रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
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अमर लोक का विदेह नाम
काया नाम सबहिं गुण गावै, विदेह नाम कोई बिरला पावै ॥ विदेह नाम पावेगा सोई, जिसका सदगुरु साँचा होई ॥
पाँच तीन यह साज पसारा, न्यारा शब्द विदेही हो। पाँच कहो तो छटवें हम हैं, आठ कहो नौ आई हो ॥
पाँच तीन अधीन काया, न्यार शब्द विदेह हो। सुरति माहिं विदेह दरशै, गुरु मता निज एह हो ॥
छिन इक ध्यान विदेह समाई। ताकी महिमा बरनिन न जाई ॥ सार नाम सदगुरु से पावे। नाम डोर गहि लोक सिधावे ॥ सार शब्द विदेह स्वरूपा। निःअक्षर वह रूप अनुपा ॥ तत्व प्रकृति भाव सब देहा। सार शब्द निःतत्व विदेहा ॥
बावन अक्षर में संसारा। निःअक्षर सो लोक पसारा ॥ सोई नाम है अक्षर बासा। काया ते बाहर परकासा ॥
शब्द शब्द सब कोई कहे, वह तो शब्द विदेह। जिभ्या पर आवे नहीं, निरख परख के लेह ॥
—साहिब कबीर जी
पिण्ड ब्रह्माण्ड और वेद कितेबै, पाँच तत्त्व के पारा। सतलोक यहाँ पुरुष विदेही, वह साहिब करतारा ॥
—दादू दयाल