रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)
Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary
भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२६ रुद्रयामलतन्त्रम् यह मंत्र पढ़कर स्वाति नक्षत्रमें उमरीकी लकड़ी ४ अंगुल ले जिसके भमिमें गाड़े वह शत्रु शीघ्र भाग जाय इसमें विचार नहीं ॥११॥ मंत्रः । गिली स्वाहा । भरण्यां च गृहीत्वैव अरुवापाखमुत्तमम् ॥ सप्तवारं च मंत्रेण निचखान गृहे यदा ॥ तदा पलायेद्रिपुश्चनात्र कार्या विचारणा ॥ १२ ॥ भरणी नक्षत्रमें अरुवाकीपाख कीशौनाकी छिपोंका पाख आधा फार ले सातवार मंत्र पढ़कर जिसके गृहमें गाड़ देय वह रिपु भाग जाय इसमें विचार नहीं ॥१२॥ मंत्र । ॐ दहदहवन स्वाहा । अश्वन्यृक्षे गृहीत्वैव वाज्यस्थिचतुरंगुलम् ॥ सप्तवारं च मंत्रेण निखनेच्च रिपोर्गृहे ॥ सोपि यातो गृहाच्छीघ्रं पलायनपरो भवेत् ॥ १३ ॥ अश्विनी नक्षत्रमें बाजीका हाड़ ४ अंगुल ले सात वार मंत्र पढ़कर शत्रुके घरमें गाड़ दे तो शत्रु भाग जाय ॥१३॥ मंत्रः ॐ घुंघूतिठःठः स्वाहा । अरुवावृक्षस्य पाषमष्टोत्तरशतं हुनेत् ॥ यस्य नाम गृहीत्वैव सोपि भग्नो भवेद्ध्रुवम् ॥ १४ ॥ शौनका एक पाश ले एक सो आठ वार मंत्र पढ़ जिसका नाम लेकर हवन करे सो भाग जाय ॥१४॥