तो फिर शरीर के ये अंग उसे पूर्ण रूप से बाहर नहीं निकाल पाते हैं और वही रोग का कारण बन जाता है। मुख्य रूप से दूषित भोजन, दूषित हवा और दूषित पानी से दोषयुक्त पदार्थ हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं।

गुरु कीजिये जानि के, पानी पीजै छानि। बिना बिचारे गुरु करे, पैरै चौरासी खानि ॥

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