रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
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साहिब बन्दगी
सतलोक अमरलोक बेगमपुरा
सत्य पुरुष
परम पुरुष, अविनाशी पुरुष ज्ञानी पुरुष और साहिब
मन के देहा
काल पुरुष निराकार, निरंजन अथवा मन की भूल भलाईया
सहस्रसागर चक्र अथवा गिरिजन लोक
पांचवा आकाश तत्व जो रारंकार से पैदा होता है, यह शरीर में मन रूप में समाया हुआ है। जो के सब का काल है सारा संसार इसी को ही सत्य पुरुष मान कर खोज रहा है।
अतल
वितल
सुतल
तलातल
महातल
रसातल
पाताल
- ● → सहज लोक
- ● → वार्णी लोक
- ● → इच्छा लोक
- ● → अंकुर लोक
- ● → मूल सुरति लोक
- ● → सोहेंग लोक
- ● → अचिन्त लोक
आज्ञा चक्र दो दल कमल यहाँ आत्मा का वास है।
कंठ चक्र-यहाँ आद्य शक्ति का वास है
शिवलोक - यहाँ शिव और पार्वती जी का वास है, 70 प्रकार की अनहद धुने यहाँ से उठती है तथा भंवर गुफा में सुनाई देती है। यही पर अग्नि तत्व है, जो ज्योति निरंजन (अलख निरंजन) से पैदा होता है।
विष्णु लोक - यहाँ विष्णु जी और लक्ष्मी जी का वास है। नाभि स्थान पर संपूर्ण शरीर का संचालन पेट हो करता है। वायु तत्व यहाँ पर है, जो सोहें शब्द से पैदा होता है।
ब्रह्मलोक - (स्वादिष्टान चक्र) यहाँ ब्रह्मा और सावत्री जी का वास है। यहाँ से संपूर्ण मैथुन सृष्टि का संचालन होता है। यहाँ जल तत्व है, जो ओंकार (ॐ) से पैदा होता है।
मूलाधार चक्र - (गुहा स्थान) यहाँ गणेश जी का वास है पृथ्वी तत्व यहाँ पर है, जो सत् शब्द से पैदा होता है।
मानव शरीर में लोकों की रचना