रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
पृष्ठ 86, कुल 128 में से
संदर्भ में पढ़ें६६
साहिब बन्दगी
टी. बी. होने पर
☐ शहद को मक्खन के साथ मिलाकर सुबह-शाम लें।
बच्चों के दाँत निकलने पर
☐ दाँत निकलते समय बच्चों के मसूड़ों पर शहद लगाएँ। इससे बच्चों को दर्द कम होता है।
आवाज़ बैठने पर
☐ आधा गिलास गर्म पानी में चम्मच-भर शहद मिलाकर गरारे करें।
लू लगने पर
☐ शहद में लौंग, इलायची, हल्दी, कालीमिर्च और जीरा सब समान मात्रा में मिलाकर सेवन करें।
पिप्ती की खराबी होने पर
☐ 22 ग्राम शहद में 5 ग्राम नागकेसर मिलाकर खाएँ। यह प्रयोग दिन में 2-3 बार करें।
पुराना बुखार होने पर
☐ शहद में गिलोय का चूर्ण मिलाकर सेवन करें।
मूत्र रोग होने पर
☐ सुबह खाली पेट शौच से पहले एक गिलास शीतल जल में एक चम्मच शहद मिलाकर नित्य पिएँ।
कान दर्द होने पर
☐ शहद में लौंग का तेल मिलाकर कान में डालें।
मिरगी के दौर पड़ने पर
☐ यदि किसी को बार-बार मिरगी के दौर पड़ते हैं तो करौंदों के रस में आधा चम्मच शहद मिलाकर हर रोज पिलाएँ।