रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)
Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary
भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दीटीकासहितम् २९ यह मंत्र पढ़कर छवूदियाकीट, वीछूका टाक, तज और केवाचके बीज ले सब बराबर मर्दन कर ॥२२॥ यस्य वस्त्रे क्षिपेच्चैव बहुगुल्मप्रजायते ॥ मरणं सप्तदिवसे भवेत्तस्य न संशयः ॥ २३ ॥ जिसके कपड़ेपर छोड़ दे सो गुल्मरोगी हो सात दिनमें मर जाय ॥२३॥- चिताकाष्ठस्य धनुषं कच्छपस्य शरंतथा ॥ मृण्मयीं पुत्तलीं कृत्वा शत्रो रूपमयीं तथा ॥ शरेण वेधयेत्तां च मृत्युर्भवति नान्यथा ॥ २४ ॥ चिताकी लकड़ीकी धनु बनावे, कछुवाका तीर बनावे, माटीकी शत्रु- कीसी पुतरी बनावे और उसको तीरसे मारे तो शत्रु मरे यह अन्यथा नहीं है ॥२४॥ रक्तवर्णं शरैकं च स्वजंघास्थिधनुस्तथा ॥ २५ ॥ मयूरशिरस्य केशान्हस्ते कृत्वा विशेषतः ॥ दक्षिणाभिमुखं कृत्वा धनुषं च समरोपयत् ॥ २६ ॥ लाल रंगका एक शर बनावे और कुत्तेकी जंघाका धनुष बनावे, मोरके शिरके बाल हाथमें ले दक्षिणमुख होकर धनुष चढ़ावे ॥२५॥२६॥ सिंदूरसप्तमंडरान्कृत्वा सप्त नाम लिखेत् ॥ स्वशत्रोश्च धनुष्बाणं बाणेन व्यधमेच्चतम् ॥ २७ ॥ सिंदूरके सात लीके बनाके उसमें अपने शत्रु का नाम लिखे और शत्रु का धनुष बाण बनाके उसके अपने बाणसे मारे ॥२७॥ मंत्रः । ॐ हाथ खङ्गमूशल लै कमला गरुड़ पाय परति आवै ताहि मारि हो नर-