रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकुछ खतरनाक रोगों के चिह्न
क्षय रोग के चिह्न
जब भी पेट में पिण्ड बनने लगे, चेहरे का रंग लाल और चमकदार होने लगे और चेहरा चौरस शक्ल लेने लगे तो समझ जाना चाहिए कि इंसान क्षय रोग की ओर बढ़ रहा है।
ऐसे में नाक पहले फूलती है और फिर बाद में पतली होती जाती है। गले में पिण्ड बनने लगते हैं और गला लंबा होने लगता है। मुँह खुला-सा हो जाता है। नाक पुरानी बलगम से भर जाती है और भीतर से काली पड़ने लगती है।
क्षय रोग सामने और पीछे दोनों में से किसी भी तरफ के जमाव से हो सकता है। पर यदि पीछे के जमाव से हुआ तो खतरनाक होता है। ऐसे में छाती या पीठ पर फोड़े भी निकलते हैं, जो शरीर द्वारा दूषित द्रव्य को बाहर निकालने का प्रयास होता है। पर उष्ण या जीवनी-शक्ति की कमजोरी आड़े आती है तो दोष बाहर नहीं हो पाता और यही दोष सख्त होकर गाँठों की शक्ल ले लेता है। दर्द न होने से मनुष्य को इस रोग का पता भी नहीं चल पाता है।
जिन बच्चों को गंठमाल होता है, वे क्षय रोग की ओर बढ़ रहे होते हैं।
इसका एक और लक्षण है कि ऐसे बच्चों को प्रायः सर्दी और खाँसी की शिकायत होती रहती है। यदि यह सर्दी और खाँसी लंबे समय तक समय-समय पर होती है तो क्षय रोग का संकेत समझा जा सकता है।
जिस मनुष्य के शरीर का रंग पीला या निर्जीव हो, सिर आगे की
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