भारतकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

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हिन्दीटीकासहितम् ११ हस्तनक्षत्रमें कीकवचकी जड़ ले हाथमें वा शिरमें बांधे तौ युद्धमें डर न लगे और शस्त्र न लगे ॥४२॥ श्वेतकंटकिमूलं च हस्ते गृह्य च बंधयेत् ॥ संदर्शनात्पलायंते व्याघ्राः सर्वे दशो दिशः ॥ ४३ ॥ सपेद कटइयाकी जड ले हस्तनक्षत्रमें हाथमें बांधे तौ व्याघ्र देखके दशों दिशाको भाग जाय ॥४३॥ मंत्रः । गौरीकांतै महादेवकेन जाई अहो बांधिजै हमारा कुत्ता हा आइ यह भूमि हमें छोडि दीजै तुरिय वर घर कीजै मेरे पास आवौ तौ हनुमतकी आन ॥ इस व्याघ्र बांधनेवाले मंत्रको पढ़े । पुनर्वशीकरणम् । पुष्ये धत्तूरपुष्पं च मूले मूलं च गृह्यते ॥ गोरोचनं च कर्पूरं समभागं समानयेत् ॥ ४४ ॥ पुष्य नक्षत्रमें धतूरेका पुष्प ले तथा मूल नक्षत्रमें जड़ ले और गोरोचन कपूर समभागले ॥४४॥ तिलकं कृत्य च भवेत्स्त्रीनामकथनेन च ॥ वशीभूता तदा याता महादेवप्रसादतः ॥ ४५ ॥ तिलक कर जिस स्त्रीका नाम ले वह महादेवके प्रसादके वश्य होय ॥४५॥ रात्रौ स्ववीर्यमादाय हस्ते कृत्वा तु यत्नतः ॥ वामांगुलिनाच यस्यायः स्त्रियांगुष्ठे निवेशयेत् ॥ ४६ ॥