भारतकोश
रोगों की पहचान

रोगों की पहचान

Rogon Ki Pehchaan

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

पृष्ठ 110, कुल 128 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 110

110

साहिब बन्दगी

गंजापन होने पर

❑ अनार के पत्तों को पीसकर गंज वाली जगह लेप कर दें।

नकसीर आने पर

❑ अनार का रस नथुनों में डालें।

पेट दर्द होने पर

❑ अनार के दाने निकालकर उसमें सेंधा नमक और जरा-सी काली मिर्च डालकर खाएँ। यह बहुत लाभकारी है।

मासिक स्त्राव अधिक होने पर

❑ अनार के सूखे हुए छिलकों को पीसकर चूर्ण बना लें। फिर किसी साफ़ बारीक कपड़े से छान कर डेढ़ चम्मच (छोटा) चूर्ण खिलाकर थोड़ा-सा शीतल जल पिला दें। यह प्रयोग सुबह-शाम करें।

नारंगी से रोगों का निदान

गुर्दे का रोग होने पर

❑ सुबह खाली पेट नारंगी का रस पिएँ।

मुँहासे होने पर

❑ नारंगी के छिलके पीसकर लगाएँ।

गैस होने पर

❑ सुबह खाली पेट नारंगी का रस पिएँ।

देसी घी से रोगों का निदान

सिर दर्द होने पर

❑ सोते समय पैर की तलियों में देसी घी की मालिश करें।

रोगों की पहचान · पृष्ठ 110, कुल 128 में से · BharatKosha