भारतकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

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२८ रुद्रयामलतन्त्रम् मंत्रः ॐ ह्रीं दंडीनंहीनमहादंडिनमस्ते ठः ठः। सप्तांगुलं मानुषास्थिकीलं निच खनेद्गृहे ॥ मंत्रेण च यस्य रिपोर्गृहं त्यक्त्वा पलायते ॥ १८ ॥ मंत्र पढ़कर सात अंगुल मनुष्यके हाड़की कील गृहमें गाडे तो शत्रु भाग जाय ॥१८॥ अर्द्धझारस्य कीलं च चतुरंगुलकं तथा ॥ मघायां च जपेन्मंत्रं वशीभूतो न संशयः ॥ १९ ॥ आधेझारेकी चार अंगुलकी लकड़ी मघा नक्षत्रमें ले मंत्र जपकर उसकी कील गाड़े तो वश्य होय ॥१९॥ पुष्यर्क्षे मानुषास्थिचतुरंगुलकीलकम् ॥ नामोच्चारणमात्रेण गृहे च निचखानयेत् ॥ सोपिमृत्युमवाप्नोतिब्रह्मणारक्षितो यदि ॥ २० ॥ पुष्यनक्षत्रमें मनुष्यके हाड़की कील ४ अंगुल लेकर मंत्र पढ़ नाम ले गाड़ दे सो ब्रह्मातक रक्षा करे तोभी मर जाय ॥२०॥ मंत्रः । ॐ शुरशुरे स्वाहा । सर्पास्थिचांगुलं चैकमाश्लेषार्क्षे समानयेत् ॥ निखनेत्सप्तमंत्रेण तदा च मरणं भवेत् ॥ २१ ॥ मंत्र पढ़कर सर्पके हाड़की एक कील ले आश्लेषा नक्षत्रमें ले सात बार मंत्र पढ़ गाड़े तौ मरण होय ॥२१॥ मंत्रः । ॐ शुक्ले स्वाहा । छूळ्दियाकीटमेकं वृश्चिकटंकमेव च ॥ तजं केवाक्षबीजं च चैकत्र सह मर्दयेत् ॥ २२ ॥