भारतकोश
रोगों की पहचान

रोगों की पहचान

Rogon Ki Pehchaan

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

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रोगों के सामान्य चिह्न

किसी के शरीर में मौजूद निम्नलिखित में से एक या एक से अधिक चिह्नों को देखकर हम साधारण रूप से यह जान सकते हैं कि यह व्यक्ति रोगी है, इसे कोई-न-कोई रोग अवश्य है।

  • ❑ जब भी पेशाब ठीक से न हो, उसमें कष्ट का अनुभव हो, उसका रंग लाल, हरा, काला या गाढ़ा हो तो समझ लेना चाहिए कि कुछ रोग है।
  • ❑ जब भी भोजन के बाद भारीपन लगे, कुछ बेचैनी लगे तो समझ लेना चाहिए कि कुछ रोग है।
  • ❑ यदि आप सोकर जगने पर परेशानी महसूस करते हैं तो यह भी रोग का चिह्न है।
  • ❑ प्यास लगने पर पानी पीने का दिल न करे, बल्कि कुछ और लेने का दिल करे तो समझ लेना चाहिए कि रोग है।
  • ❑ जब चाल में अंतर आ जाए तो समझ लेना चाहिए कि कुछ बीमारी है।
  • ❑ यदि मल पतला, काला या सख्त हो तो यह भी रोग की निशानी है।
  • ❑ यदि आप सिर को दाएँ-बाएँ, आगे-पीछे घुमाने में तकलीफ महसूस करते हैं तो यह रोग का ही चिह्न है।
  • ❑ यदि सोते समय आपका मुँह खुला रहता है तो यह भी रोग का ही चिह्न है।
  • ❑ यदि अधिक शारीरिक परिश्रम करने के बाद बेचैनी हो, कष्ट की अनुभूति हो तो यह भी रोग की निशानी है।

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