भारतकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

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१४ रुद्रयामलतन्त्रम् कपूर मदारके फूलका बराबर चूर्णकर लिंगमें लेपन कियेसे स्त्री वश होय ॥५६॥ स्त्रीद्रावणम् । गौर्दारं वारिणा पिष्ट्वा हस्तस्योपरि लेपयेत् ॥ पुरुषस्पर्शमात्रेण स्त्री द्रवति विशेषतः ॥ ५७ ॥ गौदरिको पानीमें पीस हाथके ऊपर लेपन करे तो पुरुषके छूनेसे स्त्री द्रवे ॥५७॥ मंत्रः । ॐ नमो भगवती उगदामरेशुराह- द्रवै द्रवै स्त्रीणां पातय स्वाहा ठः ठः ॥ यह मंत्र पढे ॥ यह मंत्र पढ़े ॥ पतिवशीकरणम् । कौंडिल्यपक्षिविट् चैव मांसं घृतमलं तथा ॥ योनिलेपनमात्रेण पुरुषो याति वश्यताम् ॥५८ ॥ यह मंत्र पढ़े और कौडिल्लाकी विष्ठा मांसघृतके मैलका योनिमें लेपन करै तो पुरुष वश होय ॥५७॥ मंत्रः । ॐ काममालिनो ठः ठः स्वाहा । सप्तवारं पठेन्मंत्रं गोरोचनसमन्वितम् ॥ मत्स्यपित्तेन संयुक्तं तिलकं च करोति या ॥ वामांगुलिना तर्जयेत्पुरुषो याति वश्यताम् ॥५९ ॥ यह मंत्र सात वार पढ़ गोरोचनमत्स्यपित्तमें मिलाकर स्त्री तिलक करे तो पुरुष वश्य होय और वाई अंगुरी पुरुषके ओर करे तो भी पुरुष वश्य होय ॥५९॥