रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
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साहिब बन्दगी
पानी में डाल अच्छी तरह से मसल लें। अब इसे कड़बी तूँबी के ही पत्ते पर डालकर अण्डकोषों पर बाँध दें। विकल्प के तौर पर किसी बारीक पकड़े का सहारा भी ले सकते हैं। 4-5 दिन यह प्रयोग करें।
पीलिया होने पर
जब मुँह कड़वा रहने लगे, सिर में चक्कर आने लगे, मल काला आने लगे, कब्ज की शिकायत रहने लगे, उल्टियाँ होने लगे तो समझ लेना चाहिए कि शीघ्र ही पीलिया का रोग होने वाला है।
इसमें शरीर पीला तो होता ही है, शोच भी काली आती है। अनार के पत्तों को पीसकर चूर्ण बना लें। 5 ग्राम इस चूर्ण को छाछ (गाय के दूध की) के साथ रोगी को दें।
चिरायता और कुटकी दोनों समान मात्रा में लेकर अच्छी तरह घोंट लें। अब रात के समय उसे पानी में डाल दें। सुबह उठकर साफ कपड़े से छान लें। इस पानी में मिठास के लिए थोड़ी-सी मिश्री डालकर रोगी को पिलाएँ। यह दवा हररोज रोगी को पिलाएँ।
पीपल के 5 कोमल थोड़े छोटे साइज के पत्ते लेकर अच्छी तरह से साफ कर लें। फिर मिश्री के साथ कूट-पीस लें। अब पौन गिलास पानी में मिला लें। फिर छानकर वो पानी रोगी को पिला दें। यह प्रयोग सुबह-शाम तब तक करें, जब तक रोगी ठीक न हो जाए।
भोजन के बाद 25 मिली ग्राम रोहितकारिष्ठ चम्मच-भर पानी में मिलाकर रोगी को दें।
शंख भस्म, पुर्नवा, नवायस लौह और मण्डूर-सब 250-250 मि. ग्रा. और गिलोय सत्व 4 ग्राम लेकर अच्छी तरह पीस लें। फिर इसकी 8 पुड़ियाँ बना लें। 5 घण्टे के अन्तराल से जल