रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
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साहिब बन्दगी
ऊपर से 34 ग्राम काली मिर्च डालें। जब काली मिर्च अच्छी तरह उसमें मिल जाएँ तो उतारकर ठंडा कर लें। अब उसे पीसकर किसी बर्तन में रख लें। यह दवा आधा ग्राम की मात्रा में पानी के साथ रोगी को देनी चाहिए। बहुत लाभकारी है।
100 ग्राम कलमी शोरा, 50 ग्राम बेर पत्थर और ढाई सेर मूली रस लेकर रख लें। सबसे पहले एक बर्तन में 100 ग्राम कलमी शोरा डालें। तब उस पर 50 ग्राम बेर पत्थर डालें। फिर आधा सेर मूली रस डालकर आग पर रखें। भली-भाँति गर्म करके ठंडा होने के लिए रखें। जब ठंडा हो जाए तो पुनः आधा सेर मूली रस डालकर आग पर रखें। फिर अच्छी तरह गर्म करके ठंडा होने के लिए रखें। ऐसे ही आधा-आधा सेर मूली रस डालकर बार-बार गर्म करते जाएँ। यानी पाँच बार आपको गर्म करके ठंडा करना पड़ेगा। तो अंतिम बार ठंडा करने के बाद दवा तैयार हो जायेगी। अब 1 रत्ती जवाखार, 1 रत्ती मूली क्षार और एक रत्ती बनायी हुई दवा पानी में डालकर दिन में दो बार रोगी को दें। यह बहुत ही लाजवाब दवा है। पथरी रेत बनकर मूत्र-मार्ग से बाहर आ जाती है।
नोट : गुर्दे की पथरी में यदि औषधियों से लाभ न मिले तो जर्मनी में ऐसी मशीन का अविष्कार हुआ है, जिससे आप्रेशन की जरूरत नहीं पड़ती और वो मशीन बाहर से ही ऐसी तरंगे छोड़ती है कि गुर्दे की पथरी टूटकर मूत्र-मार्ग से बाहर आ जाती है। अभी यह भारत में भी आ गयी है। इसलिए आप्रेशन से बचें। इसमें रोगी को बेहोश करने की भी जरूरत नहीं होती और न ही शरीर के किसी अन्य अंग को हानि पहुँचती है। अस्पताल में रुकने की भी रोगी को जरूरत नहीं रहती है।
अन्य उपचार
☐ छाछ का सेवन करते रहें।
☐ मूली का सेवन करें।