रोगों की पहचान

रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
DevanagariHindipublished128 पृष्ठ
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साहिब बन्दगी
विष-तुल्य होता है।
इसलिए जल पीने के मामले में निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी चाहिए—
- ❑ पानी पीने की मात्रा आयु और मौसम के अनुसार होनी चाहिए।
- ❑ साधारणतया हररोज़ दो लीटर पानी ज़रूर पीना चाहिए।
- ❑ सुबह उठकर एक बड़े गिलास पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीना मल की सही सफाई के लिए बड़ा लाभाकारी होता है।
- ❑ जल घूँट-2 करके पीना चाहिए। दो-तीन सैकेण्ड मुँह में रखने के बाद ही नीचे उतारना चाहिए।
- ❑ जो जल आप पी रहे हैं, ध्यान रहे कि वो न अधिक गर्म हो और न अधिक ठण्डा। चाहे कितनी भी गर्मी हो, पर अधिक ठण्डे जल का सेवन मत करें। वो हानिकारक ही होता है।
- ❑ भूख लगने पर पानी मत पिएँ, इससे जलोदर रोग हो सकता है।
पानी का पीना निम्नलिखित रोगों में लाभदायक है—
थोड़े-थोड़े समय के अंतराल में एक बड़ा गिलास ठण्डा पानी पीते रहना पत्थरी, उच्च रक्तचाप, ज्वर, कब्ज आदि रोगों में लाभकारी सिद्ध होता है।
इसके अतिरिक्त यदि नींद न आए तो किसी खुले बर्तन में पानी डालें। 8 मिनट तक दोनों पैर उसमें डाले रखें। सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडे पानी का सहारा ले सकते हैं। फिर यदि पेशाब रुक-रुक कर आता हो तो ठंडे-ठंडे पानी में कपड़ा भिगोकर नाभि स्थान के नीचे रखें। इस तरह पानी के बहुत गुण हैं। पर सावधानी बरतें कि पानी स्वच्छ पिएँ। यदि पानी स्वच्छ न हो तो उबालकर उसे ठंडा करके पिएँ।