भारतकोश
रोगों की पहचान

रोगों की पहचान

Rogon Ki Pehchaan

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

पृष्ठ 125, कुल 128 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 125

रोगों की पहचान

125

अमर लोक का विदेह नाम

काया नाम सबहिं गुण गावै, विदेह नाम कोई बिरला पावै ॥ विदेह नाम पावेगा सोई, जिसका सदगुरु साँचा होई ॥

पाँच तीन यह साज पसारा, न्यारा शब्द विदेही हो। पाँच कहो तो छटवें हम हैं, आठ कहो नौ आई हो ॥

पाँच तीन अधीन काया, न्यार शब्द विदेह हो। सुरति माहिं विदेह दरशै, गुरु मता निज एह हो ॥

छिन इक ध्यान विदेह समाई। ताकी महिमा बरनिन न जाई ॥ सार नाम सदगुरु से पावे। नाम डोर गहि लोक सिधावे ॥ सार शब्द विदेह स्वरूपा। निःअक्षर वह रूप अनुपा ॥ तत्व प्रकृति भाव सब देहा। सार शब्द निःतत्व विदेहा ॥

बावन अक्षर में संसारा। निःअक्षर सो लोक पसारा ॥ सोई नाम है अक्षर बासा। काया ते बाहर परकासा ॥

शब्द शब्द सब कोई कहे, वह तो शब्द विदेह। जिभ्या पर आवे नहीं, निरख परख के लेह ॥

—साहिब कबीर जी

पिण्ड ब्रह्माण्ड और वेद कितेबै, पाँच तत्त्व के पारा। सतलोक यहाँ पुरुष विदेही, वह साहिब करतारा ॥

—दादू दयाल