भारतकोश
रोगों की पहचान

रोगों की पहचान

Rogon Ki Pehchaan

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

पृष्ठ 114, कुल 128 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 114

114

साहिब बन्दगी

गेहूँ से रोगों का निदान

नोट : गेहूँ के बड़े गुण हैं। इसका रस पीने और सलाद खाने से कई बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है। हृदय रोग, पोलियो और पथरी और आँखों की कमजोरी में तो यह विशेष लाभकारी है।

आठ इंच गेहूँ के पौधे के ठण्डल और पत्ती लेकर सलाद की तरह खिलाएँ या उनका ताजा रस निकालकर रोगी को दें।

आप अपने घरों में भी गमलों में गेहूँ के पौधे उगा सकते हैं। कुछ ही दिनों में गेहूँ के पौधे उग जाते हैं।

हड़डी टूटने पर

0 10 ग्राम शहद में इतनी ही गेहूँ की राख मिलाकर चाटें।

मूत्राशय में पथरी होने पर

0 गेहूँ के साथ चने उबालकर छान लें और वो पानी पिएँ।

पेशाब के साथ वीर्य जाने पर

0 110 ग्राम गेहूँ को शाम के 7 बजे पानी में भिगो दें और सुबह उसी पानी के सहयोग से किसी पत्थर पर पीस लें। फिर उसमें थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर पी लें। हफ्ता-डेढ़ हफ्ता जरूर करें।

छाछ से रोगों का निदान

नोट : दही के मुकाबले छाछ का बड़ा महत्व है। यह बड़ी गुणकारी है। इसका सेवन रोगों को जड़ से मिटाता है। पेट के रोगों में इसका विशेष महत्व है।

अपच होने पर

0 जीरे को भूनकर उसमें काली मिर्च मिलाकर पीस लें। अब इस चूर्ण को छाछ में डालकर थोड़ा-सा सेंधा नमक मिला लें। यह बड़ी लाभकारी दवा है।