भारतकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

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हिन्दीटीकासहितम् २७ मंत्रः । ॐ नभो भगवते रुद्राय दंष्ट्राकरां लायकपिरूपाय अमुकपुत्रबांधवैः सह हन हन दह दह चय चय शीघ्रमुच्चाटय फुंफट् स्वाहा ठः ठः। मानुषास्थिसमादाय चतु रंगुलकं शुभम् ॥ यस्यांगणे निचखने- त्सोपि भाग्नो भवेद्गृहात् ॥ १५ ॥ यह मंत्र पढ़कर मनुष्यका हाड़ ४ अंगुल ले जिसके आंगनमें गाड़ देय तो गृहसे भाग जाय ।।१५।। भरण्यृक्षे समादाय स्मशानकाष्ठं त्र्यंगुलम् ॥ षट्सप्ततिवारांश्च जपित्वा मंत्रमेव च ।: यस्य गृहे निचखनेत्तस्य नाशो भवेद्ध्रुवम् ॥ १६ ॥ भरणी नक्षत्रमें मसानकी लकड़ी तीन अंगुल ले छिहत्तर ७६ वार मंत्र जप जिसके गृहमें गाडे उसका नाश होय ।।१६।। मंत्र । ॐ निरिनिहिउठः । ॐ नमो भगवतेरुद्राय अमुकगृहनगृहनपचपचत्रासय त्रोटयनाशयसुरतिराग्यायति ठः ठः। अंगुलैकं मानुषस्य चास्थिकीलं समानयेत् ॥ काकपित्तेन संश्लिष्टं द्वारि खानात्पलायते ॥ १७ ॥ यह मंत्र पढ़ एक अंगुल मनुष्यके हाड़की कील काकके पित्तमें भिजोके जिसके द्वारमें गाड़े सो भाग जाय ।।१७।।